Electrical fault in Hindi | इलेक्ट्रिकल फाल्ट के प्रकारों का वर्णन

परिचय:

अगर हम इलेक्ट्रिक सर्किट की बात करें तो इलेक्ट्रिक सर्किट में हम देखते हैं की बहुत सारे प्रकार के फाल्ट (Electrical fault in Hindi) भी आते हैं तो आज की पोस्ट में हम इलेक्ट्रिकल फॉल्ट के बारे में डिस्कस करेंगे।

वैद्युत शक्ति प्रणाली में विभिन्न प्रका के प्रदोषों की वर्णन (Discussion of different type of faults in electrical power system):

वैद्युत शक्ति प्रणाली में घटित होने वाले प्रदोष, मूल रूप से निम्न दो प्रकार के होते हैं।

  • याँत्रिक प्रदोष (Mechanical fault)
  • वैद्युत प्रदोष (Electrical fault in Hindi)

याँत्रिक प्रदोष से यद्यपि वर्तमान में इलैक्ट्रिक सप्लाइ प्रभावित नहीं होती, परन्तु निकट भविष्य में यही प्रदोष वैद्युत प्रदोष का कारण बनता है, तब प्रदाय की सतता (continuity of supply) समाप्त हो जाती है। अतः वर्तमान का याँत्रिक प्रदोष ही भविष्य में वैद्युत प्रदोष का कारण बनता है। प्रायः प्रणाली के धारा रहित अंगों में होने वाली टूट-फूट, त्रुटि, विकृति, याँत्रिक प्रदोष कहलाती है। इसके अन्तर्गत क्रोस-आर्म का तिरछा होना, सपोर्ट का झुकना, फाउंडेशन का धँसना, आदि दोष आते हैं, जो प्रदाय प्रणाली की वोल्टता तथा धारा को प्रत्यक्ष प्रभावित नहीं करते हैं; जबकि वैद्युत प्रदोष के अन्तर्गत, धारावाही लाइन चालकों का टूटना, परस्पर लिपटना या भू-सम्पर्कित होना आदि दोष आते हैं, जो प्रदाय प्रणाली की वोल्टता तथा धारा को प्रत्यक्ष प्रभावित करते हैं। वैद्युत प्रदोषों को पुनः निम्न दो वर्गों में विभाजित किया जाता है-

Electrical fault in Hindi
  1. स्थायी प्रदोष (Permanent or stable fault)
  2. अस्थायी प्रदोष (Temporary or unstable fault)

वे वैद्युत प्रदोष, जो थोड़ी देर बाद स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं, अस्थायी प्रदोष अथवा क्षणिक प्रदोष (momentary fault) कहलाते हैं। इसके अन्तर्गत, वायु के झोंके से शिरोपरि लाइन चालकों का थोड़े समय के लिये परस्पर सम्पर्कित होना, परिंदा (पक्षी) का दो लाइन चालकों से जुड़ना (bird’s fault) आदि दोष आते हैं; जबकि स्थायी दोष के अन्तर्गत शिरोपरि लाइन चालक का टूट कर पृथ्वी पर गिरना अथवा सपोर्ट से सम्पर्कित होना, धारावाही लाइन चालकों का परस्पर स्थायी रूप से लिपटना आदि दोष आते हैं, जो स्वतः समाप्त अर्थात् साफ (clear) नहीं होते हैं। स्थायी प्रदोष पुनः निम्न दो प्रकार के होते हैं-

  1. सममित प्रदोष (Symmetrical fault)
  2. असममित प्रदोष (Asymmetrical fault)

सममित प्रदोषों के प्ररूप (Type of symmetrical faults)

उदाहरण के लिये उपर्युक्त प्रदोष निम्न प्रकार के सम्भव हैं-

  • त्रिकला खुलापथ प्रदोष (3-phase open circuit faults)
  • त्रिकला लघुपथ प्रदोष (3-phase short circuit faults)
  • त्रिकला भू-क्षरण प्रदोष (3-phase earth leakage faults).
  • त्रिकला कोरोना क्षरण प्रदोष (3-phase corona leakage faults)
  • त्रिकला अति भार प्रदोष (3-phase over load faults)

असममित प्रदोषों के प्ररूप (Type of symmetrical faults):

