शोर्ट सर्किट करंट में डिपेंडेंसी, प्रभाव और इसके महत्व

परिचय :

जैसे कि पिछले पोस्ट में हमने डिस्कस किया कि फॉल्ट करंट कितने प्रकार के होते हैं और उसमें से हमने बहुत सारे फॉल्ट करंट को डिस्कस किया जिसमें से एक था। शॉर्ट सर्किट फॉल्ट इस शॉर्ट सर्किट फॉल्ट में जो शॉर्ट सर्किट करंट उत्पन्न होता है उसमें उसे शॉर्ट सर्किट करंट की डिपेंडेंसी, शॉर्ट सर्किट करंट के कारण होने वाले प्रभाव और उसे शॉर्टकट करंट का महत्व क्या है आज के इस पोस्ट में विस्तार से समझेंगे।

लघुपथ धारा की निर्भरता (Dependency of short circuit current):

प्रदोषी परिपथ की लघुपथ धारा अग्र घटकों पर निर्भर करती है-

शोर्ट सर्किट करंट में डिपेंडेंसी,

प्रदोषी परिपथ की प्रतिबाधा तथा प्रतिघात पर (On the impedance and reactance of faulty circuit):

प्रदोषी परिपथ में दोष बिन्दु की ओर बहने वाली लघुपथ धारा का मान, इस प्रदोषी बिन्दु तक की प्रतिबाधा (Z) पर निर्भर करता है, जिसके अन्तर्गत ए० सी० जेनरेटर, ट्रांसफार्मर, लाइन आदि सभी धारावाही उपकरणों की प्रतिबाधा आती है। चूंकि इस परिपथ में प्रतिघात (X) की अपेक्षा प्रतिरोध (R) का मान नगण्य है, इसलिये हम दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि लघुपथ धारा का मान इस प्रदोषी परिपथ के प्रतिघात (X) पर निर्भर करता है। पाठकों को विदित होना चाहिये कि यदि परिपथ में भू-प्रदोष है, तो लघुपथ धारा का मान भू-दोषी प्रतिरोध (earth fault resistance) पर भी निर्भर करेगी।

प्रदोषी बिन्दु की स्थिति पर (On the location of the faulty point):

वैद्युत शक्ति प्रणाली में लघुपथ धारा का मान, जनन स्रोत से प्रदोष बिन्दु की दूरी पर निर्भर करता है। यदि प्रदोष बिन्दु ऑल्टनेंटर के निकट है, तो लघुपथ धारा का मान ऑल्टनेंटर की उच्च, प्रतिबाधा (Z) व प्रतिघात (X) पर निर्भर करेगा; क्योंकि ऑल्टनेंटर के प्रतिरोध (armature resistance) का मान उसके प्रतिघात (reactance) की अपेक्षा नगण्य है। इस स्थिति में आल्टनेंटर का प्रतिघात (X) उच्च होने के कारण लघुपथ धारा का मान सीमित (limited) होगा। यदि प्रदोष बिन्दु ऑल्टरनेटर से अधिक दूर है, अर्थात् प्रणाली में संयोजित ट्रांसफार्मर के बाद है, तो लघुपथ धारा का मान, इस स्थिति में पहले की अपेक्ष अधिक होगा; क्योंकि प्रणाली के अन्तर्गत, ऑल्टनेंटर ट्रांसफार्मर आदि सभी धारावाही उपकरण परस्पर समानान्तर क्रम में जुड़े रहते हैं। इसलिये प्रणाली के जनित्र स्रोत से प्रदोषी बिन्दु की दूरी बढ़ाने से प्रदोषी परिपथ की प्रतिबाधा (Z) व प्रतिघात (X) घटती है और लघुपथ धारा बढ़ती है। (iii) प्रणाली की क्षमता पर (On the kva of the system) वैद्युत शक्ति प्रणाली में लघुपथ धारा का मान प्रणाली की क्षमता (kva) के बढ़ाने से बढ़ता है और घटने से घटता है; क्योंकि प्रणाली के प्रदोषी परिपथ में लघुपथ धारा का मान (value of short circuit current) Isc = short circuit kva/ Rated kv चूँकि प्रणाली में सभी ऑल्टनेंटर परस्पर समानान्तर क्रम में संयोजित रहते हैं; जो एक निश्चित स्थिर वोल्टता पर प्रणाली की क्षमता (kva) को बढ़ाकर, उसकी लोड उठाने को क्षमता को बढ़ाते हैं और लघुपथन के समय सभी मिलकर एक साथ प्रदोषी बिन्दु धारा भेजते हैं। इस प्रकार प्रणाली में ऑल्टनेंटर की संख्या के बढ़ने से प्रणाली की क्षमता (kva rating) बढ़ती है और प्रदोष के समय लघुपथ धारा का मान भी बढ़ता है।

प्रणाली में जनित्रों की संख्या पर (On the numbers of generators) :

