Electric circuit in Hindi | इलेक्ट्रिक सर्किट कितने प्रकार के होते है?

परिचय

इलेक्ट्रिकल के क्षेत्र में एक सबसे महत्वपूर्ण चीज होती है। वह है इलेक्ट्रिक सर्किट। हम अगर इलेक्ट्रिक पावर को उसे कर पा रहे हैं। तो इसके पीछे का मुख्य कारण इलेक्ट्रिक सर्किट है। इसके बिना हम इलेक्ट्रिक पावर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक नही ले जा सकते है। अतः आज के इस पोस्ट में हम इलेक्ट्रिक सर्किट या हिंदी में विद्युत परिपथ (electric circuit in Hindi) के बारे में विस्तार से समझेंगे। ये कितने प्रकार के होते है। इसके अलग अलग उपयोग और साथ में नुकसान के बारे में भी डिस्कस करेंगे।

इलेक्ट्रिक सर्किट/ विद्युत परिपथ क्या है? (Electric circuit in Hindi)

जब भी हमे किसी लोड को चलाना रहता है तो हम इसके लिए एक प्रॉपर एक इलेक्ट्रिक वायर या कहे तो चालक तार के जरिए एक सर्किट बनाते हैं। जिसके जरिए ही हमारा इलेक्ट्रिक पावर करेंट के रूप में फ्लो करते हैं। और लोड तक पहुंच कर लोड को ऑपरेट कराते है। तो इलेक्ट्रिक तार के जरिए जो हम एक सिस्टम बनाते हैं जिससे कि लोड आसानी से चल सके उसी सिस्टम को हम इलेक्ट्रिक सर्किट या विद्युत परिपथ (electric circuit in Hindi) कहते हैं।

इलेक्ट्रिक सर्किट या विद्युत परिपथ के प्रकार (types of electric in Hindi)

अब सवाल यह आता है की इलेक्ट्रिक सर्किट के कितने प्रकार होते हैं। या हम इलेक्ट्रिक सर्किट को कितने भागो में बांट सकते हैं। अतः हम हम इलेक्ट्रिक सर्किट को मुख्यतः तीन भागों में बांट सकते हैं।

  1. क्लोज सर्किट
  2. ओपन सर्किट
  3. शॉर्ट सर्किट

क्लोज सर्किट (what is close circuit)

क्लोज सर्किट को हम हिंदी में पूर्ण परिपथ भी कह सकते हैं या एक बंद परिपथ या इसे हम कह सकते हैं कि यह एक प्रकार का क्लोज लूप है।  जिसके अंतर्गत हमारा करंट फ्लो करता है। किसी भी सर्किट में जब हम लोड को कनेक्ट करते हैं तभी हमारा पूरा सर्किट क्लोज सर्किट का निर्माण करता है। और इसी क्लोज सर्किट से होते हुए लोड में करंट फ्लो करता है। यानी कि हम कह सकते हैं कि जब हम सप्लाई में लोड को कनेक्ट करते हैं तभी हमारा करंट फ्लो करता है। यानी की जब सर्किट कंप्लीट होता है तभी करेंट फ्लो करता है।

एक क्लोज सर्किट बनाने के लिए हम मान लीजिए कि सप्लाई का दो टर्मिनल पॉजिटिव एंड नेगेटिव है। इसके थ्रू ही हम एक लोड को कनेक्ट करते हैं तो हमारा करंट पॉजिटिव से निकलकर लोड से होते हुए नेगेटिव पॉइंट तक जाता है।  इस पूरी प्रक्रिया में हमारा एक क्लोज लूप बनता है। इसे ही हम कहते हैं क्लोज सर्किट कहते हैं।  जब उस लोड  से होते हुए करंट फ्लो करता है तो उस करंट के कारण हमारा लोड ऑपरेट करता है।

