पवन चक्कियों का वर्गीकरण | Classification of wind mill

पवन चक्क्कियों का वर्गीकरण (Classification of wind mill) : –

जैसा कि हम जानते हैं कि अलग-अलग क्षेत्रों के वायु के प्रवाह की गति अलग-अलग प्रकार की होती है। इसके साथ साथ भी ध्यान दिया जाता है कि हम जिस क्षेत्र में या पवनचक्की लगा रहे हैं, वहां का जलवायु कैसा है। किस प्रकार की जलवायु परिवर्तन की क्रियाविधि है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए हम पवन चक्कियों का वर्गीकरण करते हैं, जो कि निम्न है।

पवन चक्कियों का वर्गीकरण
Sky Wind Turbine Wind Farm Moon Windmill Turbine

पवन चक्की यों को मुख्यता दो भागों में विभाजित किया गया है

1. क्षैतिज अक्ष मशीन (Horizontal axis machine)

2. ऊर्ध्व अक्ष मशीन (Vertical axis Machine)

लेकिन हम इन पवन चक्कीयों को इनके विद्युत पावर आउटपुट के आधार पर वर्गीकृत करें तो यह निम्न प्रकार के पवन चक्की होंगी।

1. छोटे स्तर के पवन चक्की (2KW तक)

2. मध्यम स्तर के पवन चक्की (2KW से 100 KW तक)

3. बड़े स्तर के पवन चक्की (100KW से ऊपर)

आउटपुट के पावर के प्रकृति के आधार पर भी इन पवन चक्कियों को वर्गीकृत किया जा सकता है जो कि निम्न है।

1. DC Output

2. AC Output

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DC output के अंतर्गत दो प्रकार के यंत्र आते हैं।

• डीसी जनित्र

• अल्टरनेटर रेक्टिफायर

एसी आउटपुट के अंतर्गत दो प्रकार के सिस्टम के द्वारा विद्युत प्राप्त किया जाता है।

• वेरिएबल फ्रीक्वेंसी और नियत वोल्टेज एसी सिस्टम

• नियत आवृति और वेरिएवल या स्थिर वोल्टेज सिस्टम

Air generator के घुमाओ गति के आधार पर इन्हें निम्न वर्ग में बांटा गया है।

1. स्थिर गति (constant speed)

2. लगभग नियत गति (nearly constant speed)

3. वेरिएबल गति (variable speed)

पवन चक्कियों का वर्गीकरण उसमे प्रयुक्त air generator के द्वारा प्राप्त आउटपुट को उपयोग करने की विधि के आधार पर किया जाता सकता है। जो निम्न है।

1. Battery storage

2. Direct connection to an electromagnetic energy converter

3. Other form of storage (thermal, potential etc.)

4. Inter connection with conventional electric utility grid

जैसा की हमने ऊपर पढ़ा है कि मुख्यतः पवन चक्की दो प्रकार (Horizontal तथा vertical) की होती है। अतः अब हम इन दोनो को विस्तार से समझेंगे।

क्षैतिज अक्ष मशीन (Horizontal axis machine):-

अगर हम सामान्य तौर पर देखें तो क्षैतिज मशीन में छोटे आकार पवन टरबाइन बनावट में सरल होती है। तथा बड़े आकार के पवन टरबाइन बनावट में थोड़ा जटिल होती है।

इसे पवन टरबाइन के साथ साथ अन्य मशीन भी इसमें लगी होती है। जैसे रोटर जनरेटर ट्रांसमिशन सिस्टम टावर आदि।

क्षैतिज अक्ष मशीन भी भिन्न प्रकार की होती है जो निम्न है।

क्षैतिज अक्ष मशीन दो ब्लेड के साथ (Horizontal Axis machine with two dynamic blade):-

इस प्रकार के क्षैतिज अक्ष में दो ब्लेड लगे होते हैं, जो हवा के प्रभाव से घूमते हैं तथा रोटर को घुमाते है। इसमें लगा gear box गति का नियंत्रित करता है। रोटर में लगा हुआ फैन ब्लेड आधा मुड़ा हुआ होता है। जिसे half bended या अधोमुखी कहते हैं। उपर्युक्त सभी प्रकार के उपकरण एक base प्लेट पर रखा जाता है। तथा उस आधार प्लेट को एक टावर पर स्थापित किया जाता जाता है।

इसमें एक टेल वेन उपकरण लगा होता है। जो रोटर के घूमते समय उसका संतुलन बनाए रखता है।

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क्षैतिज अक्ष प्रोपेलर टाइप (Single blade):-

जैसा कि नाम से ही लग रहा है इसमें सिंगल ब्लड का इस्तेमाल किया जाता है। इसके इंडक्शन जनरेटर के साथ गियर बॉक्स का भी प्रयोग किया जाता है। सिंगल ब्लेड लगने से रोटर की धुरी पर अधिक बेंडिंग आघूर्ण (bending torque) लगता है। यह बेंडिंग आघूर्ण ब्लेड के लंबाई पर निर्भर करता है।

यदि ब्लेड अधिक लंबा है, जैसे 60 मीटर से अधिक है, तो बेडिंग आघूर्ण अधिक लगेगा। जिससे पवन चक्की का फाउंडेशन ज्यादा कंपन करेगा। अतः इस bending आघूर्ण को कम करने के लिए ब्लेड के बिल्कुल विपरीत में एक काउंटरवेट लगाते हैं। जिससे ब्लड की संतुलन को बनाए रखने के साथ-साथ बेडिंग आघूर्ण को भी कम करता है।

क्षैतिज अक्ष बहुसंख्यक ब्लेड प्रोपेलर :-

इस प्रकार के पवन चक्की में बहुत से संख्या में ब्लेड का इस्तेमाल होता है। जो को मेटल शीट या एल्यूमिनियम शीट का बना होता है। इसके ब्लेड को बनाने के लिए सामान्यतः हल्के धातु का इस्तेमाल किया जाता है। इसका शक्तिगुणांक अधिक अच्छा होता है। यह उच्च सामर्थ्य और क्षमता वाला होता है। इसमें एक खास बात यह है कि यह अधिक गति वाले वायु (जैसे 60 km/h) में भी यह आसानी से कार्य करता रहता है। इसके साथ साथ इसकी शुरुआती बालाघूर्ण भी अधिक होती है। इसकी बनावट भी काफी सरल और काम कीमत वाली होती है।

ऊर्ध्व – अक्ष मशीन ( Vertical axis Machine):-

ऐसी मशीन को पेनिमोंस (panemones) कहते है। यह एक ग्रीक शब्द है। इसमें fan blade को उर्धवाधार में लगाया जाता है। इस ऊर्ध्व अक्ष वाले पवन चक्कियों को स्थापित करने का सबसे बड़ा लाभ यह है, कि इसमें हवा बहने की दिशा के अनुसार इसके फैन ब्लेड की दिशा को घूमना नही पड़ता है। जबकि क्षैतिज वाले में ऐसा करना पड़ता है।

इसके लाभ में यह भी है की इसमें अन्य उपकरणों जैसे गियर बॉक्स, alternator आदि को ऊपर फाउंडेशन बनाकर स्थापित नहीं करना पड़ता है। इन सब उपकरणों को नीचे जमीन पर फाउंडेशन बना कर लगाया जाता है।

इसमें फैन ब्लेड का घुमाव पृथ्वी से ऊपर से नीचे की तरफ नही होता है। जबकि यह पृथ्वी के धरातल से समांतर में घूमता है। अतः इसे fan blade पर गुरुत्व बल बहुत कम लगता है।

Chandra Mani Vishwakarma
Chandra Mani Vishwakarma

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