contactor in Hindi | कॉन्टैक्टर में NO, NC क्या होता है?

परिचय:

दोस्तों अगर आप कोई पैनल देखे होंगे तो आपको उस पैनल में बहुत सारे प्रकार के contactor लगे हुए जरूर देखे होते हैं। जैसे को अगर आप कोई मोटर का स्टार्टर देखेंगे तो उसमे ये contactor जरूर लगा होता है। तो आज को इस पोस्ट के जरिए आपको कॉन्टैक्टर (contactor in Hindi) के बारे में विस्तार से समझेंगे।

कॉन्टैक्टर क्या है (contactor in Hindi):

कॉन्टैक्टर एक ऑटोमैटिक स्विचिंग डिवाइस है। जिसके द्वारा हम इस पैनल से चलने वाले लोड को ऑटोमैटिक बनाते हैं। मतलब की पूरे सिस्टम को ऑटोमैटिक बनाने में contactor का अहम रोल रहता है।

कॉन्टैक्टर को बनाने वाली बहुत सारी कंपनिया है जिसमे से मुख्य Schneider, Havells, L&T आदि है।

कॉन्टैक्टर का उपयोग (application of contactor in Hindi):

कांट्रेक्टर का उपयोग हम मुख्यतः 3 प्रकार से कर सकते हैं।

1. मोटर को ऑपरेट करने के लिए
2. और कंट्रोलिंग के लिए
3. इंटरलॉकिंग के लिए

मोटर को ऑपरेट करने के लिए:

मोटर को ऑपरेट करने के लिए हम सप्लाई से आने वाली टर्मिनल को पहले हम कॉन्टैक्टर के L1, L2, तथा L3 पर जोड़ते हैं। तथा कॉन्टैक्टर के आउटपुट टर्मिनल T1, T2 तथा T3 से मोटर को जोड़ते हैं। इस प्रकार हम मोटर का कनेक्शन कर देते है।

कंट्रोलिंग के लिए:

कॉन्टैक्टर का सबसे ज्यादा मात्रा में उपयोग कंट्रोलिंग के लिए भी किया जाता है। जिसके लिए हम इस contactor के ऊपर कुछ और भी कंट्रोलिंग के लिए टर्मिनल ब्लॉक जोड़ देते है। जिसे हम ad on block कहते हैं। इस ad on block का पुश बटन contactor में लगे पुश बटन के साथ ही दबता है और खुलता है। और ad on block पर NO तथा NC terminal होते हैं। जिससे हम कंट्रोल सर्किट को कनेक्ट करते हैं।

इंटरलॉकिंग के लिए:

Contactor का हम सप्लाई को इंटरलॉक करने के लिए भी करते है। जैसे की अगर हमारा दो लोड है जिसको ऐसे चलना है कि यदि पहला लोड ऑन है तो अगर उस ऑन की स्थिति में दूसरा लोड ऑन करेंगे। तो वह दूसरा लोड ऑन नही होगा। अतः इसके लिए हम contactor के द्वारा इंटरलॉक करते हैं। इसका कनेक्शन समझने के लिए नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

इंटरलॉकिंग क्या है? contactor में इंटरलॉकिंग कैसे करते है

कॉन्टैक्टर पर टर्मिनल और बटन की जानकारी:

इसमें यदि आप इसे देखेंगे। तो इसके ऊपर एक बटन होगा। जो दबाने पर contactor ऑन होता है। लेकिन अगर आप उसे मैनुअली दबाएंगे तो दबेगा लेकिन अगर आप छोड़ेंगे तो फिर वह अपनी जगह पर चला आएगा। अतः फिर contactor ऑफ हो जाएगा। मतलब की जब contactor का बटन दबेगा तो इसके टर्मिनल जैसे  L1, L2 तथा L3, T1 T2 तथा T3 से जुड़ जायेगा। इससे मोटर ऑन हो जायेगा। लेकिन जब वहा बटन नही दबेगा तो ये टर्मिनल एक दूसरे से अलग रहेंगे। जिससे मोटर ऑफ रहेगा। अतः हम ऐसे तो नही है की उसे दबा कर ही रखेंगे। अतः कॉन्टैक्टर (contactor in Hindi) के उस पुश बटन को दबा कर रखने के लिए contactor को एक अलग से सप्लाई दी जाती है। जिससे contactor उस पुश बटन को दबा कर रखता है। और यही स्थिति contactor ऑन की स्थिति होती है।

contactor in Hindi

Contactor को कैसे ऑन  करते हैं?:

अब हम जान चुके है की contactor को ऑन करना पड़ता है। और उसके लिए एक अलग से सप्लाई की जरूरत होती है। अतः contactor को ऑन करने के लिए जो सप्लाई दी जाती है। वह contactor में लगे टर्मिनल (A1, तथा A2) को दिया जाता है। इसमें मान लीजिए यदि contactor पर contactor को ऑन करने के लिए सप्लाई वोल्टेज 220 वोल्ट AC और frquency 50 hz दिया है। तो हम उसी रेटिंग के हिसाब से सप्लाई जोड़ेंगे। जिसमे A2 पर न्यूट्रल को कनेक्ट करेंगे और A1 पर फेज को कनेक्ट करेंगे। कॉन्टैक्टर पर हमेशा ऑन करने वाली सप्लाई A1 और A2 टर्मिनल पर जोड़ा जाता है।

Ad on blocks:

दोस्तों contactor में कंट्रोल सर्किट का कनेक्शन करने के लिए हम एक अलग से कुछ टर्मिनल वाले ब्लॉक्स आते है। जिसको हम मेन contactor पर लगाते है। जिसे हम ad on block कहते हैं।  इस ad on block par NO तथा NC का टर्मिनल होता है। जिस पर ही हम कंट्रोल सर्किट का टर्मिनल जोड़ते है। यह ad on blocks की करेंट रेटिंग मेन contactor के रेटिंग से कम होती है। क्योंकि इसमें हम कंट्रोल सर्किट को ही कनेक्ट करते है। यह ad on blocks ज्यादातर मेन contactor के टॉप पर लगता है। कभी कभी यह ad on blocks मेन contactor के बगल में लगता है। Ad on blocks को जब लगाते है तो ad on block का पुश बटन और contactor का पुश बटन दोनो एक दूसरे से मैकेनिकल जुड़ जाता है। जिससे की जब contactor का पुश बटन दबता है तो साथ ही में ad on block का पुश बटन भी दबता है।

कॉन्टैक्टर में NO और NC क्या होता है?

दोस्तों, contactor में NO और NC terminal भी होता है। जैसे को पिछले हेडिंग में बताया भी है कि यह टर्मिनल कंट्रोल सर्किट के लिए होता हैं अतः इसमें NO का फुल फॉर्म Normally open होता है। और NC का फुल फॉर्म Normally close होता है। इसके नॉर्मली ओपन और नॉर्मली क्लोज का मतलब यह होता है को जब contactor off की स्थिति में होता हैं तो जो दो टर्मिनल NO है तो वह ओपन रहेगा। मतलब की उससे सप्लाई पास नही करेगी। और जो टर्मिनल NC है वह contactor के ऑफ की स्थिति में ये दोनो NC टर्मिनल एक दूसरे से शॉर्ट रहेंगे। जिससे इससे सप्लाई पास कर जायेगी।

NO, NC की कार्यविधि:

जब contactor ऑफ है:

अब चलिए NO तथा NC की कार्यविधि को समझते हैं। आपको एक चित्र दिख रहा होगा । जिसमे दो टर्मिनल दिख रहे होंगे। एक NO और दूसरा NC। अब यह चित्र contactor के अंदर की बनावट को दर्शाता है। इसमें आप देख सकते है कि contactor के ऑफ के स्थिति में NO टर्मिनल खुला हुआ है। क्योंकि NO के दोनो टर्मिनल को शॉर्ट करने वाला वायर टर्मिनलों से दूर है। लेकिन वही अगर NC terminal के पास देखे तो ये वायर NC के टर्मिनलों से टच हुआ है। जिससे यह एक क्लोज सर्किट का निर्माण करता है।

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जब contactor ऑन है:

अब जब हम contactor के A1 और A2 terminal को सप्लाई देंगे। तो उस समय कॉन्टैक्टर (contactor in Hindi) का पुश बटन ऑटोमैटिक दब जाता है। पुश बटन के दबने से NO तथा NC की स्थिति इस नीचे दिखाए गए चित्र की भांति होती है। इस जब contactor का पुश बटन ऑन होता है। पुश बटन दबने से NO टर्मिनल एक दूसरे से शॉर्ट हो जाते है। जबकि वही NC terminal ओपन हो जाता है। मतलब की ऑफ वाले स्थिति के बिलकुल उलट हो जाता है।

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