Printer in Hindi | प्रिंटर क्या है और यह कितने प्रकार की होते हैं

परिचय (Introduction):-

जब हम किसी भी कंप्यूटर से डाटा को, जो कि एक सॉफ्ट कॉपी होती है उसे हार्ड कॉपी बनाने के लिए सोचते हैं तो हमें प्रिंटर याद आता है। प्रिंटर ही है जो कंप्यूटर के सॉफ्ट कॉपी को हार्ड कॉपी में बदलता है। और आपके सामने लाता है। तो आज के इस पोस्ट में हम प्रिंटर (Printer in Hindi) क्या होता है तथा यह कितने प्रकार का होता है और प्रिंटर का इतिहास क्या है यह सब बातें विस्तार से समझेंगे।

प्रिंटर क्या है (Printer in Hindi):-

प्रिंटर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। जो कंप्यूटर में स्टोर डाटा को एक कागज पर छपता है। यह डाटा एक अक्षर, लेख, चित्र आदि हो सकता है। प्रिंटर कंप्यूटर का एक आउटपुट डिवाइस होता है। चुकी प्रिंटर कई प्रकार के होते हैं। यही कारण है कि इनकी प्रिंटिंग क्वालिटी (Printing quality) भी अलग-अलग होती है। अतः इन प्रिंटरओं में प्रिंटिंग क्वालिटी को डीपीआई (DPI) में मापा जाता है। जिस का फुल फॉर्म डॉट पर इंच (Dot per inch) है।

Printer in Hindi

आजकल प्रिंटर को में भी इतनी अधिक आधुनिकता आ गई है कि हम वायरलेस कंट्रोल के माध्यम से भी प्रिंटर को कंप्यूटर से कमांड दे सकते हैं। और प्रिंटर उसे प्रिंट करके बाहर निकाल सकता है। वायरलेस के रूप में हम ब्लूटूथ तथा वाईफाई कनेक्शन का उपयोग करते हैं। इसके साथ-साथ अगर हम कहीं ज्यादा दूर भी बैठे हैं जिससे हम ब्लूटूथ तथा वाईफाई के कवरेज क्षेत्र से बाहर है, तो भी हम इंटरनेट कनेक्शन के जरिए क्लाउड कमांड से प्रिंट कर सकते हैं।

प्रिंटर का इतिहास (history of printer in Hindi):-

कंप्यूटर के जनक कहे जाने वाले चार्ल्स बैबेज ने पहली बार अपनी किसी अविष्कार जिसका नाम डिफरेंस इंजन था। उसके उद्देश्य हेतु प्रिंटर का आविष्कार किया था। यह अविष्कार 19वीं सदी में की गई थी।
लेकिन बीसवीं सदी तक भी इस अविष्कार को पूरा नहीं किया जा सका। लेकिन इसी अविष्कार के कारण ही हमें प्रिंटर नाम का एक कंसेप्ट तैयार होगा। और उसी कंसेप्ट को अध्ययन करने के पश्चात जापान की कंपनी Epson ने वर्ष 1968 में एक प्रिंटर बनाया। इस प्रिंटर का नाम EP – 101 रखा गया। यह प्रिंटर एक इलेक्ट्रॉनिक प्रिंटर था।

लेकिन अगर कमर्शियल स्तर की बात की जाए तो उस समय तक इलेक्ट्रॉनिक टाइपराइटर और टेली टाइप मशीन का प्रयोग किया जाता था। लेकिन जैसे जैसे डिमांड बड़ा वैसे वैसे अविष्कार भी होने लगा।

वर्ष 1984 में HP कंपनी ने एक प्रिंटर बनाया। जिसका नाम HP laser jet रखा गया। उसके कुछ समय बाद ही एप्पल कंपनी ने अपना एक Apple laser Writer नामक प्रिंटर बनाया। उसके बाद तो प्रिंटर के क्षेत्र में मानो क्रांति ही आ गई। और उसके बाद एक से एक एडवांस प्रिंटर बनाए जाने लगा। साल 2000 तक तो इंटरनेट ने भी दस्तक दे दी थी। जिससे प्रिंटर की डिमांड और बढ़ गई।

2010 तक हम प्रिंटर के क्षेत्र में इतना विकसित हो गए कि हमने एक 3D प्रिंटर भी डिवेलप कर लिया। अब इस 3D प्रिंटर के द्वारा अब हम लोग 3D डिजाइन भी आसानी से बना लेते हैं।

प्रिंटर के प्रकार (Types of printer in Hindi):-

प्रिंटर को मुख्य तो दो वर्गों में बांटा जा सकता है।

  1. इंपैक्ट प्रिंटर (Impact printer)
  2. Non-impact printer

Impact printer in Hindi:-

जैसा कि नाम से ही लग रहा है कि यह प्रिंटर कागज पर छापने के लिए अक्षरों के बने मोहर नुमा हैमर से स्याही लगे रिबन पर मारता है, जिससे रिबन कागज पर उस अक्षर को छाप देता है। यह प्रिंटर बिल्कुल टाइपराइटर की तरह काम करता है। यह चुकी कागज पर छापने के लिए कागज पर एक झटका से स्ट्राइक करता है इसीलिए इसमें प्रिंटिंग के समय शोर ज्यादा होता है। लेकिन प्रिंटिंग लागत काफी कम होती है। अतः यह बल्क मात्रा में प्रिंटिंग के लिए ज्यादा उपयोगी होता है।

इस प्रिंटर के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं।

  1. अक्षर प्रिंटर (Character printer)
  2. लाइन प्रिंटर (Line Printer)

