Cable in hindi | केबल कितने प्रकार के होते हैं

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परिचय:-

इलेक्ट्रिक पावर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने के लिए तार का उपयोग करते है। एक प्रकार से अगर कहा जाए तो केबल (Cable in Hindi) हमारे लिए इलेक्ट्रिक के क्षेत्र में काफी महत्वपूर्ण माध्यम है। आज के इस पोस्ट में हम के केबल क्या होता है तथा यह कितने प्रकार के होते हैं तथा प्रत्येक केबल के प्रकार को कहा कहा उपयोग कर सकते हैं। इन्हीं सब बातों का डिस्कस करेंगे।

केबल क्या होता है (Cable in Hindi):-

केबल एक माध्यम है जो इलेक्ट्रिक पावर को एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाने का काम करती है। यह cable एक धातु का बना होता है जो कि एलुमिनियम या कॉपर का हो सकता है क्योंकि यही दो प्रकार के धातु का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है। कभी-कभी हम स्टील धातु का भी प्रयोग cable बनाने में करते हैं।

केबल के ऊपर एक इंसुलेटिंग इंसुलेटिंग मैटेरियल का लेयर होता है। जो कि उस धातु को ढके रखता है। जिससे केबल को अंदर का चालक किसी व्यक्ति के संपर्क में ना आए ।

केबल में चालक के लिए प्रयुक्त होने वाले धातु:-

दोस्तों मुख्यत केबल में चालक के तौर पर aluminum, और कॉपर ही उपयोग किया जाता है। कभी कभी हम स्टील धातु का भी प्रयोग करते है। स्टील धातु का प्रयोग केबल में इसीलिए करते हैं क्योंकि हमे उस केबल की मैकेनिकल स्ट्रेंथ उच्च चाइए होती है। अगर हम आदर्श नजरिए से देखें तो विद्युत का सबसे अच्छा चालक चांदी होता है। लेकिन आप आसानी से समझ सकते है कि यह धातु चुकी अति कीमती है अतः इसका उपयोग केबल बनाने में नही कर सकते हैं।

एलुमिनियम की चालकता कॉपर की चालकता से कम होती है। अतः कभी-कभी जब हमें अधिक चालकता वाले केबल के साथ साथ अधिक मैकेनिकल स्ट्रैंथ वाले केबल की आवश्यकता होती है, तो हम का पर दांत में ही कोई अन्य धातु जैसे अधिक मैकेनिकल स्ट्रैंथ वाले धातु को मिलाकर नया मिश्र धातु का केबल बनाते हैं। उस केबल अधिक चालकता के साथ यांत्रिक सामर्थ भी बढ़ जाती है।

केबल के प्रकार (Types of cable in hindi):-

अगर केबल के प्रकारों को देखा जाए तो हम देखते हैं कि केबल अलग-अलग आधार पर अलग-अलग भागों में विभाजित किया जाता है।

उपयोग के आधार पर (on the basis of uses):-

1. वायरिंग केबल
2. पावर केबल

कंडक्टर मटेरियल के आधार पर (on the basis of conduct material):-

1. Copper conductor cable
2. एलुमिनियम कंडक्टर केबल

कोर की संख्या के आधार पर:-

1. सिंगल कोर केबल
2. डबल कोर केबल
3. ट्रिपल कोर केबल
4. डबल कोर केबल विद अर्थ कनेक्शन वायर

वोल्टेज के आधार(on the basis of voltage):-

1. 250 / 440
2. 650/1100

इंसुलेटिंग मटेरियल के आधार पर (on the basis of insulating material):-

1. वल्केनाइज्ड इंडिया रबर (VIR)
2. पीवीसी केबल
3. टीआरएस या सीटीएस केबल
4. Lead sheathed cable
5. Weather proof cable
6. Felxible cable

