Nuclear power plant in Hindi | न्यूक्लियर पावर प्लांट की संरचना

परिचय:-

जैसा कि हम जानते हैं कि बिजली पैदा करने के लिए बहुत से प्रकार के प्लांटों का निर्माण किया जाता है। जिसमें से मुख्यता थर्मल पावर प्लांट, हाइड्रो प्लांट तथा न्यूक्लियर पावर प्लांट है। इस पोस्ट में न्यूक्लियर पावर प्लांट (Nuclear power plant in Hindi) के बारे में विस्तार से समझेंगे। यह कैसे काम करता है तथा इसके लाभ तथा हानियों को भी समझेंगे।

न्यूक्लियर पावर प्लांट (nuclear power plant in Hindi):-

ऐसा पावर प्लांट जिसमें ईंधन के रूप में यूरेनियम तथा थोरियम नामक तत्व का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें यूरेनियम पर न्यूट्रॉन की बमबारी करके एक ऊर्जा का चैन रिएक्शन को सक्रिय कर दिया जाता है। जिससे यूरेनियम से लगातार एक चैन रिएक्शन में ऊर्जा निकलती रहती है। इस ऊर्जा का इस्तेमाल हम बिजली उत्पन्न करने में करते हैं।

इसमें यूरेनियम नामक तत्व जो कि काफी महंगा होता है और यह तत्व एक रेडियो एक्टिव तत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि 1kg यूरेनियम में 2500 टन कोयला के दहन से प्राप्त उर्जा के बराबर ऊर्जा होती है।
जिस प्रकार थर्मल पावर प्लांट में पानी को गर्म करने के लिए कोयला को इंदन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। उसी प्रकार इस में यूरेनियम तथा थोरियम को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

Uranium:-

चुकी यूरेनियम को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो इसके बारे में थोड़ा बहुत जान लेते हैं। युरेनियमको U से इंडिकेट करते हैं। यूरेनियम को उनके नाभिक में उपस्थित न्यूट्रॉन तथा प्रोटोन की संख्या के आधार पर तीन प्रकार से वर्णन किया गया है।
1. U239 :- यह प्राकृतिक यूरेनियम का लाता है। मतलब कि या प्रकृति रूप में इसी संरचना में यूरेनियम उपस्थित रहती है।
2. U235 :- जब हम U239 को निकाल कर उसे बड़े-बड़े मशीनों के द्वारा इनरीच किया जाता है तो U235 बनकर तैयार होता है। तथा यह शुद्ध यूरेनियम कहलाता है। इस यूरेनियम की मात्रा नेचुरल यूरेनियम से 0.7% परसेंट होती है।
3. एक और यूरेनियम का रूप होता है जिसे हम U233 कहते हैं।

मॉडरेटर (moderator):-

रिएक्टर में जब यूरेनियम पर न्यूट्रॉन की बमबारी की जाती है तो अत्यधिक मात्रा में ऊष्मा उत्पन्न होता है। तथा साथ में न्यूट्रॉन की एक चेन रिएक्शन शुरू होता है। जिससे उस्मा की मात्रा और बढ़ती जाती है। अपने neutron की चेन रिएक्शन को धीमा करने के लिए हम रिएक्टर में कूलिंग रोड लगाते हैं। जो जरूरत पड़ने पर अंदर कर दिया जाता है। जिससे न्यूट्रॉन की गतिशीलता को नियंत्रित किया जाता है।

लेकिन फिर भी देखा जाता है कि ऊर्जा की मात्रा बढ़ती ही जाती है। अतः उस स्थिति में हम ऊष्मा की मात्रा को कंट्रोल करने के लिए मॉडरेटर का इस्तेमाल करते हैं। मॉडरेटर के रूप में हम भारी जल का इस्तेमाल करते हैं। जिसे D2O से प्रदर्शित करते हैं।

न्यूक्लियर पावर प्लांट की संरचना (structure of nuclear power plant in Hindi):-

जैसे कि आप न्यूक्लियर पावर प्लांट की संरचना चित्र में देख सकते हैं।

Nuclear power plant in Hindi

यह प्लांट विभिन्न भागों से मिलकर बना होता है। जो कि निम्न है।

• रिएक्टर
• हीट एक्सचेंजर
• कूलेंट सर्कुलेटिंग पंप
• टरबाइन
• Feed water pump
• गवर्निंग वाल्व
• कंडेनसर
• कूलिंग टावर
• वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
• अल्टरनेटर

रिएक्टर(Reactor in Hindi):-

यह न्यूक्लियर पावर प्लांट का मुख्य भाग होता है। इसमें ही यूरेनियम पर न्यूट्रॉन की बमबारी करके ऊर्जा उत्पन्न कर आते हैं। इस रिएक्टर में उत्पन्न हुई ऊष्मा को एक प्लांट के द्वारा हीट एक्सचेंजर में भेजा जाता है। इस रिएक्टर में बहुत सारे भाग होते हैं। जिसमें से कुछ मुख्य भाग निम्न प्रकार है।

