wiring in Hindi | वायरिंग कितने प्रकार के होते हैं

दोस्तों, हम जानते है कि हमारे लिए पावर (बिजली) की कितनी आवश्यकता है। अतः आजकल तो छोटे छोटे काम भी करने के लिए बहुत सारे उपकरण आ चुके है जिसके लिए पावर सप्लाई को जरूरत होती है। अतः हमें छोटे काम से लाकर बड़े बड़े कामों को करने के लिए पावर सप्लाई को जरूरत होती है। इसीलिए हम उस पावर सप्लाई को हर जगह पर आवश्यकतानुसार पहुंचाने के लिए हम वायरिंग करने है। जिससे एक सुव्यवस्थित ढंग से पावर की आपूर्ति हो सके। आज के इस पोस्ट में हम वायरिंग (wiring in Hindi) क्या होता है और कितने प्रकार के होती है। इसके बारे में जानेंगे।

wiring in Hindi

वायरिंग क्या है (wiring in Hindi):-

दोस्तों, पावर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक केबल के जरिए पूरी सुव्यवस्थित ढंग से लेने को ही वायरिंग कहते हैं। वायरिंग की आवश्यकता हमे इसलिए पड़ती है क्योंकि हम चाहे घर में हो ऑफिस में हो या कही किसी इंडस्ट्री में हो। उसमे हमे अलग अलग जगहों पर अलग अलग प्रकार के पावर को जरूरत पड़ती है। उदाहरण के लिए अगर हम अपने घर में बेड पर हैं तो हमे लाइट जलानी पड़ती है तो हमे काम पावर की जरूरत पड़ती है। और यदि हम किचन में हैं तो ग्राइंडर, इंडक्शन हीटर आदि चलाने की जरूरत पड़ती है। जिसमे ज्यादा पावर को जरूरत होती है। अतः हमें हर जगह पर अलग अलग रेटिंग की पावर को जरूरत पड़ रही है।  इसी  जरूरत को पूरा करने के लिए हम वायरिंग करते है।

वायरिंग के प्रकार (types of wiring in hindi):-

दोस्तों, वायरिंग भी कई प्रकार के होती है। वायरिंग के प्रकारों को अलग अलग आधारों पर विभिन्न भागों में बांट सकते हैं।

स्थान के आधार पर (On the basis of place):-

  • घरेलू वायरिंग (domestic wiring)
  • व्यवसायिक वायरिंग (Commercial wiring)
  • इंडस्ट्रियल वायरिंग (Industrial wiring)

पावर खपत के आधार पर (On the basis of power consumption):-

  • लो लोड वायरिंग (low load wiring)
  • माध्यम लोड वायरिंग (Medium load wiring)
  • उच्च लोड वायरिंग (High load wiring)

Deomostic wiring in hindi :-

हम जो वायरिंग अपने घरों में करते हैं। उसे घरेलू वायरिंग कहा जाता है। घरेलू वायरिंग में हमे विभिन्न प्रकार के उपकरण जैसे लाइट, पंखा, कूलर, एसी, फ्रिज, ग्राइंडर, गीजर, TV, मोबाइल चार्जर, डिस वाशिंग मशीन, आदि घरेलू उपकरणों को चलाने की जरूरत होती है। अतः हम घरेलू वायरिंग को पावर खपत के आधार पर कैलकुलेशन कर के वायरिंग करते हैं। घरेलू वायरिंग का पावर लगभग मैक्सिमम 64 A तक ही करते है। कही कही कम पावर लोड के कारण 32 A तथा 15 A तक ही करते हैं।

घरेलू वायरिंग में दो प्रकार की वायरिंग की जाती है।

  1. सामान्य वायरिंग जो की 5 A तक की लोड को चलने के लिए को जाती है। सामान्य लोड में जैसे पंखा, लाइट, मोबाइल चार्जर, आदि आते है।
  2. पावर वायरिंग में 15 A या 32 A के लोड को चलने के लिए किया जाता है। जिसे हम पावर वायरिंग कहते है। इसमें हम कूलर, फ्रिज, प्रेस, हीटर आती उपकरणों को चलने के लिए किया जाता है।

