Windmill turbine in Hindi | विंड मील पॉवर जनरेशन से जुडी रोचक जानकारियां

परिचय:

हमने अपने घरों में पावर का उपयोग तो करते ही है। अतः और हैं ये भी पता है की ये पावर कैसे जनरेट की जाती है। जैसे की हम पावर को विभिन्न प्रकार के पावर प्लांटों जैसे थर्मल पॉवर प्लांट, हाइड्रो पावर प्लांट, न्यूक्लियर पावर प्लांट, आदि से करते है। अतः इस क्रम में एक और पावर प्लांट होता है। जिसका नाम है विंड मील पावर प्लांट (Windmill turbine in Hindi) होता है। यानी की हवा के गति से से भी हम पावर जनरेट कर सकते हैं। तो आज के इस पोस्ट के जरिए हम विंड मील टर्बाइन कैसे काम करता है। और कितना वॉट तक बिजीली जनरेट करता है इसको हम अच्छे से समझेंगे।

Wind mill turbine क्या है? (Windmill turbine in Hindi) :

Basically windmill turbine एक ऐसा उपकरण है जो हवा की काइनेटिक एनर्जी को मैकेनिकल एनर्जी में सबसे पहले कन्वर्ट करता है उसके बाद से उस मैकेनिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में कन्वर्ट करके हमें प्रोवाइड करता है। यानी कि हम कह सकते हैं कि विंडमिल टरबाइन हवा की काइनेटिक एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में परिवर्तित करने का एक उपकरण है।

Windmill turbine in Hindi

अगर आप कहीं फोटो में देखे होंगे कि बड़े-बड़े फील्ड एरिया में बहुत ही बड़े बड़े साइज के फैन लगे होते हैं उसी फैन को हम विंडमिल टरबाइन (Windmill turbine in Hindi) कहते हैं। यह विंडमिल टरबाइन के बहुत ही बड़े बड़े पंखे लगे होते हैं जो धीरे-धीरे घूमते रहते हैं और एक ही स्पीड से लगातार घूमते रहते हैं। अतः विंडमिल टरबाइन इस स्पीड से ही लगातार विद्युत पावर पैदा करता रहता है। अगर भारत की बात करें तो भारत में विंडमिल टरबाइन से लगभग 10% का पावर जनरेट किया जाता है। यानी कि पूरे भारत में उत्पन्न की गई बिजली का सिर्फ 10% ही विंडमिल टरबाइन से उत्पादित किया जाता है।

Windmill power generation में इंडिया का कौन सा स्थान है?:

यह सबसे अच्छा सवाल है कि हम यह जानना जरूरी है कि विंडमिल के द्वारा पावर जनरेशन करने की क्षेत्र में इंडिया का कौन सा स्थान है तो एक ही भारत का विंडमिल पावर जनरेशन के मामले में पूरे विश्व में 4th स्थान है। भारत में विंडमिल टरबाइन से कुल पावर का उत्पादन वर्तमान में 42,633 मेगावाट है। अगर हम 2005 के डाटा को देखेंगे तो 2005 में विंडमिल टरबाइन से पावर का उत्पादन सिर्फ 6270 मेगा वाट के बिजली का उत्पादन होता था।  यानी की 2005 से अब तक 2022 या 2023 तक इन 17 सालों में windmill से पावर का उत्पादन में 60 -65 गुना को वृद्धि हुई है। यानी की हर साल विंडमिल से पावर के उत्पादन में तीन गुना वृद्धि हुई है।

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ज्यादातर जो हमारे विंडमिल टरबाइन (Windmill turbine in Hindi) लगाए गए हैं वह इंडिया के साउथ के राज्यों में वेस्ट के राज्य में और नॉर्थवेस्ट के राज्य में लगाया गया है। का इसीलिए किया गया है क्योंकि यह विंड मिल चुकी हवा के गति पर और तीव्रता पर निर्भर करता है। इसीलिए हमें यह देखने को मिलता है। जिस क्षेत्र से मानसूनी हवाएं चलती हैं। उधर साइड ओर ही विंड टरबाइन को लगाते हैं। नीचे आपको विंड की हवाओं को स्थिति का मैप देख सकते है। इसमें आपको रेड वाला एरिया में हवाओं के चलने की स्पीड ज्यादा है। अतः इन्ही क्षेत्रों में ही विंड मिल turbine को स्थापित भी किया गया।

भारत का कौन सा राज्य windmill से सबसे ज्यादा बिजली का उत्पादन करता है?:

भारत में सबसे ज्यादा गुजरात राज्य सबसे ज्यादा windmill से पावर का उत्पादन करता है। गुजरात वर्तमान में 10,144 मेगावाट बिजिलि का उत्पादन करता है। जो को अन्य राज्यों के अपेक्षा सबसे ज्यादा  है ।

No.StateGeneration Capacity (MW)
1Gujrat10,144.02
2Tamil Nadu10,073.52
3Maharashtra5,026.33
4Karnataka5,294.95
5Rajasthan5,193.42
6Andhra Pradesh4,096.65
7Madhya Pradesh2,844.29
8Telangana128.10
9Kerala62.50
10Others4.30
Total42,868.08
Windmill turbine in Hindi

विंडमिल टरबाइन की उत्पादन क्षमता क्या है?:

अगर हम विंडमिल टरबाइन के उत्पादन की क्षमता की बात करें तो विंडमिल टरबाइन के साइज पर हम उसकी क्षमता को आंक सकते हैं। अगर विंडमिल टरबाइन ज्यादा बड़ा है तो वह ज्यादा पावर जनरेट करेगा और अगर विंडमिल टरबाइन छोटा है तो कम पावर जनरेट करेगा। अगर एक नॉर्मल रेंज की बात करें तो विंडमिल टरबाइन 2 मेगावाट से 8 मेगावाट तक की बिजली पैदा कर सकता है। यानी कि सबसे छोटा विंडमिल टरबाइन 2 मेगावाट बिजली पैदा कर सकता है और सबसे बड़ा विंडमिल टरबाइन 8 मेगावाट की बिजली पैदा कर सकता है।

