NEFT RTGS and UPI in hindi | यह कैसे काम करता है

परिचय :-

हम लोग जिस जमाने में या कहे तो जिस आधुनिक युग में जी रहे हैं। उसमें आपने कभी ना कभी तो ऑनलाइन पेमेंट किया ही होगा। आज के इस पोस्ट में हम विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन पेमेंट की विधियों जैसे नेफ्ट,आरटीजीएस, आइएमपीएस तथा यूपीआई (NEFT RTGS and UPI in Hindi) को समझेंगे कि यह सारी पेमेंट सिस्टम कैसे कैसे काम करता है। और हम इस में कौन से सबसे बेहतर है इसको भी समझेंगे।

ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम (online payment system):-

ऐसा पेमेंट जो ऑनलाइन यानी कि इलेक्ट्रॉनिक विधि के जरिए की जाए उसे ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम कहते हैं। जब से इंटरनेट की दुनिया में हम प्रवेश किए हैं तब से हम ऑनलाइन पेमेंट को तेजी से बढ़ा रहे हैं। और आजकल तो वर्तमान में भारत दुनिया का सबसे ज्यादा ऑनलाइन पेमेंट करने वाला देश बना है। हमने इस मामले में चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। अतः आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि हम इस क्षेत्र में कितना आगे बढ़ चुके हैं।

NEFT RTGS and UPI in hindi

इन्हीं सभी ऑनलाइन या इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट (NEFT RTGS and UPI in Hindi) के कुछ विधियों को समझेंगे।

NEFT (National electronic fund transfer):-

इस का फुल फॉर्म तो आपको हेडिंग में देख ही चुके हैं। यह भारत के बैंक सिस्टम चलाने वालों की तरफ से बनाया गया एक ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम है। जिसको भारत के बैंक वालों ने 2005 में ऑनलाइन पेमेंट को पूरा करने के लिए बनाया था। दोस्तों चुकी 2005 में हमारे टेक्नोलॉजी उतनी विकसित नहीं थी और साथ ही में हमारे पास इतनी फास्ट इंटरनेट की सुविधा भी नहीं थी। अतः हम कह सकते हैं कि जितनी भी सुविधा या टेक्नोलॉजी हमारे बैंक वालों के पास थी उसके अनुसार इस NEFT को बनाया गया था।

और आज वह इस टेक्नोलॉजी को यूज कर रहे हैं। इस नेफ्ट में पैसा को एक group of transaction के रूप में एक बार में भेजा जाता है। इसमें ऐसा होता है को जब एक समय के बाद कुछ ट्रांजेक्शन हो जाते है। तो उस सभी ट्रांजेक्शन को एक साथ रिसीवर के अकाउंट में भेजा जाता है। उदाहरण के लिए माना को एक घंटे में 500 ट्रांजेक्शन हुए हैं। तो वह 500 ट्रांजेक्शन का एक समूह बनाया जाता है। उसके बाद वह समूह को एक बार में भेजा जाता है।

एक बात और यह है कि नेफ्ट का प्रयोग करने का भी एक समय होता है। जो बैंकिंग के working hours में होता है। ताकि यदि कोई गड़बड़ी होती है तो बैंक के कर्मचारी उस समय उपलब्ध हो । और उसे ठीक कर सके। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि बैक वालों को उस समय, जिस समय यह नेफ्ट बनाया गया नेफ्ट पर भरोसा नहीं था।

RTGS :-

इस का फुल फॉर्म रियल टाइम ग्रॉस सेटेलमेंट होता है। यह सिस्टम भी बैंक वालों के द्वारा ही बनाया गया एक सिस्टम है। इसमें ऐसा होता है कि इसकी नाम से ही आपको लग रहा होता है कि इसमें पैसे इलेक्ट्रॉनिकली एकदम रियल टाइम पर भेजा जाता है। इसका मतलब कि यदि कोई व्यक्ति आता है और वह व्यक्ति दो लाख से अधिक या दो लाख तक का अमाउंट तुरंत भेजना चाहता है तो उसके लिए बैंक वालों ने एक सिस्टम बनाया जिससे आरटीजीएस कहते हैं। इसमें आपका पैसा जो कि 200000 या 200000 से अधिक होना चाहिए इमीडिएट बेसिस पर भेजना हो तो आपको आरटीजीएस द्वारा आसानी से रियल टाइम पर भेजा जाएगा।