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circuit in Hindi

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इस पूरे क्लोज सर्किट में आप देखेंगे तो इसमें कुछ एसेसरीज को काम में लाया जाता है जैसे की सप्लाई सोर्स, लोड और स्विच बटन।

सप्लाई सोर्स

सप्लाई सोर्स वह सोचता है जिसके द्वारा हम इलेक्ट्रिकल सप्लाई पूरे सर्किट को देते हैं जैसे के उदाहरण के तौर पर अल्टरनेटर, जनरेटर, बैट्री, सोलर पैनल इत्यादि।

सप्लाई लोड

लोड वह यंत्र होता है जो हम इलेक्ट्रिकल सप्लाई के द्वारा चलाते हैं जैसे कि बल्ब, मोटर, वाटर हीटर, वाशिंग मशीन, लैपटॉप और भी बहुत सारे इलेक्ट्रिकल यंत्र जो इलेक्ट्रिकल सप्लाई से ऑपरेट करते हैं। यह सब यंत्र लोड के रूप में सप्लाई सर्किट से कनेक्ट होते हैं। इसे हम एक प्रकार से रेजिस्टेंस भी कह सकते हैं।

जब क्लोज सर्किट होता है तो क्या होता है?

जब हम किसी भी सप्लाई से एक सर्किट के द्वारा लोड को कनेक्ट करते हैं तो हम उसे क्लोज सर्किट कहते हैं और इस क्लोज सर्किट में हमें परिणाम स्वरूप निम्न प्रकार की परिवर्तन देखने को मिलता है।

  1. यदि हम लोड के रूप में एक प्रकाश देने वाले बल्ब को कनेक्ट किए हैं तो सर्किट क्लोज होने पर यह बल प्रकाश देना शुरू कर देता है।
  2. यदि हम लोड के रूप में किसी मोटर को सर्किट में जोड़े हैं तो सर्किट के क्लोज होने पर मोटर चलना शुरू कर देता है।
  3. यदि हम लोड के रूप में इलेक्ट्रिक हीटर का इस्तेमाल कर रहे हैं तो सर्किट जब क्लोज होगा तो इलेक्ट्रिक हीटर ऊष्मा का उत्सर्जन करना शुरू कर देगा ।
  4. इसी प्रकार से कोई भी यदि लोड सर्किट में जुड़ा है और उस को स्विच ऑन कर के सर्किट को क्लोज करते हैं तो उस समय वह लोड अपना काम करना शुरू कर देता है जो उस लोड की प्रवृत्ति होती है।

क्लोज सर्किट के प्रकार (types of close circuit in Hindi)

अब इस क्लोज सर्किट के भी कुछ प्रकार होते हैं जो कि नीचे दिखाया गया है। ब्लू सर्किट को हम मुख्यतः तीन भागों में बांट सकते हैं।

  1. सीरीज सर्किट
  2. पैरेलल सर्किट
  3. कंपाउंड सर्किट

अब हम इन तीनों सर्किट को बारी-बारी से समझ लेते हैं।

सीरीज सर्किट ( series Circuit in Hindi)

सीरीज सर्किट में हम बहुत सारे लोड को सीरीज में जोड़ते हैं। जैसे कि आपको चित्र में दिख रहा होगा इसमें कई सारे लोड को सीरीज में जोड़ा गया है इसमें एक चेन की भांति लोड को जोड़ा जाता है। इसमें, एक लोड के पहले टर्मिनल को सप्लाई से तथा दूसरे टर्मिनल को दूसरे लोड के पहले टर्मिनल से और दूसरे लोड के दूसरे टर्मिनल को तीसरे लोड के पहले टर्मिनल से और लास्ट में अंत वाले लोड के दूसरे टर्मिनल को सप्लाई के दूसरे टर्मिनल से यानी की निगेटिव या न्यूट्रल टर्मिनल से जोड़ दिया जाता है जैसा कि चित्र में दिखाया गया है।

circuit in Hindi

सीरीज सर्किट की विशेषताएं क्या होती है?

