प्रकाश प्रकाश के प्रभाव से चलने वाली डिवाइस | photo conductive device | photo diode | Photo Transistor | LED

फोटो चालन युक्तियाँ (Photo Conductive Devices):-

Electronic के क्षेत्र में बहुत सारी कंपोनेंट होती हैं जो प्रकाश के प्रभाव से चलित या प्रभावित होती है। या हम कहे तो उस डिवाइस पर प्रकाश पड़ने से वह डिवाइस एक्टिवेट हो जाती है। ऐसे डिवाइस को हम फोटो कंडक्टिव डिवाइस कहते हैं। आज के इस पोस्ट के माध्यम से कुछ फोटो कंडक्टिव डिवाइस के बारे डिस्कस करेंगे । 

फोटो डायोड (Photo Diode) –

चित्र 3.57 (a) में दिखाया गया है कि फोटो डायोड एक विशेष प्रकार का अर्द्धचालक डायोड होता है जिसे उत्क्रम बॉयस अवस्था में प्रचालित किया जाता है। प्रकाश की तीव्रता को बढ़ाने पर उत्तम धारा में रेखीय वृद्धि होती है। जब डायोड के PN जंक्शन पर उचित तरंग दैर्ध्य का प्रकाश फोकस किया जाता है, तो जंक्शन के अनुदिश धारा वाहक गति करते हैं जिससे बाह्य लोड R1 में धारा प्रवाहित होती है जोकि जंक्शन पर आपाती प्रकाश की मात्रा के समानुपाती होती हैं।

Photo Diode

मान लीजिये कि उत्क्रम बॉयस PN सन्धि अंधेरी स्थिति में है, अर्थात् उस पर प्रकाश नहीं पड़ रहा है। इस स्थिति में धारा डायोड द्वारा उत्क्रम बॉयस वोल्टेज पर निर्भर नहीं करती है तथा उसका मान नियत बना रहता है। यह धारा ऊष्मीय विक्षोभ से उत्पन्न विवर- इलेक्ट्रॉन युग्म के कारण होती है, अर्थात् यह संतृप्त धारा अल्प आवेश वाहकों (N क्षेत्र में विवर तथा P क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन) के कारण उत्पन्न होती है जो सन्धि को पार कर जाते हैं तथा विभव रोधिका को कम करते हैं। बहुसंख्यक वाहक सन्धि को पार करने में असमर्थ रहते हैं। जब सन्धि पर प्रकाश पुंज पड़ता है तो इससे नवीन इलेक्ट्रॉन-विवर युग्म उत्पन्न होते हैं जिनको अल्प आवेश वाहक ही माना जा सकता है।

अल्प वाहक सन्धि के निकट उत्पन्न होते हैं वे सन्धि को पार कर जाते हैं, जिससे एक अतिरिक्त धारा प्रवाहित होती है। सन्धि पर आरोपित अधिक उत्क्रम वोल्टेज के कारण अल्प वाहकों द्वारा सन्धि पार करने की क्रिया इतनी शीघ्रता से होती है कि इलेक्ट्रॉन-वियर का संयोग होने की सम्भावना बहुत कम हो जाती है। फोटो डायोड के बाद प्रायः एक प्रवर्धक युक्ति लगाई जाती है। यदि निर्माण कर्ता द्वारा प्रवर्धक को उसी सिलीकॉन चिप पर बनाया जाता है तो इस युक्ति को फोटो ट्रांजिस्टर कहते हैं।

इस प्रकार फोटो डायोड निम्न प्रकार के होते हैं।

  • PN फोटो डायोड ।
  • NPN फोटो ट्रांजिस्टर
  • फोटो फेट
  • फोटो SCR

फोटो ट्रांजिस्टर (Photo Transistor):-

किमी फोटो ट्रांजिस्टर का समतुल्य परिपथ तथा उसके अभिलक्षण वक्र चित्र 3.58 में प्रदर्शित किये गये हैं। संग्राहक बेस जंक्शन उत्क्रम वॉयस पर होता है। जब प्रकाश को संग्राहक बेस जंक्शन पर फोकस किया जाता है, तो बेस धारा प्रवाहित होती है। इस बेस धारा का ट्रांजिस्टर द्वारा प्रवर्धन किया जाता है यहाँ बेस को बॉयस करके इस युक्ति की सुप्राहिता को बदला जा सकता है।

Photo Transistor

PN फोटो डायोड तथा अन्य फोटो युक्तियों को कम्प्यूटर पन्च कार्यों तथा टेपों को शीघ्रता से पढ़ने, प्रकाश संसूचक यन्त्रों तथा प्रकाश नियन्त्रित स्विचों में प्रयुक्त किया। जाता है।

फोटो डायोड के अनुप्रयोग :-

चित्र 3.59 में फोटो डायोड का रिले सर्किट दिखाया गया है। जब प्रकाश उत्क्रम बॉयस डायोड पर चमकता है तो यह Rg के द्वारा धारा में वृद्धि करता है। RB के अनुदिश वोल्टेज VB इस प्रकार होता है कि इसकी शिखर पृथ्वी की अपेक्षा धन होती है। यह वोल्टेज + VB ट्रांजिस्टर O के बेस को अप बॉयस करता है। VB में कोई भी वृद्धि होने पर 18 में संगत वृद्धि होती है तथा ” में वृद्धि से संग्राहक धारा में वृद्धि होती हैं।

