Synchronous motor in Hindi | सिंक्रोनस मोटर का उपयोग कैसे करते हैं

परिचय (Introduction):-

सिंक्रोनस मोटर (Synchronous motor in Hindi) या सिंक्रोनस जनरेटर या अल्टरनेटर (Alternator) दोनों की संरचना समान होती है। यानी कि हम एक सिंक्रोनस मोटर को जनरेटर या अल्टरनेटर की तरह भी प्रयोग कर सकते हैं। यह बात ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार एक डीसी मोटर को डीसी जनरेटर के बाद प्रयोग कर सकते हैं।

तो आज के इस पोस्ट में हम सिंक्रोनस मोटर के बारे में विस्तार से आसान भाषा में समझेंगे।

तुल्यकाली मोटर या सिंक्रोनस मोटर (Synchronous motor in Hindi):-

जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह एक समान गति से चलने वाला मोटर है। लोड बढ़ने पर इसकी गति में परिवर्तन नहीं देखने को मिलता है। लेकिन इसको तुल्यकाली मोटर कहने का मुख्य तात्पर्य यह है कि यह मोटर ठीक उसी स्पीड से घूमता है जिस स्पीड से मोटर में दिए गए सप्लाई के द्वारा उत्पन्न रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड घूमता है। यानी कि यह सिंक्रोनस मोटर Ns स्पीड से घूमता है। अतः इसे सिंक्रोनस मोटर कहते हैं।

सिंक्रोनस स्पीड का सूत्र –
Ns = 120 f / P
जहां Ns = Synchronous speed
f = frequency
P = Number of pole

यह सिंक्रोनस मोटर वास्तव में स्वचालित नहीं होती है। इसको चलाने के लिए इसे किसी और माध्यम से रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड के स्पीड के बराबर घुमाया जाता है। तो इसके रोटर को रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड लॉक कर लेता है तथा यह रोटर सिंक्रोनस स्पीड से घूमने लगता है।

इस सिंक्रोनस मोटर में खास बात यह है कि इसको दोनों प्रकार के पावर फैक्टर लेगिंग तथा लीडिंग पर चलाया जा सकता है।

मान लीजिए कि इस मोटर को अल्टरनेटर के रूप में प्रयोग कर रहे हैं और दो अल्टरनेटर को एक साथ समांतर में जोड़ा गया है तो अब मान लीजिए कि एक अल्टरनेटर का प्राइम मूवर हटा लिया जाए तो वह अल्टरनेटर्स उसी सप्लाई से पावर लेकर अपने उसी चाल से मोटर की भांति कार्य करने लगेगा। तथा बिना किसी मैकेनिकल छति के काम आगे चलता रहेगा।

सिंक्रोनस मोटर का कार्य सिद्धांत (working principle of synchronous motor in Hindi):-

सिंक्रोनस मोटर की कार्य सिद्धांत को आसान भाषा में समझने के लिए पहले हमें इसके चित्र को ध्यान से देखना होगा। जो नीचे दिखाया गया है।

Synchronous motor in Hindi

आप देख सकते हैं कि सिंक्रोनस मोटर को थ्री फेज की सप्लाई दी गई है। इस सप्लाई के कारण मोटर के अंदर स्टेटर में एक रोटेटिंग मैग्नेटिक फील्ड उत्पन्न करेगा पूर्णविराम इस मैग्नेटिक फील्ड का स्पीड, सिंक्रोनस स्पीड होगा। मान लीजिए कि stator का ध्रुव Ns तथा Ss है। और यह भी सिंक्रोनस स्पीड से घूम रहा है।
अब माना कि स्टेटर का चुंबकीय क्षेत्र क्लाकवाइज (clockwise) घूम रहा है।
अब माना कि रोटर को एक डीसी सप्लाई के जरिए excitation दिया जा रहा है। तो रोटर भी एक नियत ध्रुव बनाएगा जो N तथा S होगा।

अब चुकी स्टेटर के मैग्नेटिक फील्ड सिंक्रोनस स्पीड से घूम रहा है तो माना कि स्टेटर के मैग्नेटिक फील्ड के प्रथम आधे चक्र में स्टेटर पोल NS बिंदु पर A तथा SS बिंदु, B पर है इस स्थिति में रोटर पर एक बल लगेगा जो एंटीक्लाकवाइज होगा।

अब स्टेटर के ध्रुव के दूसरे आधे चक्र में स्टेटर पोल घूमकर Ns बिंदु B पर तथा Ss बिंदु A पर आ जाता है, तो इस स्थिति में रोटर पर बल क्लाकवाइज दिशा में लगेगा।
इस प्रकार हम देखते हैं कि रोटर सिर्फ कंपन कर रहा है। अतः यदि हम रोटर को किसी और माध्यम से सिंक्रोनस स्पीड से घुमाने के बाद रोटर में डीसी उत्तेजक सप्लाई दिया जाए तो हम देखेंगे कि रोटर पोल स्टेटर के पोल से इंटरलॉक हो जाएगा तथा रोटर भी लगातार सिंक्रोनस स्पीड से घूमना प्रारंभ कर देगा।