अक्षर प्रिंटर (Character printer):-

इस प्रिंटर के द्वारा एक बार में केवल एक अक्षर छपता है। अथवा इसके द्वारा केवल अक्षर छापा जाता है। इस प्रिंटर के द्वारा ग्राफिक्स या तस्वीर को नहीं छापा जा सकता है। यह करैक्टर प्रिंटर दो प्रकार के होते हैं।

  1. डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix Printer)
  2. डेजी व्हील प्रिंटर (Daisy wheel printer)

डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot Matrix Printer):-

जैसा कि नाम से ही लग रहा है कि यह प्रिंटर डॉट या बिंदु की मदद से अक्षरों को बनाती है। इसमें बहुत सारी पिन कागज पर बहुत सारे डॉट छोड़ते हैं। तथा यह बहुत सारे डॉट मिलकर एक अक्षर बनाते हैं। एक कैरेक्टर को कागज पर छापने के लिए बहुत सारे डॉट की जरूरत पड़ती है। यह प्रिंटर आजकल बहुत कम उपयोगी होती है। यह प्रिंटर वही इस्तेमाल होता है जहां पर अत्यधिक मात्रा में छपाई की जरूरत होती है।

डेजी व्हील प्रिंटर (Daisy wheel printer):-

इस प्रिंटर में एक गोलाकार के स्ट्रक्चर होता है। इसमें सभी प्रकार के कैरेक्टर को एक गोलाकार के स्ट्रक्चर में सेट किया जाता है। और जब किसी कैरेक्टर के बटन को दबाते हैं तो उस अक्षर का मुहर नुमा स्ट्रक्चर व्हील पर घूमकर कागज पर स्याही और रिबन के साथ मारता है। और अक्षर को प्रिंट कर देता है।

लाइन प्रिंटर (Line Printer):-

इस प्रिंटर को बार प्रिंटर भी कहा जाता है। यह लाइन प्रिंटर एक बार में पूरी लाइन प्रिंट करता है। अतः इसे आज भी बिजनेस क्षेत्र में प्रयोग किया जाता है। इसमें प्रिंटिंग की लागत कम आती है।

Non impact Printer in Hindi:-

इस प्रिंटर में किसी भी प्रकार का हैमर स्ट्राइक की जरूरत नहीं पड़ती है। यह प्रिंटर बिना किसी प्रकार का इंपैक्ट डालें कागज पर छपता है। यह प्रिंटर, एक आधुनिक प्रिंटर के अंतर्गत आता है। इस प्रिंटर में किसी प्रकार का शोर भी नहीं होती है। इस प्रिंटर की छापने की स्पीड भी इंपैक्ट प्रिंटर की अपेक्षा काफी अच्छी होती है।

इस प्रिंटर के द्वारा अच्छे-अच्छे ग्राफिक्स इमेज को भी कागज पर आसानी के साथ कलरफुल रूप में भी छाप सकते हैं। आजकल इसी प्रिंटर का ज्यादातर प्रयोग किया जाता है।

इस प्रिंटर के मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं।

  1. लेजर प्रिंटर (Laser printer in Hindi)
  2. इंकजेट प्रिंटर (Inkjet printer in Hindi)

लेजर प्रिंटर (Laser printer in Hindi):-

लेजर प्रिंटर में प्रिंट करने के लिए लेजर लाइट का उपयोग किया जाता है। इसकी प्रिंटिंग स्पीड काफी तेज होती है। इसमें एक सिलैंडरिकल ड्रम होता है। जिसे फोटोरिसेप्टर कहा जाता है। यह सिलैंडरिकल ड्रम इलेक्ट्रिकली पॉजिटिव चार्ज होता है।

फोटोरिसेप्टर या सिलैंडरिकल ड्रम पर लेजर लाइट तब गिरती है जब पेपर प्रिंटर से बाहर निकलता है। प्रिंटर का लेजर लाइट कंप्यूटर से मिले डाटा के अनुसार अपना एक पैटर्न लेजर बनाता है। और पैटर्न लेजर सिलेंड्रिकल ड्रम पर बना देता है। जब यह पैटर्न बन जाता है तो यह टोनर कार्टेज उसी पैटर्न का एक लेयर बनाकर पेपर प्रिंट कर देता है। और उसे उसी समय बाहर भी निकाला जाता है। यानी की प्रिंट भी होता रहता है और बाहर भी निकलता रहता है। इसकी प्रिंटिंग क्वालिटी 600 डीपीआई होती है।

इंकजेट प्रिंटर (Inkjet printer in Hindi):-

इस inkjet printer के द्वारा आयननाइज्ड ink का स्प्रे पहले एक मैग्नेटिक प्लेट पर गिरता है। उसके बाद यह मैग्नेटिक प्लेट उसी तस्वीर या पैटर्न को कागज पर छत देती है। इसकी प्रिंटिंग क्वालिटी 300 DPI होती है।

प्रिंटर को कंप्यूटर से कैसे कनेक्ट करें:-

प्रिंटर को कंप्यूटर से बहुत से प्रकार से कनेक्ट कर सकते हैं। जो निम्न है।

  • यूएसबी केबल के द्वारा
  • ब्लूटूथ के द्वारा
  • क्लाउड कनेक्शन के द्वारा
  • वाईफाई के द्वारा
  • सीरियल पोर्ट के द्वारा
  • पेरलेल पोर्ट के द्वारा
Chandra Mani Vishwakarma
Chandra Mani Vishwakarma

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