Harmonics in Hindi | हार्मोनिक से हमारे इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर प्रभाव

परिचय:

दोस्तों इलेक्ट्रिकल सिस्टम में बहुत सारी फेनोमेना घटित होती है। जिसमे से एक घटना भी होती है। यह फेनोमेना सिर्फ एसी सप्लाई में घटित होती हैं। आज के इस पोस्ट के जरिए हम ये समझनेगे कि हार्मोनिक (Harmonics in Hindi) क्या होती है और यह क्यों पैदा होती है। तथा इसके क्या नुकसान है और और इसके साथ ही इसे कैसे काम कर सकते हैं।

हार्मोनिक क्या है (what is harmonic in electrical system):

दोस्तों आप जानते है की अल्टरनेटिंग करंट में wave की प्रकृति एक सिनोसोइडल (sinusoidal wave) की तरह होती है। जैसे की आपको इस चित्र में में दिखा रहा होगा।

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अब इस वेव में भी जो एक समान गति से चल रही है। उसमे भी एक प्रकार का डिस्टर्शन (distortion) उत्पन्न हो जाए। और उस distortion के साथ सिनोसॉइडल वेव आगे बढ़े तो इस डिस्ट्रोशन को ही हार्मोनिक कहते है। इस डिस्ट्रोशन का चित्र आप नीचे देख सकते हैं।

Harmonics in Hindi

हार्मोनिक के प्रकार (Types of harmonic in Hindi):

मुख्य रूप से अगर हम देखे तो हार्मोनिक दो प्रकार के उत्पन्न होते हैं।

1. वोल्टेज हार्मोनिक (Voltage harmonics in Hindi)
2. करेंट हार्मोनिक (Current harmonics in Hindi)

Voltage harmonic:

वोल्टेज हार्मोनिक का मतलब की अगर सप्लाई के वोल्टेज वेव  सिग्नल में हार्मोनिक उत्पन्न होना वोल्टेज हार्मोनिक कहलाता है।

Current हार्मोनिक:

करेंट हार्मोनिक्ट का मतलब की अगर सप्लाई के करंट सिग्नल में हार्मोनिक देखने को मिले तो उसे हम करंट हार्मोनिक कहते हैं।

हार्मोनिक उत्पन्न करने वाले डिवाइस :

दोस्तों, हार्मोनिक उत्पन्न होने के विभिन्न प्रकार के कारण हो सकते हैं। जैसे कि –

  1. घरों में यदि हार्मोनिक उत्पन्न होने की अगर बात करें हम लोग जो फैन रेगुलेटर का इस्तेमाल करते हैं। यह रेगुलेटर भी सप्लाई में हार्मॉनिक उत्पन्न होने के कारण हो सकते हैं।
  2. घरों में हम विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे कंप्यूटर, मोबाइल चार्ज, ups आदि इस्तेमाल करते हैं। जो कि हार्मोनिक प्रोड्यूस करने का कारण होते हैं।
  3. अगर हम इंडस्ट्री में बात करे तो हम हम इंडस्ट्री में इलेक्ट्रॉनिक वेल्डिंग मशीन, मोटर की गति को कंट्रोल करने के लिए वीएफडी (VFD) लगाते हैं।
  4. यदि घरों में आया ऑफिस में प्रिंटर, स्कैनर आदि का इस्तेमाल करते है तो भी ये डिवाइस हार्मोनिक उत्पन्न करते हैं।

हार्मोनिक कैसे उत्पन्न होता है?(how harmonic produced):

तो दोस्तों, अगर हम बात करे कि आखिर ये जो हम ऊपर डिवाइस का वर्णन किया है जो हार्मोनिक डिस्ट्रोशन उत्पन्न कर रहे हैं। इसमें आखिर कौन सा कंपोनेंट होता है जो सप्लाई के सिग्नल में हार्मोनिक हार्मोनिक उत्पन्न करता है।

तो सबसे पहले तो हम यह देख लेते हैं कि आखिर यह हारमोनिक्स उत्पन्न कैसे होता है। जो डिवाइस मिली सेकंड में कई बार स्विचिंग की प्रक्रिया को पूरी करता है तो उसमें जो सिग्नल होता है वह डिस्टोर्ट होने लगता है। जिसे हम हारमोनिक्स फिनोमिना कहते हैं।