सिंक्रोनस मोटर को चालू करने की विधि (methods of starting of a synchronous motor):-

जैसा कि हमने पहले पड़ा है कि तुल्यकाली मोटर या सिंक्रोनस मोटर सेल्फ स्टार्टिंग नहीं होती है। अतः हमें इसे शौचालय बनाने के लिए निम्न विधियों का प्रयोग करना पड़ता है।

  1. प्राइम मूवर मेथड
  2. सेल्फ स्टार्टिंग मेथड

प्राइम मूवर विधि (Prime mover method):-

इस विधि का हम पहले भी वर्णन कर चुके हैं। यह विधि एक काफी पुरानी विधि है। आजकल यह विधि ना के बराबर उपयोग में लाई जाती है। इसमें हम मोटर को स्वचालन बनाने के लिए मोटर के shaft को एक डीजल इंजन या पेट्रोल इंजन चलित प्राइम मूवर से घुमाते है। जब हम इसे सिंक्रोनस स्पीड पर घुमाकर उसके बाद जब रोटर में डीसी एक्सिटेशन देते है, तो रोटर, stator के घुमाते हुए मैग्नेटिक फील्ड से इंटरलॉक हो जाता है। तथा मोटर भी synchronous spped से घुमाने लगती है।

सेल्फ स्टार्टिंग विधि (self starting method): –

आधुनिक सिंक्रोनस मोटरों में यह विधि इस्तेमाल किया जाता है। इसमें मोटर के पोल शू में डैंपर वाइंडिंग या squirrel cage winding का इस्तेमाल किया जाता है। यह डंपर वाइंडिंग तांबे की छड़ों का बनी होती है। तथा इसे मोटर के पोल सु में एंबेडेड किया जाता है। इन तांबे के छड़ों को दोनों सिरों पर शॉर्ट सर्किट किया जाता है।

इन डैंपर वाइंडिंग का मोटर में मुख्य दो कार्य होते हैं।

  1. सिंक्रोनस मोटर को स्वचालित बनाना
  2. यह सिंक्रोनस मोटर में होने वाली हंटिंग के प्रभाव को कम करती है।

अब देखते हैं मोटर के स्टार्ट करने की प्रक्रिया –

सबसे पहले तो हम रोटर में लगे मेन फील्ड वाइंडिंग जिससे हम डीसी उत्तेजक सप्लाई देते हैं उस मेन फील्ड वाइंडिंग को शार्ट सर्किट कर देते हैं।

उसके बाद हम मोटर को एक ऑटो ट्रांसफार्मर की सहायता से कम वोल्टता प्रदान करते हैं।

जैसे ही सप्लाई मिलती है सिंक्रोनस मोटर पहले शुरू में धीरे-धीरे एक इंडक्शन मोटर की तरह घूमना प्रारंभ करती है।

जब मोटर इसी स्थिति में अपनी गति का 95% गति प्राप्त कर लेती है, तो उसके बाद हमने जो मेन फील्ड वाइंडिंग शॉर्ट सर्किट किया था उसे हटाकर उसमें डीसी सप्लाई सप्लाई दे देते हैं।

जब हम उत्तेजन बढ़ाते हैं, तो मोटर का रोटर, रोटेटिंग पोल बनाता है जो स्टैटर के रोटेटिंग पोल से इंटरलॉक हो जाता है।

इंटरलॉक होने के पश्चात मोटर का रोटर भी सिंक्रोनस स्पीड से घूमने लगती है।

अब इसके बाद हम मोटर को ऑटो ट्रांसफार्मर के सप्लाई से हटाकर मेन सप्लाई से कनेक्ट कर देते हैं।

नोट: –
सिंक्रोनस मोटर को उपरोक्त विधि से चालू करने में हमें यह ध्यान देना चाहिए कि जब मोटर को शुरुआत में सप्लाई दी जाती है तो उस समय रोटर स्थिर अवस्था में रहता है। परिणाम स्वरूप रोटर में बहुत अधिक मात्रा में विद्युत वाहक बल (emf) पैदा होती है। और इस समय चुकी रोटर की वाइंडिंग (मेन फील्ड वाइंडिंग) भी शॉर्ट सर्किट रहती है तो करंट का मान भी बहुत अधिक होता है। यही कारण है कि इस प्रकार के मोटर में रोटर फील्ड वाइंडिंग को उच्च विद्युत रोधी बनाया जाता है।