सीरीज सर्किट के कुछ विशेषताएं होती हैं। जो कि निम्न प्रकार है।

  1. सीरीज सर्किट में करंट फ्लो होने का सिर्फ एक ही मार्ग होता है क्योंकि सभी लोग सीरीज में जुड़े होते हैं अतः करंट सभी लोड में एक समान रूप से बहता है। अतः इसमें करंट का मान सम्मान होता है सभी लोड में। जैसे I = I1 =I2 = I3
  2. इसमें लोड को सीरीज में जोड़ने के कारण सभी लोड में वोल्टेज का मान अलग अलग होता है।  क्योंकि सभी लोड में अलग-अलग प्रकार का वोल्टेज ड्रॉप होता है।  जैसे V = V1 + V2 + V3
  3. हर एक लोड में वोल्टेज ड्रॉप ओम के नियम के अनुसार करंट और उस लोड के रेजिस्टेंस के गुणनफल के बराबर होता है।
  4. सीरीज में लोड के जुड़े होने के कारण लोड में जो रेजिस्टेंस होता है वह भी सीरीज में जुड़ा होता है। और सीरीज में जुड़ा रेजिस्टेंस टोटल जुड़े लोड के रजिस्टेंस के बराबर होता है। जैसे R = r1 + r2+ r3
  5. यदि सीरीज सर्किट में कोई भी लोड किसी प्रकार से उस लोड में फाल्ट आ जाए तो पूरा हमारा सीरीज सर्किट बंद हो जाता है क्योंकि हमारे सर्किट का क्लोज लूप टूट जाता है जिससे कि किसी भी लोड में सप्लाई नहीं जा पाती है।
  6. सीरीज सर्किट में यदि हम समान पावर रेटिंग के क्षमता वाले लोड को जोड़ दे तो लोड में पावर सप्लाई समान रूप से बात जायेगी। लेकिन वही अगर हम अलग अलग रेटिंग के लोड को जोड़ेंगे सप्लाई भिन्न भिन्न प्रकार के पावर सप्लाई में बटेगी।
  7. अगर एक समान watt के दो लोड सीरीज में जोड़ दिए जाए तो सर्किट की कूल पावर आधी हो जायेगी।

सीरीज सर्किट का उपयोग कहा किया जाता है?

दोस्तों सीरीज सर्किट का उपयोग हम विभिन्न प्रकार से करते हैं।

  1. चुकी सीरीज सर्किट में वोल्टेज प्रत्येक लोड के लिए अलग-अलग हो जाता है या बट जाता है अतः हम किसी भी कम वोल्टेज पर ऑपरेट करने वाले बहुत सारे लोड को एक साथ जोड़ सीरीज में जोड़कर चलाया जा सकता है।
  2. सजावट के लिए मिनिएचर लैंप को सीरीज में जोड़ने के लिए।
  3. फ्यूज को जोड़ने के लिए
  4. ओवर लोड coil जोड़ने के लिए हम सीरीज सर्किट का इस्तेमाल करते हैं।
  5. वोल्टरमीटर में मल्टीप्लायर को अगर जोड़ना है तो हम सीरीज परिपथ का इस्तेमाल करते हैं।
  6. अगर कही हमे बैटरी को या सेल के द्वारा ज्यादा वोल्टेज बढ़ने के लिए हम एक से अधिक बैटरी को सीरीज में जोड़ देते हैं।
  7. अमीर को धारा मापने के लिए हम सर्किट में series में ही कनेक्ट करते है।

पेरलेल सर्किट (parallel circuit in Hindi)

इसमें सभी लोड जो सप्लाई से जुड़ते है वह सारे के सारे लोड के दोनो टर्मिनल सप्लाई के दोनो टर्मियंल से डायरेक्टली जुड़े रहते हैं। जैसे की चित्र में दिख रहा होगा।

circuit in Hindi

अतः इस सर्किट में लगाने वाले प्रत्येक  लोड में धारा का मान अलग अलग होता है। जबकि सप्लाई वोल्टेज रेटिंग समान होती है। यदि इस में हम अलग अलग रेटिंग के लोड लगाएंगे, तो इस प्रत्येक लोड में धारा का मान अलग अलग रहेगा। लेकिन प्रत्येक लोड में वोल्टेज का मान समान रहेगा।

पैरेलल सर्किट की विशेषताएं क्या है?