अतः जिस डिवाइस में इस प्रकार की कंप्लेंट लगे हैं जो मिली सेकंड में कई बार स्विचिंग की प्रक्रिया करते हैं। तो उस डिवाइस को अगर हम किसी सप्लाई में लगाते हैं तो हारमोनिक्स उत्पन्न होने के चांसेस होते हैं।

अगर हम देखें की एक भी VFD  है जो कि वेरिएबल फ्रिकवेंसी ड्राइव होता है उसमें या किसी भी बिल्डिंग मशीन में आईजीबीटी (IGBT) कंपोनेंट लगा होता है।  यह आईजीबीटी कंपोनेंट मिली सेकंड में कई बार स्विचिंग की प्रक्रिया को करता है जिससे कि सिग्नल डिस्टर्ट हो जाता है। और परिणाम स्वरुप हारमोनिक्स उत्पन्न होता है।

इसके अलावा एससीआर एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट है जो 1 मिली सेकंड में कई बार स्विचिंग की प्रक्रिया को पूरा करता है तो अगर यह कंपोनेंट भी किसी डिवाइस में लगा है। और उसे अगर हम सप्लाई में लगाते हैं तो हारमोनिक्स की घटना हमें देखने को मिलेगी।

इसके अलावा हमारे घरों में जो रेगुलेटर यूज किया जाता है हम यहां पर इलेक्ट्रॉनिक रेगुलेटर की बात कर रहे हैं।  इस रेगुलेटर में ट्रायक (triac) नाम का इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट लगा होता है, जो कि बहुत ही तीव्र गति से स्विचिंग की प्रक्रिया को करता है। जिससे की सप्लाई में हारमोनिक्स उत्पन्न होता है।

अगर हम वेल्डिंग मशीन की बात करें तो उसमें भी आईजीबीटी के साथ बहुत सारे ऐसे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट लगे होते हैं जिसमें स्विचिंग की प्रक्रिया काफी तेज होती हैं।

स्विचिंग की प्रक्रिया तेज होने से हमारा सिग्नल खराब कैसे होता है?:

स्विचिंग की प्रक्रिया इन सारे कंपोनेंट (IGBT, triac, diac, SCR etc.) में इतनी तीव्र होती है कि जब तक हमारे सप्लाई का सिग्नल एक चक्कर या एक साइकिल पूरा करता है तब तक यह कंपोनेंट कई बार स्विचिंग या ऑन ऑफ की प्रक्रिया को पूरा कर देते हैं।  जिससे कि  सप्लाई का सिग्नल की ग्राफ एक स्मूथ रेखा में न होकर एक zig zag मोशन में बन जाता है।

हारमोनिक्स से होने वाले नुकसान :

दोस्तों हारमोनिक्स से सबसे बड़ा अगर कुछ नुकसान होता है, तो वो हमारे लोड का एफिशिएंसी घट जाता है। उदाहरण के लिए मान लीजिए की अगर कोई मोटर है जो कि एक लोड पर चल रहा है।  और सप्लाई से 15 एम्पियर का करेंट ले रहा है। और हमारे सप्लाई में अगर हार्मोनिक्स है तो हार्मोनिक्स के कारण जो हमारा लोड अभी भी 15 एम्पियर ही लोड लेगा। लेकिन मोटर पर जो मैकेनिकल आउटपुट मिलेगा। वह आउटपुट हमारे 15 एम्पियर जितना नही मिलेगा। जिससे की हमारे मोटर का ओवर ऑल एफिशिएंसी घर जाती है।

हार्मोनिक को कम कैसे करें (how to reduce harmonic):

दोस्तों हार्मोनिक को कम करने लिए हम सप्लाई में हार्मॉनिक फिल्टर लगाते हैं। यह हार्मोनिक (Harmonics in Hindi) फिल्टर मुख्यत तीन प्रकार के कंपोनेंट से मिलकर बना होता है। इसमें मुख्य पार्ट होता है रिएक्टर और दूसरा कैपेसिटर और तीसरा IGBT होता है। इन तीनो को मिलाकर हार्मोनिक फिल्टर का निर्माण करते हैं।

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अब सवाल यह आता है कि जो हमारा IGBT कंपोनेंट है वह हमने पहले पढ़ चुका है कि यह कंपोनेंट को harmonic को प्रोड्यूस करने ने सहायक होता है। तो आखिर हार्मोनिक फिल्टर में क्यों लगाते है। तो आपको बता दें कि यह IGBT कंपोनेंट हार्मोनिक क्रिएट करता है तो इसके साथ हार्मोनिक को कम भी करने का काम करता है।

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