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विंड मिल turbine काम कैसे करता है? :

यह बहुत एक महत्वपूर्ण सवाल है कि आखिर विंडमिल टरबाइन काम कैसे करता है। जबकि आपने देखा होगा कि विंडमिल टरबाइन के जो बड़े-बड़े फैन है बहुत ही स्लो मोशन में घूमते रहते हैं तो इतनी स्लो मोशन में घूमने से हमें पावर जनरेशन कैसे होता है। जानकारी के लिए बता दूं कि जो हमारा विंडमिल का फैन घूमता है वह 10 से 15 आरपीएम की गति से घूमता है जो कि बहुत ही धीमी गति होती है। हमें पता है कि पावर जनरेशन हमारा 50hrz का होता है। और इसके लिए हम एक गति की जरूरत होती है। यानी कि तेज गति की जरूरत होती है। तो हम इसी डाउट्स को क्लियर करेंगे कि आखिर यह इतने स्लो में घूमने के बावजूद भी विंडमिल टरबाइन से 50 Hrz की बिजली कैसे पैदा होती है

50 Hrz की फ्रीक्वेंसी के पावर पैदा करने के लिए हम विंडमिल के पीछे एक गियर बॉक्स लगाते हैं। यह गियर बॉक्स अपने आउटपुट पर जो धीमा गति से घूम रहा था, गियर बॉक्स के आउटपुट पर लगभग 1000 से 1500 RPM की गति देता है। और इसी गियर बॉक्स के आउटपुट से हम अल्टरनेटर को कनेक्ट करते हैं। इसके साथ ही अगर यह 1000 से 1500 आरपीएम, 50 Hrz की फ्रीक्वेंसी की बिजली पैदा करने के लिए पर्याप्त नहीं होती है, तो हम अल्टरनेटर के पोल को भी चेंज करते हैं। फ्रीक्वेंसी को बढ़ाने या घटाने के लिए भी हम नॉर्मली अल्टरनेटर के पोल को भी चेंज कर सकते हैं। इसके लिए एक फार्मूला आता है जो कि निम्न है। N= 120f/ P जहां N सिंक्रोनस स्पीड है, f, frequency है, P, पोल है। यानी की इसमें यदि हम frequency को कॉन्स्टेंट रखनी हैं, तो इसके लिए हमे पोल को चेंज करके 50 Hrz की फ्रूकेंसी प्राप्त कर सकते है।

विंड मिल से कितना वोल्ट की बिजिली पैदा होता है?:

विंडमिल से लगभग 400 से 630 वोल्ट तक की बिजली पैदा करते हैं। इस पैदा की हुई बिजली को हम सबसे पहले स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर में भेजते हैं। ऐसा इसलिए करते हैं तक क्योंकि हमें इस बिजली को दूर तक पहुंचाना होता है। और इस पावर को अन्य पावर स्टेशन से आए पावर के ग्रिड से सिंक्रोनाइज भी करना रहता है।

अतः हम इसके लो वोल्टेज को हम हाई वोल्टेज पर करके इस पावर को ट्रांसफर करते हैं।  हाई वोल्टेज पर पावर ट्रांसफर करने का एक फायदा यह होता है कि हमारा लॉसेस कम होता है क्योंकि करंट की वैल्यू घट जाती है और वोल्टेज की वैल्यू बढ़ जाती है जिससे हमारा लॉसेस कम हो जाता है और हम दूर दूर तक बिजली को भेज सकते हैं। यही कारण है कि हम जनरेशन स्टेशनों पर स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर का इस्तेमाल करते हैं और वोल्टेज की मात्रा को बहुत ज्यादा बढ़ा देते हैं उसके बाद से हम सभी स्टेशनों पर हम स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर का इस्तेमाल करके उस बढ़े हुए वोल्टेज को स्टेप डाउन कर कर वोल्टेज की मात्रा कम करके फिर घरों में सप्लाई देते हैं।

विंडमिल टरबाइन में किस टाइप का अल्टरनेटर इस्तेमाल किया जाता है?:

अगर हम विंडमिल टरबाइन में अल्टरनेटर की बात करें तो सबसे अच्छा अल्टरनेटर परमानेंट मैग्नेट टाइप अल्टरनेटर होता है। अतः हम विंडमिल टरबाइन में Delco Permanent Magnet Alternators (PMAs) का इस्तेमाल करते हैं।

विंडमील का औसतन साइज क्या होता है?:

इसमें पावर जेनरेशन करने वाले विंड मील के टावर की ऊंचाई 212 फीट होती है। और लगभग इसकी एक ब्लेड की लंबाई होती है 116 फीट। यह जो साइज है यह सिर्फ 1.3 – 2 मेगावाट पावर जनरेट करने के लिए होती है। अगर इससे ज्यादा मेगावाट की पावर जनरेशन करने। वाले windmill के ब्लेड की साइज 143 फीट और टावर की ऊंचाई 256 फीट होती है। इस हिसाब से आप अंदाजा लगा सकते है की ये कितने विशालकाय यंत्र होता है। एक यह भी कारण होता है विंड मिल के पंखे के धीमे घूमने का।

एक विंडमिल लगाने का कितना खर्च होता है?:

अगर एक 2 मेगावाट का windmill लगाना है। तो इसका औसतन लागत 10 से 15 करोड़ का खर्च आता है। यही खर्च यदि पावर को खपत बढ़ती है तो उसके समनुपति बढ़ भी जाता है।

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