• कूलिंग रोड
• रिफ्लेक्टर
• मॉडरेटर

कूलिंग रॉड का उपयोग रिएक्टर में ऊष्मा की मात्रा को नियंत्रित करने का है। यह छड़ बोरॉन या कैडमियम की धातु का बना होता है। जो न्यूट्रॉन की गतिशीलता को कम करता है

Reflector यह रिएक्टर की सतहों पर लगाया जाता है। जो उस्मा को बाहर जाने नहीं देता है। और साथ में इस में उपस्थित विकिरण को बाहरी वातावरण में जाने नहीं देता है। रिफ्लेक्टर के लिए जिनकोमियम और बेरिलियम की पर लगाई जाती है।

रिएक्टर की दीवारें काफी मोटी बनाई जाती हैं। ताकि विकिरण का प्रभाव बाहर तक ना आ सके।

हीट एक्सचेंजर :-

यह एक ऐसा भाग होता है जिसमें रिएक्टर से आने वाले ऊष्मा का उपयोग किया जाता है। आप न्यूक्लियर पावर प्लांट (Nuclear power plant in Hindi) के डायग्राम में इसे देख सकते हैं। इसमें एक पाइपनुमा मुड़ा हुआ आकार का एक बड़े से बक्से में बंद दिखाई दे रहा है। इस पाइप के द्वारा ऊष्मा का चालन होता है। तथा इस हीट एक्सचेंजर में उपस्थित पानी ऊष्मा को ग्रहण कर भाप में बदल जाता है। आप देख सकते हैं कि ऊपर के भाग वाले पाइप से hot coolant आता है, और अपनी उस्मा हीट एक्सचेंजर को देकर ठंडा होकर नीचे की तरफ चला जाता है।

कूलेंट सर्कुलेटिंग पंप:-

यह ठंडा हुई coolant को फिर से रिएक्टर में भेज देता है। तथा फिर यह कूलेंट रिएक्टर में गर्म होता है और ऊपर उड़ता है। तथा फिर ऊपर की तरफ जाता है और यह साइकिल लगातार चलती रहती है।

टरबाइन:-

यह हीट एक्सचेंजर से निकलने वाली स्टीम में उपस्थित पोटेंशियल एनर्जी को मैकेनिकल एनर्जी में परिवर्तित करता है। मतलब कि जो हमने हीट एक्सचेंजर में स्टीम उत्पन्न करी है। उसका उपयोग करने के लिए उसे टरबाइन में भेजते हैं। ऐसे टरबाइन को स्टीम टरबाइन करते हैं।

गवर्निंग वाल्व: –

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कंट्रोलिंग सिस्टम होता है। यह हीट एक्सचेंजर से निकलने वाले स्टीम की मात्रा को नियंत्रित करता है। क्योंकि जब हमे काम पावर जेनरेशन की आवश्यकता होती है तो हमे स्टीम की सप्लाई को भी काम करना पड़ता है। और स्टीम सप्लाई को कम करने के लिए हम गवर्निंग वाल्व का उपयोग करते हैं।

फीड वाटर पंप:-

थर्मल पावर प्लांट में हमने देखा कि बॉयलर में पानी को पहुंचाने के लिए फीड वाटर पंप को आवश्यकता होती है। अतः उसी प्रकार न्यूक्लियर पावर प्लांट (Nuclear power plant in Hindi) में भी पानी को हीट एक्सचेंजर में पहुंचने के लिए एक मोटर पंप की आवश्यकता होती है। जिसे हम फीड वाटर पंप कहते है। इसकी पावर रेटिंग बहुत उच्च होती है।

कंडेंसर:-

थर्मल पावर प्लांट की तरह ही इस प्लांट में भी निम्न प्रेशर वाले स्टीम को हम कंडेशर की मदद से स्टीम को पानी में परिवर्तित करते हैं।

कूलिंग टावर :-

यह कूलिंग टावर कंडेनसर से निकले पानी को 40°C तक ठंडा करता है। क्योंकि हमारी मजबूरी होती है। जब कंडेनसर से पानी निकलता है। तो वह 100°C पर होता है। अतः जब हम 100°C वाले पानी को हाई प्रेशर वाले हीट एक्सचेंजर में भेजने का प्रयास करेंगे तो उच्च प्रेशर पर यह पानी भाप में बदल जाता है। यही कारण है कि पानी का तापमान 40°C तक गर्म करना अनिवार्य होता है।

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट:-

थर्मल पावर प्लांट की तरह ही इसमें भी नदियों से आने वाली पानी में उपस्थित मिनरल को अलग करने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को स्थापित करना पड़ता है। यह पानी जो वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलता है। उसे डीमिनरल वाटर कहा जाता है। यह पानी महंगा होता है अतः हमें इसे पुनः इस्तेमाल करना जरूरी होता है।