सिंक्रोनस मोटर का उपयोग (uses of synchronous motor in Hindi): –

  1. सिंक्रोनस मोटर का उपयोग हम सभी स्टेशनों पर पावर फैक्टर को सुधारने के लिए करते हैं। इसके लिए सब स्टेशन के बस बार के समांतर में सिंक्रोनस मोटर को जोड़कर ओवर excitation  पर नो लोड की कंडीशन में चलाते हैं। जिससे लैगिंग पावर फैक्टर सुधर जाता है। क्योंकि Over excitation पर सिंक्रोनस मोटर रिएक्टिव पावर डिलीवर करता है।
  2. बहुत से बड़े बड़े उद्योगों में जहां पर हजारों प्रकार के इंडक्टिव मोटर्स और उपकरण चल रहे हैं। जिसके कारण उद्योग की सप्लाई का ‘लोड पावर फैक्टर’ बहुत ज्यादा लैगिंग हो जाता है, तो हम इस स्थिति में भी सिंक्रोनस मोटर को सप्लाई के समांतर में नो लोड की कंडीशन में over excitation देकर चलाया जाता है। 
  3. लंबी ट्रांसमिशन लाइनों में ज्यादा इंडक्टिव लोड के कारण ट्रांसमिशन लाइन का भी पावर फैक्टर लेगिंग हो जाता है जिसे हम सिंक्रोनस मोटर लगाकर सुधार कर लेते हैं।

सिंक्रोनस मोटर के लाभ (advantages of synchronous motor in Hindi):-

  • इस मोटर के द्वारा पावर फैक्टर को excitation को घटा तथा बढ़ाकर सुधारा जा सकता है।
  • यह शून्य लोड से फुल लोड तक एक समान गति से चलती रहती है लोड बढ़ने पर इसके गति में परिवर्तन नहीं होता है।
  • इलेक्ट्रिक मैग्नेटिक पावर वोल्टेज के साथ घटती बढ़ती रहती है।

सिंक्रोनस मोटर के हानि (Disadvantages of synchronous motor in Hindi):-

  • इसे लोड के साथ चालू नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसकी स्टार्टिंग तक जीरो होता है।
  • चुकी नियत स्पीड वाली मशीन है। अतः हमें मोटर को उस जगह पर नहीं प्रयोग कर सकते जहां पर परिवर्तित स्पीड की जरूरत होती है।
  • इसको दिष्ट धारा excitation की जरूरत होती है। अतः इसे एक बाहरी सप्लाई देने की भी जरूरत होती है।
  • इसमें कलेक्टर रिंग की आवश्यकता होती है अतः इसका मूल्य अन्य मोटरों की अपेक्षा अधिक होती है।
  • इन्हें छोटी से वर्कशॉपो में प्रयोग करना कठिन होता है। क्योंकि इसको प्रयोग के लिए बहुत से अन्य प्रकार के साधन जैसे एक अलग से डीसी सप्लाई तथा अन्य तकनीकी ज्ञान की जरूरत होती है।

सिंक्रोनस मोटर और इंडक्शन मोटर में अंतर (Difference between synchronous motor and induction motor):-

सिंक्रोनस मोटर इंडक्शन मोटर
तुल्याकारी मोटर किसी भी लोड पर समान गति से चलता है।इंडक्शन मोटर पर लोड बढ़ने पर उसके गति में कमी हो जाती है।
सिंक्रोनस मोटर लैगिंग तथा लीडिंग दोनो प्रकार के पावर फैक्टर पर चला सकते है।इंडक्शन मोटर सिर्फ लैगिंग पावर फैक्टर पर चलती है।
सामान्यतः सिंक्रोनस मोटर स्वचालित नही होती है।इंडक्शन मोटर स्वचालित होती है।
सिंक्रोनस मोटर में उत्तेज़न के लिए डीसी सप्लाई को जरूरत पड़ती है। इसमें किसी प्रकार की excitation की जरूरत नहीं होती है।
प्रयुक्त वोल्टाता में परिवर्तन से सिंक्रोनस मोटर के बालाघूर्ण पर उतना प्रभाव नहीं पड़ता।इंडक्शन मोटर में प्रयुक्त वोल्टाता के परिवर्तन बालाघूर्न पर प्रभाव पड़ता है।
सिंक्रोनस मोटर का बालाघूर्ण प्रयुक्त वोल्टता के प्रथम घात के समानुपाती होता है।इंडक्शन मोटर में बालाघूर्ण प्रयुक्त वोल्टेज के वर्ग के समानुपति होता है।
 Synchronous motor मंहगी और जटिल होती है। इंडक्शन मोटर सरल और सस्ती होती है।
सिंक्रोनस मोटर का पावर फैक्टर इसके excitation पर निर्भर करता है।इंडक्शन मोटर का शक्ति गुणांक उस लगे लोड पर निर्भर करता है। लेकिन इसका हमेशा पावर फैक्टर लेगिंग ही होता है।
Chandra Mani Vishwakarma
Chandra Mani Vishwakarma

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