वैद्युत शक्ति प्रणाली में लघुपथ धारा का मान प्रणाली में संयोजित ऑल्टनेंटर की संख्या के बढ़ने से बढ़ता है और घटने से घटता है। चूँकि प्रणाली में सभी ऑल्टनेंटर परस्पर समानान्तर क्रम में संयोजित रहते हैं, जो एक निश्चित स्थिर वोल्टता पर प्रणाली की क्षमता (kva) को बढ़ाते हैं और क्षमता के बढ़ने से प्रणाली की इलेक्ट्रिकल लोड उठाने की क्षमता तथा लघुपथ धारा का मान भी बढ़ता है।

प्रणाली में परिणामित्रों की संख्या पर (On the number of transformers):

वैद्युत शक्ति प्रणाली में लघुपथ धारा का मान, प्रणाली में संयोजित ट्राँसफॉर्मरों की संख्या बढ़ने से बढ़ता है और घटने से घटता है। चूँकि प्रणाली में सभी ट्रांसफॉर्मर परस्पर समानान्तर क्रम में संयोजित रहते हैं, इसलिये प्रणाली की तुल्य प्रतिबाधा (Z) व प्रतिघात (X) ट्राँसफॉर्मरों की संख्या के बढ़ने से घटती है। परिणामस्वरूप प्रणाली में लघुपथ धारा का मान बढ़ता है तथा इसका विपर्यय (vice-versa) ।

प्रणाली में पोषकों की संख्या पर (On the number of feeders) :

वैद्युत शक्ति प्रणाली में लघुपथ धारा का मान, उसमें संयोजित पोषकों की संख्या के बढ़ने से बढ़ता है और घटने से घटता है। चूँकि प्रणाली में संयोजित सभी पोषक परस्पर समानान्तर क्रम में जुड़े रहते हैं, जो प्रणाली की परिणामी प्रतिबाधा (Z) व प्रतिघात (X) को कम करते हैं। परिणामस्वरूप पोषकों की संख्या के बढ़ने से प्रणाली में लघुपथ धारा का मान बढ़ता है।

प्रणाली के शक्ति गुणक पर (On the power factor of the system):

वैद्युत शक्ति प्रणाली में लघुपथ धारा का मान प्रणाली के शक्ति गुणक के घटने से बढ़ता है और बढ़ने से घटता है।

लघुपथ धारा का प्रभाव (Effect of short circuit current):

यदि वैद्युत शक्ति प्रणाली के प्रदोषी परिपथ में प्रतिबाधा (Z) /प्रतिघात (X) की कमी के कारण अथवा विकसित वैद्युत प्रदोष की प्रकृति के कारण लघुपथ धारा का मान अति उच्च है, तो यह अत्यधिक असामान्य प्रदोषी धारा प्रणाली में संलग्न, उन सभी उपस्कर तथा उपकरणों को जलाकर नष्ट कर देगी, जिनसे होकर यह गुजरती है और वे उपस्कर तथा उपकरण होंगे ऑल्टनेंटर, ट्रांसफॉर्मर लाइन परिपथ आदि। इस प्रकार करोड़ों रुपयों की मशीनरी जलकर नष्ट हो जायेगी और सप्लाइ भंग हो जायेगी। परिणामस्वरूप एक सतत् लम्बे समय तक वैद्युत ऊर्जा का अभाव बना रहेगा, जिससे औद्योगिक उत्पादन तथा कृषि सम्बन्धी उत्पादन रुक जायेगा। इस भीषण तबाही (क्षति) से बचने के लिये, यह नितान्त आवश्यक है कि दुर्घटना (प्रदोष) के समय, प्रदोषी परिपथ या अंग को सम्पूर्ण वैद्युत शक्ति प्रणाली से पृथक् (disconnect) कर दिया जाये, तब इस बचाव हेतु प्रणाली में लगाने के लिये आवश्यकता होगी स्विच गियर एण्ड प्रोटेक्शन की, अर्थात् फ्यूज, सर्किट ब्रेकर रिले आदि रक्षण युक्तियों की।

लघुपथ धारा का महत्व (Significance of s.c. current):

वैद्युत शक्ति प्रणाली में निम्न दृष्टिकोणों से लघुपथ धारा का विशेष महत्व है-

सुरक्षा के दृष्टिकोण से (From safety point of view):

वैद्युत शक्ति प्रणाली की सुरक्षा, लघुपथ धारा पर निर्भर करती है। अतः जिस प्रणाली में लघुपथ धारा की मात्रा जितनी ही कम होती है, वह प्रणाली उतनी ही अधिक सुरक्षित होती है, इस प्रकार लघुपथ धारा के घटने से प्रणाली की सुरक्षा बढ़ती है। लघुपथ धारा को कम करने के लिये तथा प्रणाली का स्थायित्व (stability) बढ़ाने के लिये उस प्रणाली में प्रतिघातकों (reactors) को संयोजित किया जाता है। पाठकों को विदित होना चाहिये कि किसी प्रणाली की सुरक्षा का तात्पर्य उस प्रणाली में संलग्न मशीनों, उपस्करों तथा उपकरणों की सुरक्षा से है।

क्षमता के दृष्टिकोण से (From capacity point of view):