अल्टरनेटर:-

यह प्लांट का लास्ट और सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। या अल्टरनेटर ही टरबाइन के मैकेनिकल एनर्जी को इलेक्ट्रिकल एनर्जी में परिवर्तित करता है। यह प्लांट की क्षमता के हिसाब से अलग-अलग रेटिंग के होते हैं। पावर प्लांट में लगने वाले अल्टरनेटर की वोल्टेज रेटिंग एक 11kv से 27kv होता है। अल्टरनेटर से प्राप्त पावर को स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर से उच्च वोल्टेज पर दूर-दूर तक ट्रांसमिट किया जाता है।

भारत में स्थापित न्यूक्लियर पावर प्लांट: –

भारत में हालांकि न्यूक्लियर पावर प्लांट (Nuclear power plant in Hindi) की संख्या कम है लेकिन फिर भी भारत में कुल न्यूक्लियर पावर प्लांट की संख्या 22 है। जिसमें से मुख्य न्यूक्लियर पावर प्लांट निम्न प्रकार है।

  • कोटा न्यूक्लियर पावर प्लांट राजस्थान
  • तारापुर न्यूक्लियर पावर प्लांट महाराष्ट्र
  • नरौरा न्यूक्लियर पावर प्लांट उत्तर
  • कुंड कुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट तमिलनाडु
  • कैगा न्यूक्लियर पावर प्लांट कर्नाटक
  • कलपक्कम न्यूक्लियर पावर प्लांट चेन्नई तमिल नाडु

न्यूक्लियर रिएक्टर के प्रकार (types of nuclear reactor in Hindi):-

न्यूक्लियर रिएक्टर भी बहुत से प्रकार के होते हैं। जिसमें अलग-अलग देशों के द्वारा अपनी अपनी तकनीकी का इस्तेमाल कर डिजाइन किया गया है। अतः मुख्य रूप से चार प्रकार के रिएक्टर होते हैं। जो काफी ज्यादा प्रयोग में लाए जाते हैं। यह निम्न है।

  1. Pressurized water reactor (PWR)
  2. Boiling water reactor (BWR)
  3. Fast breeder reactor (FBR)
  4. Canadian deuterium Uranium reactor (CANDU)

न्यूक्लियर पावर के लाभ (advantage of nuclear power plant in hindi):-

अगर हम न्यूक्लियर पावर प्लांट की बात करें तो हम जानते हैं इसमें यूरेनियम का इस्तेमाल इंधन के रूप में होता है। पता इसके लाभ निम्न प्रकार के हो सकते हैं।

  • इस प्लांट से कार्बन का उत्सर्जन लगभग शून्य होता है। अथवा प्लांट वायु प्रदूषण को लगभग ना के बराबर फैलाता है।
  • यह प्लांट अन्य प्लांट ओके अपेक्षा कम जगह घेरता है।
  • यह प्लांट त्वरित गति से नियंत्रित किया जा सकता है। मतलब कि अगर हमें कम पावर की आवश्यकता है तो हम पावर जनरेशन की मात्रा को बड़े ही त्वरित गति से कम कर सकते हैं।
  • इस प्लांट की दक्षता काफी उच्च होती है।
  • इस प्लांट की विश्वसनीयता भी अधिक होती है।

न्यूक्लियर पावर प्लांट के हानि (disadvantages of nuclear power plant in Hindi):-

इस पर प्लांट के कुछ हानिबी है जो कि निम्न प्रकार हैं।

• सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण हानी यह है कि इसमें ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाला यूरेनियम एक अत्यधिक रेडिएशन उत्पन्न करने वाला पदार्थ है। अतः उस यूरेनियम को निकालने के लिए जो हम माइनिंग करते हैं उस स्थान पर जहां पर हम माइनिंग कर रहे हैं वहां पर रेडिएशन लेवल बहुत ज्यादा ऊंचा होता है जिससे वहां पर काम करने वाले मनुष्यों को बहुत से प्रकार की बीमारियां होने लगती हैं।
• इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में पानी की खपत भी होती है।
• इस प्लांट में चुकी रिएक्टर में यूरेनियम का रिएक्शन कराया जाता है जो काफी हद तक सेफ रहता है। लेकिन फिर भी अगर रिएक्टर में कुछ गड़बड़ी आ गई तो यह रिएक्टर फट भी सकता है। और रेडिएशन पूरे क्षेत्र में फैल सकता है जिससे आसपास के रहने वाले लोगों को घातक बीमारियां होने की आशंका हो सकती है।
• इससे निकलने वाले रेडियो एक्टिव वेस्ट जो बहुत ही जहरीला होता है तथा इसका निपटारा करना भी बहुत ही कठिन काम होता है।
• या एक non-renewable प्लांट होता है।

Chandra Mani Vishwakarma
Chandra Mani Vishwakarma

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6 thoughts on “Nuclear power plant in Hindi | न्यूक्लियर पावर प्लांट की संरचना”

    • ohk dost jaise hi mujhe time milega to mai neuclear plants ke sabhi types ke baare me isi post me update kar dunga

      suggestion ke liye thanks.

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