Fuse in hindi | फ्यूज क्या है और यह कितने प्रकार के होते है पूरा विवरण

परिचय (Introduction to fuse)

पावर सिस्टम में सप्लाई की निरंतरता को बनाए रखने के लिए सप्लाई सिस्टम को हेल्थी रखना बहुत ही जरूरी होता है। अतः इस संदर्भ में हम सप्लाई सिस्टम में बहुत प्रकार के प्रोटेक्टिव सिस्टम लगाते हैं। ताकि हमारा सप्लाई किसी प्रकार का दोष आने पर सप्लाई सर्किट को बचाया जा सके। फ्यूज इन्ही सभी सुरक्षा उपयंत्रों में से एक है। आज के इस पोस्ट में हम फ्यूज (fuse in Hindi) क्या है इसके बारे में जानेंगे । यह कितनी प्रकार का होता है यह भी बिस्तर से जानेंगे।

फ्यूज क्या है (What is fuse in hindi)

फ्यूज एक प्रोटेक्टिव सिस्टम होता है। जो मुख्य परिपथ में लगाया जाता है। यह मेन सर्किट में सीरीज क्रम में लगाया जाता है। इसमें मुख्य परिपथ के फेस वाले तार में सीरीज में लगाया जाता है।

फ्यूज में एक धातु का छोटा सा तार होता है। जब सर्किट में ओवरलोड की स्थिति आती है तो परिपथ में धारा का मान अत्यधिक बढ़ जाता है और जब यह अत्यधिक धारा एक छोटे से पतले तार से होकर जाती है तो जुल के नियमानुसार (I2Rt) फ्यूज का वायर में गर्मी उत्पन्न होती है। और फ्यूज वायर पिघल जाती है। जिससे परिपथ का लोड से कनेक्शन कट जाता है। इस प्रकार हमारा फाल्ट वाला सेक्शन, हेल्थी सेक्शन से अलग हो जाता है।

फ्यूज का अविष्कार “एडिसन” ने किया था।

फ्यूज के गुण क्या होने चाइए :-

एक फ्यूज का एलिमेंट बनाने के लिए कुछ धातु के निम्न गुणों का होना जरूरी होता है।

  1. फ्यूज तार लो मेल्टिंग प्वाइंट वाला होना चाहिए ताकि फाल्ट आने पर तेजी से मेल्ट होकर सर्किट को ब्रेक करा सकें।
  2. फ्यूज तार लो रेजिस्टविटी और हाई कंडक्टिविटी का होना चाहिए। अतः इसके लिए चांदी सबसे अच्छा धातु होता है लेकिन चांदी धातु बहुत ज्यादा कॉस्टली होता है अतः इसका प्रयोग लगभग ना के बराबर होता है।
  3. 10 एंपियर से कम वाले सर्किट में लेड और टिन के मिश्र धातु से बने फ्यूज का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें 63 % टिन तथा 37% लेड का इस्तेमाल किया जाता है।
  4. फ्यूज, inverse-current characteristics की तरह व्यवहार करता है। इसमें जब फ्यूजिंग करंट का मान बढ़ता है। तथा सर्किट ब्रेक करने की टाइमिंग घट जाती है।
  5. फ्यूज का कॉस्ट कम होने चाइए। जैसे की कॉपर, टिन & लेड फ्यूज।

फ्यूज का प्रीक फार्मूला क्या होता है (Preece formula of fuse):-

यह प्रिक फार्मूला एक राउंड वायर के लिए, फ्यूजिंग करंट (I) तथा उस वायर के डायमीटर (d) के संबंध को बताता है। इस का गणितीय रूप निम्न है।

preece formula

यहां पर K नियतांक (constant) है। इसे फ्यूज नियातंक (fuse constant) कहते है। इसका मान फ्यूज के मेटल पर निर्भर करता है।

फ्यूज से संबंधित कुछ शब्दावली (some important terms related fuse):-

फ्यूजिंग करंट (Fusing current)

सर्किट में करंट की वह मिनिमम मात्रा जिस पर फ्यूज का वायर मेल्ट हो जाता है। फ्यूजिंग करंट कहलाता है। फ्यूजिंग करंट का मान हमेशा नॉर्मल करंट से अधिक होता है।

फ्यूजिंग करंट निम्न बातों पर निर्भर करता है।

  • फ्यूज एलिमेंट में किस प्रकार का मटेरियल इस्तेमाल किया जाता है।
  • फ्यूज एलिमेंट का डायमीटर किया है।
  • फ्यूज एलिमेंट की लंबाई कितना है।
  • टर्मिनल का लोकेशन क्या है। जहां फ्यूज को लगाया गया है।
  • फ्यूज एलिमेंट को प्रोटेक्शन के लिए किस प्रकार का enclosure लगाया गया है।
  • उस परिपथ की जहां पर फ्यूज लगाया गया है। उसकी पहले की इतिहास क्या रहा है। फ्यूजिंग करेंट इस बात पर भी निर्भर करता है।

फ्यूजिंग फैक्टर (Fusing factor)

मिनिमम फ्यूजिंग करंट तथा फ्यूज एलिमेंट के करंट रेटिंग के अनुपात को Fusing factor कहते है। इसका मान हमेशा एक से बड़ा होता है।

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Current rating of fuse element

धारा की वह मात्रा जिसको फ्यूज एलिमेंट बिना किसी over heating तथा मेल्टिंग को सह ले उसे उसे फ्यूज एलिमेंट का करेंट रेटिंग कहते हैं।