पॉली विनाइल क्लोराइड केबल (PVC):-

इस प्रकार के केबल में इंसुलेटिंग मैटेरियल के रूप में पीवीसी का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उपयोग हाउस वायरिंग में किया जाता है। इस प्रकार के इंसुलेशन वाला केबल आजकल ज्यादा प्रचलित है। इसमें दोनों प्रकार के केबल जैसे कापर चालक तथा एलुमिनियम चालक उपलब्ध है।

वल्केनाइज्ड इंडिया रबड़ केबल (VIR):-

इस प्रकार की केबल में इंसुलेशन के रूप में वल्केनाइज्ड रबर का इस्तेमाल किया जाता है। इस केबल को 250 से 440 वोल्ट तथा 650 से 1100 वोल्ट के रेंज में डिजाइन किया जाता है। यह केबल अब बहुत कम इस्तेमाल किया जाता है। इसके स्थान पर पीवीसी केबल ही प्रयोग किया जाता है।

चिमड़ रबर या कैब टायर केबल:-

इस प्रकार के केबल को ऐसे स्थानों पर प्रयोग किया जाता था। जहां पर नमी युक्त स्थान हो लेकिन अब इस केबल की जगह पीवीसी केबल ही इस्तेमाल किया जाता है।

Lead sheathed cable:-

इन केबल का उपयोग सभी प्रकार के वायरिंग में किया जाता है। यह केवल वहां पर इस्तेमाल किया जाता है जहां पर अधिक नमी के साथ-साथ मैकेनिकल आघात लगने की ज्यादा संभावना रहती है। क्योंकि इसकी इंसुलेटिंग मैटेरियल में लीड धातु की मिलावट रहती है जो मैकेनिकल अधातु से केबल के वायर को बचाती हैं।

वेदरप्रूफ केबल: –

ऐसे केबल जो सभी प्रकार के मौसम जैसे गर्मी सर्दी और बरसात आदि को सह लेता है। एसी केबल को सामान्यता बाहरी वातावरण में लगाया जाता है।

फ्लैक्सिबल केबल: –

ऐसे केबल जो पतले पतले तारों को मिलाकर बनाया जाता है। जो काफी हद तक लचीला होता है। तथा इसके तार के ऊपर इंसुलेशन के रूप में रेशम सूत के तथा प्लास्टिक से मिलाकर बनाया जाता है जो काफी लचीला होता है।

पावर केबल (Power Cable in Hindi):-

ऐसे केबल जो उच्च वोल्टेज में या ट्रांसमिशन लाइन में इस्तेमाल किए जाते हैं। उसे पावर केबल कहते हैं। पावर केबल को स्पेशली डिजाइन किया जाता है। क्योंकि इसको हर तरह के मौसम में प्रयोग करने के अलावा इसे ऐसे भी डिजाइन किया जाता है ताकि यह बाहरी मैकेनिकल आघात जैसे किसी किसी धारदार हथियार से लगा हुआ आघात या कोई बाहर से लगे आघात को आसानी से सहन कर सके।

अतः इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए पावर केबल के इंसुलेशन को कई लेयर में तैयार किया जाता है। जिसमें प्रत्येक लेयर का अपना-अपना गुण और कार्य होता है।

पावर केबल का इंसुलेशन लेयर:-

दोस्तों आप चित्र में देख सकते हैं कि पावर केबल के कुल 6 लेयर होते हैं। जो कि निम्न है।

Cable in Hindi
cable layers

1. कंडक्टर (C)
2. Insulation (I)
3. Metallic sheath (M)
4. Bedding (B)
5. Armoring (A)
6. Serving (S)

इसको आप एक शब्द सिमबॉस (CIMBAS) से याद कर सकते हैं।

कंडक्टर: –

यह केवल का वह भाग होता है जो करंट कैरी करता है या धातु का बना होता है। केबल में कंडक्टर एलमुनियम या टीन कॉपर हो सकता है। 

Insulation:-

यह कंडक्टर को इंसुलेशन प्रदान करता है। केबल में उपस्थित प्रत्येक कंडक्टर को इंसुलेशन प्रदान कर एक दूसरे को शार्ट होने से बचाता है। यह इंसुलेशन पीवीसी, VIR, या पेपर का हो सकता है।