  1. parallel सर्किट में सभी लोड जो कि उस सर्किट में जुड़े हैं उनको एक स्वतंत्र रूप से voltage सप्लाई एक समान रूप से मिलता है।
  2. इसमें प्रत्येक लोड पर एक समान वोल्टेज मिलता है जो की सप्लाई वोल्टेज का मान होता है। जैसे कि यदि सप्लाई वोल्टेज 250 बोल्ट है तो समांतर में जुड़े सभी लोड पर सप्लाई वोल्टेज 250 वोल्ट ही जाएगा। जैसे: V= V1 = V2 = V3
  3. लेकिन पैरेलल सर्किट में प्रत्येक लोड पर करंट का मान अलग-अलग होगा। क्योंकि यदि प्रत्येक लोड का रेटिंग अलग-अलग है तो करंट का मान भी अलग अलग होगा। और यदि लोड एक समान है मतलब की एक समान रेटिंग का है तो कुल करंट जितना सप्लाई से सारे लोड ले रहे हैं उस कुल करंट को जितने लोड लगे हैं उससे डिवाइड हो जाएगा अतः सब में समान समान रूप से करंट फ्लो करेगा। मतलब की I = i1 + i2 + i3
  4. Parallel  सर्किट में जितने भी लोड जुड़े हैं उन लोड में उपस्थित रजिस्टेंस की कुल मान सर्किट में जुड़े कुल कंडक्टेंस के मान के विपरीत होता है या व्युत्क्रमानुपाती होता है।
  5. पैरेलल सर्किट में जितने भी रेजिस्टेंस जोड़ते हैं वैसे वैसे कुल रजिस्टेंस का मान कम होता जाता है।
  6. पैरेलल सर्किट में जुड़े सभी रजिस्टेंस का कुलमान उन रजिस्टेंस में सबसे कम मान जिस रेजिस्टेंस का होता है। कूल मान उससे भी कम होता है।
  7. पैरेलल सर्किट में यदि कोई लोड किसी कारणवश फाल्ट हो जाए तो इसके फाल्ट होने से उस सर्किट में जुड़े अन्य लोड पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ता है। अन्य लोग पहले की बात बिना किसी इंटरप्शन के चलते रहता है। क्योंकि यह सभी लोग स्वतंत्र रूप से सप्लाई से जुड़े रहते हैं एक दूसरे पर निर्भर नहीं रहते हैं।

पैरेलल सर्किट का उपयोग (uses of parallel circuit in Hindi)

अगर हम देखे तो पैरेलल सर्किट का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है। जैसे कि –

  1. पैरेलल सर्किट का उपयोग हम बहुत से प्रकार के वायरिंग जैसे हाउस वायरिंग, पैनल वायरिंग, फैक्ट्रियों में जो विभिन्न प्रकार की मोटर लगी होती हैं उन सब का वायरिंग पैरेलल शाम में ही किया जाता है।
  2. यदि हम एक साधारण लैंप को जोड़ रहे हैं तो उसे भी हम पैरेलल फॉर्म में ही जोड़ते हैं।
  3. यदि हम किसी बोल्ट मीटर को सप्लाई की वोल्टेज मापने के लिए सप्लाई से जोड़ते हैं तो इसको पैरेलल रूप में ही जोड़ते हैं।
  4. किसी अमीटर shunt में जोड़ना है तो हमें पैरेलल रूप में ही जोड़ना होता है।
  5. यदि हम छोटे-छोटे सेल को जोड़कर अधिक करंट कैपेसिटी वाला एक बैटरी बनाना चाहते हैं तो हमें उन छोटे छोटे सेल को पैरेलल रूप में ही जोड़ना होता है जिससे कि करंट कैपेसिटी बढ़ जाती है। जबकि यदि हम उसे सीरीज में जोड़ेंगे तो हमारा वोल्टेज कैप सिटी बढ़ेगी। करंट समान रहेगा।