कमर्शियल वायरिंग (Commercial wiring in Hindi):-

कमर्शियल वायरिंग यानी की व्यवसायिक स्थानों पर की जाने वाली वायरिंग व्यवसायिक वायरिंग कहलाती है। कमर्शियल वायरिंग वे वायरिंग कहलाते हैं । जिसमे बड़े स्तर पर लोड लगाया जाता है। स्कूल, फार्म, लघु उद्योग, योग सेंटर, शॉप,  मॉल, आदि स्थानों पर की जाने वाली वायरिंग ही कमर्शियल वायरिंग कारहलाती है। इसमें बिजली की खपत भी ज्यादा मात्रा में होती है। और सरकार द्वारा ऐसे स्थानों पर अलग प्रकार के टैरिफ लगाए जाते है। जिससे हम कमर्शियल टैरिफ कहते है। इसमें बिजिली का बिल सामान्य बिल से थोड़ा ज्यादा आता है।

कभी कभी कमर्शियल सप्लाई देने के लिए हमे एक अलग से ट्रांसफार्मर स्थापित करने की जरूरत होती है। ताकि इसका कनेक्शन अलग रह सके और इसके सप्लाई में बाधा न उत्पन्न हो।

इंडस्ट्रियल वायरिंग (Industrial wiring in Hindi):-

बड़े बड़े इंडस्ट्रियल वायरिंग में हमे लो वोल्टेज के लिए वायरिंग करने के साथ साथ उच्च वोल्टेज के उपकरणों के लिए भी वायरिंग करना पड़ता है। अतः हमें इंडस्ट्रियल वायरिंग में ज्यादा स्किल्ड पर्सन की जरूरत होती है। क्योंकि औद्योगिक क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के लोड के अलग अलग प्रकार के मोटर  को लगाने को जरूरत होती है। इसके साथ साथ बहुत सारे प्रकार के रोबोटिक मशीनों को लगाने को जरूरत पड़ती है। यही कारण है कि हमे इसमें ज्यादा अनुभवी होने की जरूरत होती है।

लो लोड वायरिंग:-

लो लोड वायरिंग ज्यादातर घरों में को जाती है। जिसमे लाइट पंखे तथा कुछ फ्रिज गीजर आदि लगाए जाते हैं।

मीडियम लोड वायरिंग :-

माध्यम स्तर के लोड हम कमर्शियल स्टार पर लगने वाले मशीनों को चलाने के लिए करते हैं।

हाई लोड वायरिंग :-

औद्योगिक स्तर पर प्रयोग की जाने वाली बड़ी बड़ी मशीनों तथा मोटरों को चलने के लिए को जाने वाली वायरिंग, उच्च लोड वायरिंग कहलाती है।

वायरिंग करने के फायदे :-

दोस्तों, वायरिंग करने से मतलब की हम पावर सप्लाई को एक स्थान से दूसरे स्थान तक एक व्यवस्थित ढंग से पहुंचाते हैं। अतः वायरिंग के निम्न फायदे हो सकते है।

  • वायरिंग करने से तार या केबल की अनावश्यक खर्च की बचत होती है।
  • वायरिंग करने से सप्लाई वाली केबल एक व्यवस्थित ढंग में रहता है।
  • वायरिंग नियमानुसार करने से फॉल्ट आने की संभावना कम होती है।
  • वायरिंग नियमानुसार करने से फॉल्ट को डिटेक्ट करने में आसानी रहती है।
  • वायरिंग करने से हम अपने उपकरण को जलाने से बचा सकते है।
  • वायरिंग करने से हमारे स्विच प्रत्येक लोड के लिए एक सुव्यवस्थित ढंग में रहता है। जिससे हमे लोड को ऑन ऑफ करने में आसानी रहती है।
Chandra Mani Vishwakarma
Chandra Mani Vishwakarma

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