फ्यूज एलिमेंट का करेंट रेटिंग फ्यूज होल्डर के दोनो कॉन्टैक्ट के तापमान फ्यूज को मटेरियल तथा जिस वातावरण में फ्यूज रखा है, उस पर निर्भर करता है।

Cut off current :-

फॉल्ट करंट का वह अधिकतम मान जिस पर फ्यूज मेल्ट होने ही वाला होता है। Cut off current कहलाता है। कट ऑफ करेंट निम्न बातों पर निर्भर करता है।

  • फ्यूज के करंट रेटिंग पर
  • पॉर्सपेक्टिव करंट के मान पर
  • Short curcuit current के asymmetric होने पर

Pre – arcing current:-

किसी सर्किट में फॉल्ट आने पर और उस फॉल्ट के आने पर फ्यूज एलिमेंट के मेल्ट होने के बीच का जो समय होता है वह Pre-arcing current कहलाता है। यह समय बहुत ही कम समय होता है।

Arcing time:-

Pre-arcing current के समाप्त होने से लेकर arcing के बुझने तक का जो समय होता है वह arcing time कहलाता है।

Total operating time :-

यह समय Pre-arcing current और arcing time दोनो का जोड़ होता है। मतलब की सर्किट में फॉल्ट आने से लेकर फ्यूज में आर्क के बूझने तक का जो समय होता है। वह total operating time कहलाता है।

Prospective current:-

इस करंट को आपको समझने के लिए एक ग्राफ चित्र पर ध्यान देना होगा जो कि आपको नीचे दिया गया है। मान लीजिए कि यदि फ्यूज की जगह एक नॉर्मल कंडक्टर जोड़ दें जिसका प्रतिरोध लगभग जीरो हो, तो ग्राफ में आपको फॉल्ट करंट का जो बड़ा वाला loop दिख रहा है। जिसे first loop of path कहा गया है। वही prospective current कहलाता है।

Breaking capacity:-

ऐसी कंपोनेंट के मैक्सिमम प्रोस्पेक्टिव करंट का वह आरएमएस मान जिसके साथ एक फ्यूज क्रेडिट सर्विस वोल्टेज पर निपट सकता है यह सह सकता है। ब्रेकिंग कैपेसिटी कहलाती है। इसे एमबीए MVA या KVA में प्रदर्शित करते हैं।

फ्यूज के प्रकार (Types of fuse in hindi):-

Voltage के हिसाब से फ्यूज अलग अलग प्रकार के होते है जो निम्न है।

  • लो वोल्टेज फ्यूज (low voltage fuse)
  • हाई वोल्टेज फ्यूज (high voltage fuse)

लो वोल्टेज फ्यूज (low voltage fuse):-

लो वोल्टेज फ्यूज के अंतर्गत हम निम्न दो फ्यूज के बारे के पढ़ेंगे।

  1. Semi-enclosed rewirable type or kit-kat type fuse
  2. Low voltage HRC fuse

Semi-enclosed rewireable type or kit-kat type fuse:-

इस प्रकार के फ्यूज लगभग हम अभी लोगों ने देखा होगा हम अपने घर के सप्लाई में लगे फ्यूज को देखे ही होंगे। इसी फ्यूज को kit-kat टाइप का फ्यूज कहते है। इस फ्यूज के बेसिकली दो भाग होते है। एक फिक्स भाग होता है जो को बोर्ड में fix कर दिया जाता है। इस वाले भाग में सर्किट के फेस वाले वायर को जोड़ दिया जाता है।

इसका दूसरा भाग फ्यूज एलिमेंट को कैरी करता है। इस वाले भाग को फिक्स वाले भाग में लगाया जाता है। जैसे सर्किट फ्यूज के जरिए जुड़ जाता है। ये दोनो भाग चीनी मिट्टी का बना होता है। जब फ्यूज मेल्ट हो जाता है तो उसके बाद उसमे दूसरा फ्यूज लगा दिया जाता है।

इस प्रकार के फ्यूज का उपयोग 500 एम्पियर के करंट रेटिंग तक किया जाता है। इस प्रकार के फ्यूज की ब्रेकिंग कैपेसिटी 4000 A तक होती है।

Application of kit-kat fuse:-

इस प्रकार के फ्यूज का उपयोग अधिकतर घरेलू वायरिंग में किया जाता है। जहां पर लाइट, फैन का लोड जुड़ा होता है। कभी कभी इस फ्यूज को छोटे छोटे स्तर के उद्योग में किया जाता है।

Low voltage HRC fuse :-

HRC का फुल फॉर्म high rapturing capacity होता है। इस फ्यूज में फ्यूज एलिमेंट को एक enclosure में रखा जाता है। इस enclosure में क्वार्ट्ज का पाउडर या प्लास्टर ऑफ पेरिस भरा जाता है।

लो वोल्टेज HRC FUSE का 440 volt के सिस्टम volt पर ब्रेकिंग कैपेसिटी 16000 A से 30000 A होता है।

Advantages of low voltage HRC Fuse:-

  1. इसमें किसी प्रकार के मेंटेनेंस की जरूरत नहीं पड़ती है।
  2. इसकी ऑपरेशन स्पीड बहुत तेज होती है।
  3. एजिंग इफेक्ट की वजह से इसमें क्षय नही होता है।
  4. इसकी परफॉर्मेस consistently अच्छी होती है।
Chandra Mani Vishwakarma
Chandra Mani Vishwakarma

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