उदाहरण के लिये उपर्युक्त प्रदोष निम्न प्रकार के सम्भव हैं-

  • एकल कला खुलापथ प्रदोष (Single phase open circuit fault)
  • एकल कला भू-प्रदोष (Single phase earth fault)
  • द्विकला खुलापथ प्रदोष (Two phase open circuit fault)
  • द्विकला भू-प्रदोष (Two phase earth fault)
  • द्विकला लघुपथ प्रदोष (Two phase short circuit fault)
  • द्विकला खुलापथ प्रदोष तथा शेष कला भू-प्रदोष (Two phase open circuit fault and rest phase earth fault)
  • द्विकला भू-प्रदोष तथा शेष कला खुलापथ प्रदोष (Two phase earth fault and rest phase open circuit fault)
  • द्विकला लघुपथ प्रदोष तथा शेष कला खुलापथ प्रदोष(Two phase short circuit fault and rest phase open circuit fault)
  • द्विकला लघुपथ प्रदोष तथा शेष कला भू-प्रदोष (Two phase short circuit fault and rest phase earth fault)
  • एकल कला खुलापथ प्रदोष तथा अन्य एक कला भू-प्रदोष (Single phase open circuit fault and other one phase earth fault)
  • त्रिकला असंतुलित अतिभार प्रदोष (Three phase unbalanced over load fault)

इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम पर विभिन्न प्रकार के फाल्ट से होने वाले प्रभाव (effect of different types of fault in electrical power system):

ओवर करंट फॉल्ट के कारण होने वाले प्रभाव (effect of overcurrent fault):

हम जानते हैं की पावर सिस्टम में स्टेबिलिटी उसे सिस्टम की फॉल्ट करंट के बिलोमा अनुपाती होता है। और सिस्टम की फॉल्ट करंट का मान उस सिस्टम के  इंपेडेंस आफ फॉल्ट shunt के विलोम अनुपाती होता है। यानी कि यदि हम देखे तो फॉल्ट करंट की मात्रा यदि बढ़ता है तो हमारा स्टेबिलिटी यानी कि इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम की स्टेबिलिटी घटती है। इसी प्रकार यदि हम देखें कि फाल्ट करंट की मात्रा कम होती है तो इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम की स्टेबिलिटी बढ़ जाती है।

ओवर लोड फॉल्ट :

इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम के ओवरलोडेड होने से प्रणाली में धारा का मान निर्धारित धारा के मानसिक से अत्यधिक बढ़ जाता है इससे सिस्टम का स्टेबिलिटी आंशिक रूप से प्रभावित होता है।  क्योंकि सिस्टम का स्टेबिलिटी धारा के बढ़ने से घट जाता है जैसा कि हमने पहले वाले हेडिंग में देखा था। इस प्रकार के फाल्ट में ज्यादा लोड होने के कारण करंट का मन बढ़ जाता है जिसे हम फॉल्ट करंट कहते हैं।

लाइन टू ग्राउंड फॉल्ट :

उपर्युक्त फीट की अपेक्षा इस फाल्ट से सिस्टम का स्टेबिलिटी अधिक प्रभावित होता है। क्योंकि इसमें फॉल्ट के कारण शांत की प्रतिबाधा का मान कम होने के कारण फॉल्ट करंट का मन अपेक्षाकृत अधिक होता है। इस फॉल्ट में एक फेस ग्राउंड से या अर्थ से टच में आ जाता है जिससे हम लाइन टू ग्राउंड फाइट करते हैं।

लाइन से लाइन फाल्ट:

उपर्युक्त दो प्रदोषों की अपेक्षा यह फाल्ट के कारण सिस्टम का स्टेबिलिटी अधिक प्रभावित होता है। क्योंकि इसकी फाइट करंट उपयुक्त दोनों प्रकार के फाल्ट के कारण उत्पन्न होने वाले धारा से अधिक होता है। इसमें एक लाइन दूसरे लाइन से डायरेक्टली टच में आ जाती है।  जिससे हम लाइन टू लाइन फाल्ट करते हैं।

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दो लाइनों से ग्राउंड फॉल्ट:

इसमें उपरोक्त तीनों प्रकार के फाल्ट की अपेक्षा इस फाल्ट के कारण सिस्टम का स्टेबिलिटी ज्यादा प्रभावित होता है। क्योंकि इस फीट के कारण फॉल्ट करंट का मन उपरोक्त तीनों फॉल्ट के कारण उत्पन्न होने वाले करंट के मानव से अधिक होता है । इस प्रकार के फाल्ट में दो फेज ग्राउंड से कनेक्ट हो जाते हैं। जिससे फॉल्ट करंट का मन अधिक बढ़ता है।

तीनों लाइन से ग्राउंड फॉल्ट:

उपरोक्त चारों प्रकार के प्रदोषों (Electrical fault in Hindi )की अपेक्षा इस प्रदोष से सिस्टम का स्टेबिलिटी अधिक प्रभावित होता है। क्योंकि इस प्रदोष की स्थिति में फॉल्ट करंट अपेक्षाकृत अधिक होता है। इस फॉल्ट में लाइन के तीनों फेस ग्राउंड से टच हो जाते हैं।

थ्री लाइन शार्ट सर्किट फॉल्ट:

उपर्युक्त सभी प्रकार के फाल्ट की अपेक्षा यह फाल्ट के कारण सिस्टम का स्टेबिलिटी सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। क्योंकि इस प्रकार की फॉल्ट में उपयुक्त सभी प्रकार के फाल्ट की अपेक्षा सबसे ज्यादा फाल्ट करंट का मान होता है। इस प्रकार के फाल्ट में लाइन के तीनों फेस एक दूसरे से टच में आ जाते हैं। जिसे हम लघु परिपथ या शार्ट सर्किट फॉल्ट करते हैं।

इलेक्ट्रिकल फॉल्ट से संबंधित कुछ शब्दावली:

Electrical fault:

जब किसी इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में एक या एक से अधिक फेस तार टूट कर पृथक हो जाए या अर्थ से कनेक्ट हो जाए अर्थात पृथ्वी से संपर्किट हो जाए अथवा दो या दो से अधिक फेस तार परस्पर जुड़कर शॉर्ट सर्किट हो जाए और सिस्टम एब्नार्मल की कंडीशन में आ जाए तो उसे स्थिति को हम इलेक्ट्रिकल फॉल्ट कहते हैं। इस प्रकार के इलेक्ट्रिकल फॉल्ट मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं।

  1. इंटरनल इलेक्ट्रिकल फॉल्ट
  2. External electrical fault

इलेक्ट्रिकल फॉल्ट कंडीशन:

जब किसी इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में इलेक्ट्रिकल फॉल्ट उत्पन्न होता है तो उसकी चार राशियां जैसे वोल्टेज, करंट, पावर के मान में तथा दिशा में और सामान्य परिवर्तन हो जाता है। जो इलेक्ट्रिकल फील्ड की स्थिति का द्योतक है। यदि इस प्रदोष को जल्दी ही ठीक नहीं किया गया तो सिस्टम में लगे बहुत सारे उपकरण खराब या जलकर नष्ट हो सकते हैं।

Permanent electrical fault in Hindi:

वह इलेक्ट्रिकल फॉल्ट जो इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में अधिक समय तक कायम रहता है। और यह इलेक्ट्रिकल फॉल्ट (अगर हम इलेक्ट्रिक सर्किट की बात करें तो इलेक्ट्रिक सर्किट में हम देखते हैं की बहुत सारे प्रकार के फाल्ट (Electrical fault in Hindi) भी आते हैं तो आज की पोस्ट में हम इलेक्ट्रिकल फॉल्ट के बारे में डिस्कस करेंगे।) जब तक ठीक नहीं होता जब तक कि हम उसे अपने हाथों से ठीक ना करें। इस प्रकार के इलेक्ट्रिकल फॉल्ट को हम स्टेबल फॉल्ट या ड्यूरेबल फॉल्ट कहते हैं। उदाहरण के लिए विद्युत शक्ति प्रणाली के किसी धारावाही चालक का टूट जाना या टूटकर पृथ्वी से संपर्क हो जाना। या किसी निकटवर्ती धारावाही चालक से टूटकर संपर्क हो जाना।

टेंपरेरी इलेक्ट्रिकल फॉल्स (temporary Electrical fault in Hindi):

वह इलेक्ट्रिकल फॉल्ट जो इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में थोड़े समय के लिए रहता है और स्वत ही दूर हो जाता है। इसे हम अनस्टेबल फॉल्ट करते हैं। इसे क्षणिक फॉल्ट भी कहते हैं। उदाहरण के लिए आंधी तूफान के समय वायु के झोंकों से इलेक्ट्रिकल ट्रांसमिशन सिस्टम के धारावाहिक चालक का एक दूसरे से टकरा जाना और कुछ देर बाद अपनी पोजीशन पर आ जाना इस स्थिति में उत्पन्न हुआ फाल्ट क्षणिक फीट होता है।

सिमिट्रिकल इलेक्ट्रिकल फॉल्ट (Symmetrical Electrical fault in Hindi):

वह इलेक्ट्रिकल फॉल्ट जिनकी उपस्थिति में इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम के सभी फेस तारों में धारा का मान समान रहता है। उसे हम सिमिट्रिकल फॉल्ट कहते हैं। जैसे की थ्री फेस ओपन सर्किट फॉल्ट, 3 फेस शॉर्ट सर्किट फॉल्ट, 3 फेस भुयोजन फॉल्ट।

Asymmetrical electrical fault:

इसे हम और समामित विद्युत प्रदोष भी कहते हैं। वह इलेक्ट्रिकल फॉल्ट जिनकी उपस्थिति में इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम के सभी फेस तारों में धारा का मान समान नहीं रहता है। इसे हम असमित फॉल्ट या एसिमिट्रिकल फॉल्ट कहते हैं। उदाहरण के लिए सिंगल फेस या डबल फेस ओपन सर्किट फॉल्ट।

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