Metallic sheath:-

यह लेयर कंडक्टर को नमी और अर्दाता से बचाता है। इसके साथ ही लीकेज वाटर वाले स्थानों पर यह मेटैलिक sheath चालक की रक्षा करता है। यह लेयर एल्यूमिनम फाइल या लेड फाइल का बना होता है।

Bedding :-

केबल (Cable in Hindi) का यह लेयर मेटैलिक sheath की मैकेनिकल शॉक से बचाने के लिए लगाया जाता है। यह एक मोटी लेयर होती है। जो बाहरी मैकेनिकल शॉक को मेटैलिक sheath तक जाने से रोकती है। यह लेयर जूट या कॉटन स्पंज का बना होता है।

Armoring :-

यह लेयर बेडिंग लेयर के ठीक ऊपर का होता है। यह स्टील वायर का जाली नुमा बनाया गया एक परत होता है। जो बेडिंग लेयर को किसी धारदार मैकेनिकल आघात से कटने से बचाता है।

Serving:-

यह पावर केबल के सबसे ऊपरी तथा बाहरी भाग होता है।

पावर केबल का वर्गीकरण (classification of power cable in Hindi):-

कंडक्टर के आधार पर: –

1. सिंगल कोर केबल
2. डबल कोर केबल
3. 2.5 core cable
4. 3 कोर केबल
5. 3.5 कोर केबल
6. 4 कोर केबल
7. मल्टी कोर केबल

स्ट्रक्चर के आधार(on the basis of structure):-

1. सॉलिड केबल
2. Hollow cable

Solid cable:-

इसके अंतर्गत निम्न प्रकार की केबल आते हैं।

1. जनरल केबल
2. बेल्टेड केबल
3. स्क्रीन केबल
4. XLPE केबल

Hollow cable:-

इसके अंतर्गत निम्न प्रकार के केबल आते हैं।

1. Gas pressure cable (SF6) (220kv)
2. Oil cable (T/F oil) (132kv to 220kv)

वोल्टेज के आधार पर :-

1. लो वोल्टेज केबल
2. हाई वोल्टेज केबल
3. सुपर वोल्टेज केबल
4. एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज केबल
5. एक्स्ट्रा सुपर वोल्टेज केबल

General Cable को हम सामान्य रूप से इस्तेमाल करते हैं। इस प्रकार के केबल को सामान्यतः कम वोल्टेज के लिए जैसे कि 1kv तक के वोल्टेज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

Belted cable को 22kv तक के वोल्टेज के लिए प्रयोग किया जाता है।

Screen Cable का उपयोग 11kv से लेकर 33 kv तक कर सकते हैं। लेकिन कभी कभी हम इसे 66kv तक इस्तेमाल करते है।

Pressure cable का प्रयोग 66kv के वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन में करते हैं।

XLPE cable का प्रयोग हम हर प्रकार के वोल्टेज ट्रांसमिशन में कर सकते हैं। यह केबल का प्रकार निम्न वोल्टेज लेवल से लेकर 400 kv तक के ट्रांसमिशन वोल्टेज में प्रयोग करते हैं।

Gas pressure cable, Hollow cable के अंतर्गत आता है। इसमें केबल में ऐसी व्यवस्था होती है कि इसके अंदर इंसुलेटिंग मैटेरियल के रूप में SF6 गैस भरा जाता है। यह 220 kv के ट्रांसमिशन लाइन में प्रयोग किया जाता हैं।

Oil cable भी hollow cable के अंतर्गत ही आता है। जिसमे इंसुलेटिंग मैटेरियल के रूप में T/F oil का प्रयोग किया जाता है। इस केबल को 132kv के ट्रांसमिशन लाइन में किया जाता है।

Chandra Mani Vishwakarma
Chandra Mani Vishwakarma

Owner of Hindi Hike

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