कैसे एक लोहा चुम्बक बन जाता है 

लगभग 1500-2000 साल पहले मैगनिशिया नामक स्थान पर एक पदार्थ पाया गया, जिसका रंग गहरा भूरा था। और यह पदार्थ पत्थर नुमा आकार का था।

उस पदार्थ की इस प्रकार का गुण उस समय के लिए काफी आश्चर्य की बात थी। उसके इस गुण के कारण उस पदार्थ का नाम उसके स्थान के नाम पर मैग्नेटाइट रखा गया। तथा उस पदार्थ की इस गुण को चुंबकत्व  कहा गया।

इस पत्थर में खास बात यह थी कि यह लौह युक्त पदार्थों को अपनी तरफ आकर्षित करता था

1. प्राकृतिक चुंबक (Natural magnet) 2. कृत्रिम चुंबक (Artificial magnet)

चुंबक के प्रकार

चुंबक का चुंबकीय नियम

– जैसा कि हमने ऊपर पढ़ा है कि चुंबक के दो ध्रुव उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव होते हैं। अतः यदि हम दो चुंबक (magnet) लेते हैं तो दोनों के समान ध्रुव वाले सिरे एक दूसरे को विकर्षित करते हैं। मतलब धकेलते हैं। दूसरी स्थिति में दो चुंबक के असमान ध्रुवो  के बीच आकर्षण बल लगता है।

दो चुंबक ओके ध्रुवों के बीच लगने वाले बल की मात्रा  उन दोनों युवकों के बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

 मान लीजिए कि दो चुंबक एक निश्चित दूरी पर रखा हुआ है। तो उन दोनों चुंबक पर लगने वाला बल उन दोनों ध्रुवों की तीव्रता के गुणनफल के समानुपाती होता है।

एक ही चुंबक के दोनों ध्रुव उत्तरी तथा दक्षिणी ध्रुव की सामर्थ्य शक्ति एक समान होती है या बराबर होती है।