आरटीजीएस से ट्रांजेक्शन करने पर हमारे कुछ चार्ज कटते है। जो की वेरिएबल होते है।

IMPS:-

इस का फुल फॉर्म इमीडिएट पेमेंट सिस्टम होता है। यह सिस्टम बैंक वालों ने नहीं बनाया है। यह आइएमपीएस सिस्टम भारत सरकार के आरबीआई के द्वारा एक अलग डिवीजन बनाया गया है जिस डिवीजन का नाम है एनपीसीआई। यह एनपीसीआई बहुत सारे ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम को बनाया है जिसमें से आइएमपीएस पेमेंट सिस्टम एक है। यह आइएमपीएस सिस्टम 24 * 7 काम करता है। और इसके द्वारा पैसा का ट्रांसफर तुरंत किया जाता है। आइएमपीएस का सबसे मुख्य फायदा यह था कि पहली बात तो यह एक गवर्नमेंट के द्वारा बनाया गया सिस्टम है। जो कि काफी विश्वसनीय भी है। और इस और दूसरी बात यह कि 24 * 7 इसकी सुविधा उपलब्ध रहती है। जो कि एक काफी सुविधाजनक लगती है। क्योंकि लोगों को जब जरूरत लगे किसी भी टाइम अपने पैसे को ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। इसके भी कुछ अपने चार्जेस होते हैं जो कि आपको देने पड़ते हैं।

अब इसमें क्या था कि लोगों को आइएमपीएस के द्वारा पैसे भेजने के लिए अपने बैंक अकाउंट के डिटेल्स को लोगों के साथ शेयर करने पड़ते थे। जो कि काफी हद तक एक फ्रॉड होने का चांस था। आपका बैंक एकाउंट हैक होने का संभावना भी थी।अतः इसके बाद एनपीसीआई ने एक नया सिस्टम लाया जिसका नाम है यूपीआई।

UPI:-

इस का फुल फॉर्म होता है यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस। इसका उपयोग आज के समय में सबसे ज्यादा हो रहा है। हम कह सकते हैं कि यदि भारत ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के मामले में सबसे आगे है तो इसमें यूपीआई ने सबसे बड़ा रोल प्ले किया है।

इसमें भी पैसा आइएमपीएस के द्वारा ही ट्रांसफर होती है। लेकिन यूपीआई का इस्तेमाल करने से आपका ट्रांजैक्शन करने में जो भी थोड़ा समय लगता है। व और कम हो जाएगा।

आइएमपीएस से हम जानते हैं कि हमें ट्रांजैक्शन के लिए अपने अकाउंट डिटेल देने पड़ते हैं। जो कि एक सिक्योरिटी का खतरा होता है। लेकिन वहीं अगर यूपीआई की बात करें तो इसमें हम किसी भी प्रकार का अकाउंट नंबर या अकाउंट डिटेल्स नहीं देते हैं।

यूपीआई में एक unique यूपीआई आईडी बनाई जाती है। जो कि आपके अकाउंट नंबर से मैप होती है। अतः जब आप यूपीआई आईडी से कोई पैसा भेजा जाता है तो वह सीधे आपके मैप किए गए अकाउंट में आ जाएगा।

अतः इसमें आपको किसी भी प्रकार का अकाउंट डिटेल देने की जरूरत नहीं पड़ती है। और सबसे खास बात यह है कि यह यूपीआई मोबाइल बैंकिंग में इस्तेमाल की जाती है। अतः यह आपके मोबाइल से भी पैसा आसानी से ट्रांसफर करने में सफल होता है।

अगर हम यूपीआई आईडी की बात करें तो आप अपने यूपीआई आईडी को QR कोड में कन्वर्ट कर सकते हैं। और इसे किसी के भी साथ शेयर कर सकते हैं। इससे भेजने वाले को और भी आसानी होती है। क्योंकि इसमें हमें सिर्फ मोबाइल से इस क्यूआर कोड को स्कैन करने की जरूरत होती है।

Chandra Mani Vishwakarma
Chandra Mani Vishwakarma

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