Galvanometer in hindi | गैल्वेनोमीटर क्या है तथा इससे क्या मापा जाता है

परिचय(introduction to Galvanometer)

इलेक्ट्रिकल सप्लाई के अलग-अलग प्रकार के मानो को मापने के लिए अलग-अलग प्रकार की मापन यंत्र की जरूरत होती है। अतः यदि हमें सप्लाई का करंट का मापन करना है तो हम गैल्वेनोमीटर (Galvanometer in hindi) का प्रयोग करते हैं। इस पोस्ट के अंतर्गत हम समझेंगे की गैल्वेनोमीटर क्या है तथा इसकी संरचना और कार्य विधि को भी विस्तार से समझेंगे।

गैल्वेनोमीटर क्या है (Galvanometer in hindi)

गैल्वेनोमीटर(Galvanometer in hindi) एक के सूचक यंत्र है। यह किसी परिपथ में प्रवाहित होने वाले करंट को मापता है। यह किसी परिपथ में बहने वाली धारा को अपने इंडिकेटर के द्वारा स्केल पर दर्शाता है। यह बहुत ही सेंसिटिव (sensitive) इंस्ट्रूमेंट है।

Galvanometer in hindi
Galvanometer

गैल्वेनोमीटर के प्रकार (Types of Galvanometer in hindi)

गैल्वेनोमीटर मुख्यता दो प्रकार की होती है।

  1. मूविंग मैग्नेट टाइप गैल्वेनोमीटर (Moving magnet type Galvanometer)
  2. मूविंग कॉयल टाइप गैल्वेनोमीटर (Moving coil type Galvanometer)

मूविंग मैग्नेट टाइप गैल्वेनोमीटर (Moving magnet type Galvanometer)

इस प्रकार का गैल्वेनोमीटर tangent Galvanometer कहलाता है। इस गैल्वेनोमीटर के द्वारा विद्युत धारा का मान सीधे स्केल पर प्राप्त नहीं कर सकते हैं। इसके दिए गए मान मे थोड़ा सा calculation करने के बाद ही सही मान प्राप्त होता है। इस प्रकार का गैल्वेनोमीटर प्रयोगशालाओं में प्रयोग किया जाता है। इसका व्यवसायिक उपयोग लगभग नगण्य है।

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मूविंग कॉयल टाइप गैल्वेनोमीटर (Moving coil type Galvanometer)

इस प्रकार का गैल्वेनोमीटर (Galvanometer) द्वितीय श्रेणी का गैल्वेनोमीटर कहलाता है। इसमें विद्युत राशि का मान संकेतक (indicator) के द्वारा सीधे दी गई स्केल पर दर्शाता है। इसमें कोई calculation करने की जरूरत नहीं होती है। इसका व्यवसायिक स्तर पर ज्यादा प्रयोग होता है।

गैल्वेनोमीटर की संरचना (structure of Galvanometer in hindi)

इसकी संरचना एक सरल संरचना होती है। इसमें एक परमानेंट मैग्नेट के N तथा S होते हैं जो कह मबकिया क्षेत्र पैदा करते है। Galvanometer का निर्माण एक आयताकार कुंडली को एक स्थिर जगह पर किलित करने से होती है।

Galvanometer in hindi

एल्यूमिनियम बोबिन:-

एल्यूमिनियम के एक बोबीन पर तांबे के एक पतले insulated तार का कॉइल बनाई जाती है तथा यह एक कीलित धूरी (pivoted spindle) पर स्थित होती है। यह moving coil कहलाती है।

एल्यूमिनियम की बॉबिन जिस पर moving coil लपेटी रहती है, यह एल्यूमिनियम बॉबीन चुकी चुंबकीय क्षेत्र में स्थित है। अतः यह इंस्ट्रूमेंट के लिए eddy current damping system का कार्य करती है। यह damping system संकेतक के कम्पन को कम करता है।

कच्चा लोहा (soft iron):-

अब एक कच्चा लोहा (soft iron) का बेलनाकार क्रोड होता है। यह दोनों चुंबकीय ध्रुओं के बीच इस प्रकार से स्थित किया जाता है, ताकि चुंबकीय ध्रुव के बीच के air gap में गति कर सके। इसका काम चुंबकीय reluctance को कम करना तथा कॉइल मे flux linkage को बढ़ाना है। इसके साथ – साथ यह अर्धवृत्तकार के आकार में घूमने से radial flux भी पैदा करता है।

हेयर स्प्रिंग (hair spring)

अब जो किलीत धूरी होती है । उसके ऊपर तथा नीचे दोनों ओर एक हेयर स्प्रिंग लगी होती है, जो इस इंस्ट्रूमेंट मे संकेतक (indicator) के घूमने पर controlling system का कार्य करती है। इसके साथ – साथ यह स्प्रिंग इंस्ट्रूमेंट को विद्युत परिपथ से जोड़ने के लिए कनेक्टिंग वायर का भी काम करती है।

Galvanometer में लगा स्केल मे संकेतक स्केल के बिल्कुल मध्य मे स्थित होता है। स्केल का मध्य भाग ही शून्य की स्थिति को Galvanometer में प्रदर्शित करता है।जबकि अगर आप किसी और इंस्ट्रूमेंट मे देखेंगे तो शून्य की स्थिति किसी एक ओर होती है।

इस Galvanometer में इंडिकेटर को एल्यूमीनियम का बना होता है । इसे एल्यूमिनियम का बनाने से यह लाभ होता है की एल्यूमीनम हल्का होता है अतः इसमें डिफ्लेक्टिंग टॉर्क की काम जरूरत होती है।

गैल्वेनोमीटर कैसे काम करता है (working method of Galvanometer)

जब इंस्ट्रूमेंट को किसी सर्किट से जोड़ा जाता है तथा उस circuit में जब करंट फ्लो करता है, उप यंत्र (instrument) के moving coil में भी करंट फ्लो होता है। अब चुकी यह moving coil, परमानेंट मैग्नेटिक फिल्ड मे स्थित होता है और moving coil में करंट बह रही है, तो चुंबकीय क्षेत्र इस moving coil पर एक deflecting torque लगती है। जिसे हम हिंदी में विक्षेपित बल आघूर्ण कहते हैं। इस विक्षेपित बल आघूर्ण के कारण moving coil विक्षेपित यानि कि घूम जाती है। अब चुकी इस moving coil से संकेतक जुड़ा रहता है पूर्ण ब्रह्म जिससे संकेत भी उसी दिशा में घूमती है। या विक्षेपित होती है।

अब इस moving coil के घूमने से इसमें लगा हेयर स्प्रिंग मे भी घुमाव (twist) आता है। जो moving coil के विपरीत दिशा में तथा बराबर मात्र मे contrilling torque पैदा करती है। और संकेतक (indicator) को एक निश्चित जगह पर रोकती है।

इसमें लगा एल्यूमिनियम बॉबिन चुंबकीय क्षेत्र में होने के कारण eddy current damping system का कार्य करती है। और संकेतक मे होने वाली वाइब्रेशन को समाप्त कर संकेतक को एक निश्चित जगह पर रोक देता है ताकि संकेतक द्वारा प्रदर्शित की गई मान शुद्ध रूप से पढ़ा जा सके।

Chandu

ये इस वेबसाइट के ओनर है जिन्होंने इलेक्ट्रिक ल engineering का कोर्स किया है।

Chandra Mani Vishwakarma
Chandra Mani Vishwakarma

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