बैंकिंग से संबधित शब्दावली: Banking related terminology in Hindi

हमारे देश का लगभग प्रत्येक लोग अब बैंकिंग सिस्टम से जुड़ गए है। और अब तो हम लोग डिजिटल बैंकिंग मे और तेजी से आगे बढ़ने लगे है। ऐसे में हमे बहुत सारी बैंकिंग से संबधित शब्दावली देखते है और हमेशा सुनते है लेकिन कुछ कुछ शब्द का हमे अर्थ पता नहीं होता है। ऐसे में हम बैंकिंग system के बहुत सारी संकल्पना को समझना मुश्किल होता है। अतः यहां पर कुछ बैंकिंग टर्म के अर्थ को समझाया गया है।

बैंकिंग से संबधित शब्दावली

Table of Contents

आरबीआई का न्यूनतम रिजर्व सिस्टम क्या है

Bank rate

बैंक दर जिसके द्वारा रिजर्व बैंक व्यापारिक बैंकों को उधार देता है तथा उनके व्यापारिक बिलों की पुनः कटौती करता है। जब रिजर्व बैंक यह देखता है कि व्यापार में पूंजी की मात्रा में तेजी से वृद्धि हो रही है तो वह अपनी ब्याज दर बढ़ा देता है। बैंक दर बढ़ाते हैं बाजार में ब्याज दर बढ़ जाती है। और व्यापारी उधार ली हुई रकम को लौटाने लगते हैं और पहले से कम उधार लेते हैं।

इस प्रकार पूंजी की मात्रा कम हो जाती है और इसके विपरीत जब व्यापार की साख की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है तो रिजर्व बैंक अपनी बैंक का दर्द कम कर देता है। इस प्रकार हर बैंक को उधार सस्ता मिलने लगता है।

बैंक व्यवस्था का नियमन एवं नियंत्रण

भारतीय रिजर्व बैंक का महत्वपूर्ण कार्य यह है कि वह देश की बैंकिंग व्यवस्था का नियमन एवं नियंत्रण करता है है। बैंकों की विस्तार करते रहे उसके लिए आवश्यक है कि उनके कार्यों पर रिजर्व बैंक का उचित नियंत्रण रहे । रिजर्व बैंक निम्नलिखित साधनों से इन्हे नियंत्रित करता है। जैसे – लाइसेंस, प्रबंध, पूंजी, तरल कोष, शाखा विस्तार, निरीक्षण, कमजोर बैंकों का मिलना

न्यूनतम रिजर्व सिस्टम(minimum reserve system)

रिजर्व बैंक के 10 निरगमन कार्यालय है। जों कि मुंबई, बंगलौर, कानपुर, कलकत्ता, हैदराबाद, चेन्नई, नागपुर पटना आदि है। जिसमें नई दिल्ली में नियंत्रण कार्य प्रणाली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया न्यूनतम कोष प्रणाली के अंतर्गत नोटों को निर्गमन करती है। जिसके अनुसार 200 करोड़ रुपए की विदेशी प्रतिभूतियों एवं स्वर्ण (जिनमें से 115 करोड़ रुपए के स्वर्ण रखना अनिवार्य है) धरोहर के रूप में रखकर आवश्यकतानुसार नोटों के निरगमन् किया जाता है।

रेपो रेट क्या है( what is rapo rate in hindi)

Repo rate वह दर होती है। जिस पर बकों को RBI कर्ज देता है। तथा बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को ऋण देता है। रेपो रेट कम होने से मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज सस्ते हो जाते हैं।जैसे – होम लोन, व्हीकल लोन , आदि

सामान्यतः कहा जाए तो जब हमे पैसे की जरूरत हो और अपना बैंक अकाउंट खाली हो तो हम बैंक से कर्ज लेते हैं। इसके बदले हम बैंक को ब्याज चुकाते हैं। इसी तरह बैंकों को अपनी जरूरत के काम काज के लिए काफी रकम की जरूरत पड़ती है। इसके लिए बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेते है। बैंक इस लोन पर रिजर्व बैंक को जिस दर पर ब्याज चुकाते हैं उस ही हम रेपो रेट कहते है।

रिवर्स रेपो रेट क्या है(reverse rapo rate)