कंपाउंड सर्किट

कंपाउंड सर्किट की अगर हम बात करें तो सामान्य हाउस वायरिंग या किसी भी एसी सर्किट में आप कंपाउंड सर्किट को बहुत कम मात्रा में देखेंगे। लेकिन यदि हम इसे इलेक्ट्रॉनिक के क्षेत्र में देखें तो कंपाउंड सर्किट हमें देखने को मिलता है जिसमें सीरीज ओर पैरेलल दोनों प्रकार के सर्किट मौजूद रहते हैं। सीरीज सर्किट और पैरेलल सर्किट यदि जहां मौजूद है उसे ही हम कंपाउंड या मिश्रित सर्किट या परिपथ कहते हैं।

ओपन सर्किट (open circuit in Hindi):

ओपन सर्किट का मतलब यह होता है कि यदि हम हमारे सप्लाई से लोड जुड़ा है लेकिन हम उस सर्किट में जो स्विच है जिससे हम ऑन ऑफ करते हैं उसे ऑफ की स्थिति में रखे हैं तो हमारा जो पूरा सर्किट है एक ओपन सर्किट होगा क्योंकि इस स्विच के ऑफ की स्थिति में हमारा जो करंट है वह पॉजिटिव से निकलकर नेगेटिव तक नहीं पहुंच पाता है। जिससे कि हमारा पूरा सर्किट एक ओपन सर्किट की तरह बिहेव करता है। इस ओपन सर्किट की तरह बिहेव करने की वजह से हमारा जो सप्लाई में लोड जुड़ा है वह ऑपरेट नहीं करता है।

OPEN circuit in Hindi

ओपन सर्किट किस किस स्थिति में होता है

पूरी सर्किट में यदि ओपन सर्किट हो रहा है तो निम्न प्रकार की सिचुएशन उपस्थित होती हैं तब हमारा ओपन सर्किट की स्थिति आती है।

  • यदि किसी लोड से जुड़ा स्विच ऑफ हो तो ओपन सर्किट होगा।
  • यदि सप्लाई से जुड़ा फ्यूज जल जाए।
  • यदि किसी कारणवश हमारा लोड में फाल्ट आ जाए।
  • क्लोज सर्किट को पूरा करने के लिए जो हम वायर लगाए हैं उसमें किसी प्रकार का फाल्ट आ जाए और वह तार टूट जाए तब इस स्थिति में भी open-circuit की स्थिति आती है।

शॉर्ट सर्किट (short circuit in Hindi)

शॉर्ट सर्किट की स्थिति तब आती है जब हमारा सर्किट प्रॉपर रूप से एक क्लोज सर्किट की तरह बिहेव कर रहा है और लोड सही तरीके से ऑपरेट कर रहा है। लेकिन किसी कारणवश जब सप्लाई का दोनों टर्मिनल एक दूसरे से सेट हो जाए तो इस स्थिति में हमारा जो स्थिति उत्पन्न होती है उसे ही हम शॉर्ट सर्किट की स्थिति कहते है।

SHORT circuit in Hindi

शॉर्ट सर्किट की कंडीशन में हमारा करंट लोड से ना होकर डायरेक्टली पॉजिटिव से नेगेटिव तक पहुंच जाता है इस कंडीशन में हम शॉर्ट सर्किट मानते हैं।

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