Photo Diode

क्योंकि रिले कुण्डली संवाहक सर्किट में जुड़ी है अतः यह कुण्डली प्रकाश को ऊर्जा देती है। प्रकाश स्रोत को हटा लेने पर रिले अपनी प्रारम्भिक स्थिति में लौट आता है। इस प्रकार के सर्किट को अग्र दिशा में जोड़ा जाता है। प्रकाश की मात्रा बढ़ने पर लोड धारा बढ़ती है।

फोटो डायोड का दूसरा अनुप्रयोग चित्र 3.60 में दिखाया गया है। इसमें दो फोटो डायोड किसी आपरेशनल प्रवर्धक के इनपुट सिंगनल को कन्ट्रोल करने के लिये प्रयुक्त किये गये हैं। प्रवर्धक के आउटपुट को सर्वो मोटर पद्धति को चलाने में प्रयुक्त किया गया है।

Photo Diode application

इस सर्किट के कार्य करने का सिद्धान्त यह है कि जब फोटो डायोड समान रूप से चालन करते हैं, तो ऑपरेशन प्रवर्धक का आउटपुट इस संयोग को पूर्व निर्धारित समय के लिये बन्द कर देता है।

एक कन्ट्रोल सर्किट में फोटो डायोड के स्थान पर ग्राय: फोटो ट्रांजिस्टर का उपयोग किया जाता है क्योंकि ट्रांजिस्टर में प्रवर्धक की क्रिया स्वभाविक रूप से होती है।

प्रकाश उत्तेजित SCR (Light Activated SCRs):-

यह एक बहुत लोकप्रिय युक्ति है। इसको संक्षेप में LASCR कहते हैं। इसे चित्र 3.61 में दिखाया गया है। SCR, चार पर्तों के PNPN युक्ति होती है जो कि उच्च धारा हैंडिल करने के लिये अर्द्धचालक स्विचों के रूप में प्रयुक्त किये जाते हैं। SCR एक लैचिंग रिले के समान होते हैं। सैचिंग रिले एक ऐसी युक्ति होती है जिसमें गेट टर्मिनल पर ट्रिगर पल्स लगाने पर यह उच्च प्रतिरोध अवस्था से निम्न प्रतिरोध अवस्था में आती है। LASCR एक अर्द्धचालक ओप्टो इलेक्ट्रॉनिक स्विच होती है जिसमें एक लेन्स द्वारा प्रकाश उसके गेट पर फोकस किया जाता है। इसे प्रकाश द्वारा चालन अवस्था में ट्रिगर किया जाता है। LASCR बहुत प्रकाश की मात्रा का उपयोग करके बहुत अधिक मात्रा की विद्युतीय ऊर्जा का नियन्त्रण करता है।

Light Activated SCRs

फोटो प्रतिरोध युक्तियाँ (Photo resistive Devices):-

इन युक्तियों में प्रकाश ऊर्जा के परिवर्तन के कारण विद्युतीय चालकता में परिवर्तन होता है। इस प्रकार को युक्तियों की प्रकाश पर आधारित प्रतिरोध (Light Dependent Resistors or LDRs) कहा जाता है क्योंकि इनका प्रतिरोध चालकता के व्युत्क्रम अनुपात में बदलता है। चित्र 3.62 में प्रदर्शित कैडमियम सल्फाइड (CaS) सेल सामान्य प्रकार का फोटो चालक सेल होता है। जब इस पर परिवर्ती तीव्रता का दृश्य प्रकाश डाला जाता है, तो कैडमियम सल्फाइड सेल का प्रतिरोध बदलता है। इस पर पड़ने वाले प्रकाश की मात्रा बढ़ने पर सेल प्रकाश तीव्रता परिवर्तनों के लिये बहुत सुप्राही होता है। इन युक्तियों को विशेष रूप से अलार्म तथा रिले कन्ट्रोल सर्किटों में प्रयुक्त किया जाता है। चित्र 3.62 (b) में फोटो प्रतिरोध युक्ति का परिच्छेद दृश्य दिखाया गया है।

Photo resistive Devices


प्रकाश के पड़ने पर अर्द्धचालक पदार्थ की सतह से इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं जिनमें पदार्थ का विद्युतीय प्रतिरोध घटता है अर्थात् पदार्थ अधिक चालक हो जाता हैं।