देश में कामकाज कर रहे बैंकों के पास जब दिन भर के कामकाज के बाद रकम बची रह जाती है। तो उस रकम को भारतीय स्टेट बैंक में रख देते है। इस रकम पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है। भारतीय रिजर्व बैंक इस रकम पर जिस दर से बैंकों को ब्याज देता है उस ही हम रिवर्स रेपो रेट कहते है।

Statutory liquidity ratio in hindi

भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार में तरलता की मात्रा नियंत्रित करने मैं रिजर्व बैंक जिन उपायों तथा उपकरणों का सहारा लेता है उनमें एसएलआर एक महत्वपूर्ण उपकरण है। इस लेख में हम जानेंगे कि एसएलआर क्या है। यह कैसे निर्धारित होता है और रिजर्व बैंक इसका प्रयोग किस उद्देश्य के लिए और किस प्रकार करता है।यह बैंकों के पास उपलब्ध जमा पूंजी का वह हिस्सा होता है जो कि उन्हें अपनी जमा पूंजी पर लोन जारी करने के पहले अपने पास रख लेना अनिवार्य होता है। यह नगदी(cash), स्वर्ण भंडार(gold reserve), सरकारी प्रतिभूतियों(government approved securities) वगैरह किसी भी रूप में हो सकता है।

रिटेल बैंकिंग क्या है( what is Retail Banking in hindi)

रिटेल बैंकिंग एक प्रकार की बैंकिंग है जिनमें खुदरा ग्राहकों के साथ सीधा व्यवहार किया जाता है। इस प्रकार की बैंकिंग को उपभोक्ता बैंकिंग या व्यक्तिगत बैंकिंग के रूप में भी जाना जाता है।

बिटकॉइन क्या है (what is bitcoin in Hindi)

बिटकॉइन एक वर्चुअल यानी आभासी मुद्रा है। आभासी मतलब कि अन्य मुद्रा की तरह इसका कोई भौतिक स्वरूप नहीं है। यह एक डिजिटल करेंसी है। डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने में लगभग 2 से 3% लेनदेन शुल्क लगता है लेकिन बिटकॉइन में ऐसा कुछ नहीं है।

कॉल मनी क्या है (what is call money in Hindi)

एक दिन के लिए उधार लेने और देने को कॉल मनी कहा जाता है। जब 2 दिन से 14 दिन के बीच की अवधि के लिए धन उधार लिया और दिया जाता है तो उसे नोटिस मनी कहा जाता है। 15 दिन से अधिक की अवधि के लिए उधार लेने और देने को टर्न मनी कहा जाता है।

कैपिटल मार्केट और मनी मार्केट में अंतर क्या है (what is the difference between capital market and money market in hindi)

कैपिटल मार्केट जहां पर हम लंबे समय के लिए ट्रेड कर सकते हैं वह कैपिटल मार्केट कहलाता है जबकि मनी मार्केट कम समय के लिए ट्रेड करने का एक जरिया है।

कैपिटल मार्केट के इंस्ट्रूमेंट शेयर डिवेंचर bonds , retained earnings है। जबकि मनी मार्केट के इंस्ट्रूमेंट Treasury bill, commercial papers, certificate of deposite और ट्रेड क्रेडिट हैं।

कैपिटल मार्केट के इंस्ट्रूमेंट में ज्यादा तरलता नहीं होता है जबकि मनी मार्केट के इंस्ट्रूमेंट में तरलता पाया जाता है।

कैप्टन मार्केट का इंस्ट्रूमेंट हायर रिटर्न देता है जबकि मनी मार्केट का रिटर्न अपेक्षाकृत कम रिटर्न देता है।

कैपिटल मार्केट इंस्ट्रूमेंट हाय रिस्की होता है जबकि मनी मार्केट का इंस्ट्रूमेंट लो रिस्की होता है।

गैर निष्पादित संपत्ति (what is non performing assets (NPA) in Hindi)

यानी जब कोई देनदार यानी बैंक का कर्जदार अपने बैंक की EMI देने में नाकामयाब रहता है तब उसका लोन अकाउंट नॉन परफॉर्मिंग असेट्स(NPA) कहलाता है। यानी बैंक का कर्ज डूब गया है और जिसके फिर से वापस आने की उम्मीद नहीं के बराबर है उसे एनपीए कहते हैं।

आमतौर पर बैंकों को कर्ज की EMI 3 महीने पर न जाए तो उसे अकाउंट को एनपीए घोषित कर दिया जाता है प्रोग्राम या फिर जब किसी बैंक को रिटर्न मिलना बंद हो जाता है तब वह उसके लिए एनपीए हो जाता है।