वैद्युत शक्ति प्रणाली की क्षमता (kva), लघुपथ धारा पर निर्भर करती है। अतः जिस प्रणाली से प्राकृतिक रूप से जितनी अधिक लघुपथ धारा होती है, वह प्रणाली उतनी ही अधिक उच्च क्षमता वाली होती है। इस प्रकार प्रणाली की लघुपथ धारा के बढ़ने से प्रणाली की क्षमता बढ़ती है, अर्थात् उच्च क्षमता वाली वैद्युत शक्ति प्रणालियों की लघुपथ धारा का मान स्वाभाविक रूप से ही उच्च होता है। इसलिये उच्च लघुपथ धारा वाली उच्च क्षमता की प्रणाली में उच्च क्षमता के ही यन्त्रों, उपस्करों तथा उपकरणों का प्रयोग होता है, जो अधिक कीमती होते हैं। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि लघुपथ धारा के बढ़ने के साथ-साथ प्रणाली की प्रारम्भिक कीमत भी बढ़ती है। जब उच्च लघुपथ धारा वाली प्रणाली की स्टेबिलिटी विकसित करने के लिये, इसमें रिएक्टरों को जोड़ा जाता है, तो रिएक्टरों की कीमत के बढ़ने से प्रणाली की मूल लागत और अधिक बढ़ जाती है, जो एक अभिशाप (disadvantage) है; परन्तु इसके विपरीत उच्च लघुपथ धारा वाली उच्च क्षमता की प्रणाली की अतिभार क्षमता (over load capacity) भी अत्यधिक होती है; जो एक वरदान (advantage) है।

अभिकल्पना के दृष्टिकोण से (From design point of view):

वैद्युत शक्ति प्रणाली की अभिकल्पना, लघुपथ धारा पर निर्भर करती है। अतः जिस प्रणाली की जितनी ही अधिक लघुपथ धारा होती है, उस प्रणाली की अभिकल्पना उतनी ही अधिक क्षमता के लिये की जाती है, अर्थात् उस प्रणाली में उतनी ही अधिक अभिकल्पित क्षमता के उपस्करों, जैसे-स्विच, आइसोलेटर, फ्यूज, सर्किट ब्रेकर, रिले आदि आटोमेटिक प्रोटेक्टिव स्विच गियर तथा मीजरिंग इंस्ट्रूमेंट संयोजित किये जाते हैं और उतनी ही अधिक क्षमता के उपकरणों, जैसे लाइन कण्टक्टर केबिल, बस बार, इंस्यूलेटर, कनेक्टर, झंपर आदि लगाये जाते हैं। इस प्रकार प्रणाली की लघुपथ धारा के आधार पर ही प्रणाली में प्रयोग होने वाले उपस्करों तथा उपकरण की अभिकल्पना की जाती है।

स्थायित्व के दृष्टिकोण से (From stability point of view):

वैद्युत शक्ति प्रणाली की स्टेबिलिटी भी लघुपथ धारा पर निर्भर करती है। अतः जिस प्रणाली की जितनी ही कम लघुपथ धारा होती है, उस प्रणाली की उतनी ही अधिक स्टेबिलिटी होती है। इस प्रकार निम्न लघुपथ धारा वाली अर्थात् अधिक प्रतिबाधा (Z) व प्रतिघात (X) वाली प्रणाली अधिक स्थायी (stable) होती है। प्रायः स्थायित्व (stability) संशोधन (improvement) करने के लिये प्रणाली में प्रतिघातकों (reactors) का ही प्रयोग किया जाता है। परन्तु प्रतिघातकों का प्रयोग उच्च लघुपथ धारा वाली प्रणालियों में ही किया जाता है; ताकि लघुपथ धारा का मान घट जाये और प्रणालियों का स्थायित्व बढ़ जाये। लघुपथ धारा वाली निम्न क्षमता की प्रणालियों की प्रतिबाधा (Z) व प्रतिघात (X) स्वाभाविक ही उच्च होने के कारण उनका स्थायित्व भी उच्च होता है और उनमें किसी प्रकार के प्रतिघातों को प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं होनी है।

टिकाऊपन या जीवन काल के दृष्टिकोण से (From durability or life point of view) :

वैद्युत शक्ति प्रणाली की लाइफ भी लघुपथ धारा पर निर्भर करती है। प्रायः उच्च लघुपथ धारा वाली उच्च क्षमता की प्रणाली की लाइफ निम्न होती है; अर्थात् इस प्रणाली के जलकर नष्ट होने की सम्भावना अधिक होती है, इसलिये इसके बचाव के लिये विभिन्न प्रकार के स्वचालित रक्षण उपस्करों, जैसे-फ्यूज, सर्किट, ब्रेकर, रिले आदि को प्रणाली में संयोजित किया जाता है।

टिप्पणी (Note) :

उक्त महत्व को देखते हुए, यह आवश्यक हो जाता है कि वैद्युत शक्ति प्रणाली की लघुपथ धारा का परिकलन करके, उसके वास्तविक मान से अवगत हुआ जाये अर्थात् जाना जाये ।

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