प्रकाश उत्सर्जन डायोड स्रोत(Light Emitting Diode Sources-LEDS):-

हम जानते हैं कि जब PIN सन्धि अप बॉयस पर होती है तो विभवरोधिका (Potential Barrier) कम हो जाती है तथा बहुसंख्यक आवेश वाहक (Majority Carrier) संधि को पार करने लगते हैं। N क्षेत्र के चालन बैण्ड इलेक्ट्रॉन संधि को पार करके P क्षेत्र में जाकर संयोजी बैण्ड में कूदकर विवरों से संयोग करके समाप्त हो जाते हैं। P क्षेत्र के संयोजी बैण्ड-विवर भी सन्धि को पार करके जैसे ही N क्षेत्र में जाते हैं तो चालन बैण्ड- इलेक्ट्रॉन संधि को बिना पार किये ही इन विवरों से संयोग करते हैं। इस प्रकार संधि के दोनों ओर इलेक्ट्रॉन विवर संयोग की क्रिया आरम्भ हो जाती है। हम जानते हैं कि जब चालन बैण्ड (उच्च ऊर्जा स्तर) से इलेक्ट्रॉन संयोजी बैण्ड (निम्न ऊर्जा स्तर) में आता है, तो दोनों ऊर्जा स्तरों की ऊर्जाओं में अन्तर के बराबर ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। सामान्य डायोडों (सिगनल तथा पावर डायोडों) में यह उत्सर्जित ऊर्जा ऊष्मा के रूप में होती है जबकि प्रकाश उत्सर्जक डायोडों (लेड) में यह ऊर्जा प्रकाश के रूप में होती है। गैलियम आर्सेनाइड फॉस्फाइड (GaAsP), गैलियम फॉस्फाइड (GaP) पदार्थों का प्रयोग करके बनाये गये लेड लाल, हरे तथा भूरे रंग के प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं। गैलियम आर्सेनाइड अदृश्य इन्फ्रारेड प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं जिसे बर्गलर अलार्म सर्किटों में प्रयुक्त दिया जाता है। चित्र 3.63 में लेड का सांकेतिक परिपथ दिखाया गया है जो लेड दृश्य प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं। इनको डिजिटल घड़ियों, कैलकुलेटरों, मल्टी मीटरों, टेलीफोन स्विचों तथा इन्डीकेटरों आदि में प्रयोग किया जाता है।

Light Emitting Diode Sources

प्रकाश स्रोत की तरह प्रयुक्त एक लेड (LED) या सोलिड स्टेट लैम्प (SSL) को चित्र 3.64 में प्रदर्शित किया गया है।

Light Emitting Diode Sources

सामान्यतः लेड आकार में छोटा व वजन में हल्का होता है जिससे इसे डिजिटल सर्किट तथा अन्य सूक्ष्म युक्तियों में प्रयुक्त किया जाना सुविधा जनक होता है। लेड की अनुक्रिया समय बहुत तेज होता है तथा इसकी प्रतिबाधा अन्य डायोडो से अपेक्षाकृत कम होती है।

लेड को अप जायस अवस्था में प्रचालित किया जाता है। जब इस पर अप बायस विभव लगाया जाता है तो इसमें प्रयुक्त अर्द्ध चालक विद्युत चुम्बकीय विकिरण का उत्सर्जन करते हैं। इस प्रकार इन डायोड़ों में विद्युतीय ऊर्जा से दृश्य या अदृश्य प्रकाश विकिरण ऊर्जा उत्पन्न होती है। लेड का स्पेक्ट्रल अनुक्रिया उसमें प्रयुक्त अर्द्ध चालक पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करती है।

Light Emitting Diode Sources

विभिन्न रंग के प्रकाश उत्पन्न करने के लिये लेड बनाये जाते हैं। चित्र 3.65 में विशेष लेड के स्पेक्ट्रम अनुक्रिया वक्र प्रदर्शित किये गये हैं। लेड तापं परिवर्तन के लिये बड़े सुषाही होते हैं। ताप में परिवर्तन होने पर लेड के स्पेक्ट्रम अनुक्रिया वक्र की तरंग दैर्ध्य बदल जाती है।

विशेषताएँ (Characteristics):-

साधारण प्रकाश स्रोतों (लैम्पों) की तुलना में लेड में निम्न विशेषतायें होती हैं-

• ये निम्न वोल्टेज (1 से 2V) तथा निम्न धारा (5mA से 10mA) पर कार्य करते हैं तथा इनमें कम पावर खर्च होती है।
• इनमें गर्म करने की आवश्यकता नहीं होती हैं, अतः ये तुरन्त कार्य प्रारम्भ कर देते हैं अर्थात् इनकी स्विचिंग क्रिया बड़ी तेज होती है।
• ये भार में हल्के तथा आकार में छोटे होते हैं।
• यांत्रिक कम्पनों (हिलाने डुलाने) का इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
• इनकी आयु काफी (20) वर्ष से भी अधिक होती है।

उपयोग:-

लेड की उपर्युक्त विशेषताओं के कारण इन्हें प्रायः निम्न कार्यों के लिये प्रयुक्त किया जाता है।

1. गैलियम आर्सेनाइड लेडों का जो कि इन्फ्रारेड प्रकाश का उत्सर्जन करते हैं, बर्गलर अलामों में उपयोग किया जाता है।
2. हल्के व छोटे होने के कारण इन्हें डिजिटल घड़ियों, केलकूलेयों, मल्टीमी टेलीफोन स्विच इन्हीकेसों आदि में प्रयोग किया जाता है।

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