नेगेटिव इंटरेस्ट रेट(Negative interest rate in hindi)

सरल शब्दों में समझा जाए तो यह एक ऐसी और आस्थाई स्थिति है जिसमें एक बैंक को सेविंग के लिए केंद्रीय बैंक को ब्याज देना पड़ता है अर्थात यदि किसी बैंक के पास ज्यादा सेविंग्स होती है तो उसे केंद्रीय बैंक को ज्यादा ब्याज देना होता है ।

यह नकारात्मक स्थिति तब आती है जब हमारी अर्थव्यवस्था संकुचन की स्थिति में रहती है। प्रायः जब हम बैंक में अपनी पूंजी जमा करते हैं तो हमें बैंक के द्वारा एक उचित ब्याज दिया जाता है। लेकिन इस स्थिति में बैंक उस जमा पूंजी का नकारात्मक ब्याज हमसे लेता है।

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ब्लॉकचेन सिस्टम क्या है(what is blockchain system in Hindi)

साइबर क्राइम और हैकिंग को रोकने के लिए ब्लाकचैन टेक्नोलॉजी को फुलप्रूफ सिस्टम के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। ब्लॉकचेन वितरित डेटाबेस होती है पूर्ण ब्रह्म इसमें लगातार कई रिकॉर्ड्स को संचालित किया जाता है। जिले ब्लॉक कहते हैं जिसमें प्रत्येक ब्लॉक अपने पूर्व के ब्लॉक से लिंक रहता है।

ब्लाकचैन एक डिजिटल लेजर है यानी कि एक बुक है जो ऐसे रिकॉर्ड रखता है जहां पर जमा और निकासी के रिकॉर्ड पास होते हैं। ओरिजिनल बुक से एंट्री इस लेजर में अपडेट होते हैं।

स्कीमिंग क्या होती है(skimming)

एटीएम स्कीमिंग आपके डेबिट कार्ड की जानकारी को चुराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है इसे स्किमिंग कहते हैं। इसमें एक छोटी सी डिवाइस होती है जिसका इस्तेमाल फ्रॉड लोगों के द्वारा आम लोगों के डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के नंबर पिन आदि चुराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

मनी लांड्रिंग(what is money laundering in Hindi)

काले धन को वैध बनाना मनी लांड्रिंग कहलाता है। यह अवैध रूप से प्राप्त धन के स्रोतों को छिपाने की कला है।यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा अवैध या काले धन को वैध बनाकर दिखाया जाता है। काले धन को अवैध धन में परिवर्तन करने में जिस प्रक्रिया से गुजारा जाता है उसे मनी लांड्रिंग कहते हैं।

चेक क्या होता है(what is cheque in hindi)

चेक बैंक के द्वारा अकाउंट होल्डर को दिया जाने वाला वह भुगतान साधन है जिसमें ग्राहक किसी अगले व्यक्ति को अपने अकाउंट से डायरेक्ट cas9 देकर भुगतान कर सकता है। चेक में आप जिसे पैसा दे रहे हैं उनका नाम लिखना होता है। वह किसी व्यक्ति का नाम या फर्म का नाम भी हो सकता है।

चेक में आपको यह भी भरवाना होता है कि आप कितने पैसे उस व्यक्ति को दे रहे हैं शब्दों में और संख्या में दोनों में भरवाना होता है और आप उस व्यक्ति को कब पैसा दे रहे हैं यह भी सुनिश्चित करना होता है। और अंत में आपको अपना सिग्नेचर करना होता है। अब वह व्यक्ति उस चेक को अपने बैंक खाते में डिपॉजिट कर देता है तथा कुछ दिन बाद वह पैसा उसके खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

चेक और डिमांड ड्राफ्ट में अंतर

चेक और डिमांड ड्राफ्ट में सबसे बड़ा अंतर यह है कि डिमांड ड्राफ्ट केवल अकाउंट में ही पे होता है। जिसके ना पर यह ऑर्डर है वह उसे अपने अकाउंट में इन कैश करा सकता है। वहीं cheque account में जमा कराया जा सकता है। Amount ना होने कि स्थिति में cheque bounce हो जाता है।

Nisha Pathak

Nisha pathak is perusing Master Degree in Commerce from Dindayal Upadhyay University Gorakhpur. She is not a permanent editor of this website. We requested to write on banking terminology. Thanks a lot… Nisha!

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