ट्रांसमिशन लाइन में यूज़ होने वाले मटेरियल कौन कौन है?

परिचय:-

दोस्तों आपने ट्रांसमिशन लाइन के टावरों को तो देखा ही होगा। जिसमे अलग अलग प्रकार के मैटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है। आज के इस पोस्ट में हम यही डिस्कस करेंगे की ट्रांसमिशन लाइन में यूज़ होने वाले मटेरियल में कौन कौन सा मैटेरियल और कहा कहां यूज होता है। और इसका उपयोग क्या है।

ट्रांसमिशन लाइन में यूज़ होने वाले मटेरियल:-

ट्रांसमिशन लाइन में बहुत से प्रकार के matrial का प्रयोग किया जाता है। जिससे हमारा ट्रांसमिशन लाइन अच्छे और पूरी सेफ्टी के साथ वर्क कर सके। और लंबे समय तक कोई मेंटेनेंस की जरूरत नहीं पड़े। इसके लिए कुछ बेसिक मैटेरियल इस्तेमाल किया जाता है। जो की निम्न है।

  1. कंडक्टर (conductor)
  2. Support (pole or Tower)
  3. Insulator
  4. Cross arm
  5. Transformer
  6. Lighting arrester (LA)
  7. Protecting instruments
  8. Accessories

Conductor in Hindi:-

दोस्तों अगर हम ट्रांसमिशन लाइन में कंडक्टर की बात करे तो कंडक्टर वह मैटेरियल होता है जो पावर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में मदद करता है। यह ट्रांसमिशन लाइन का मुख्य भाग होता है। अतः कंडक्टर की परिभाषा यह है कि कंडक्टर का काम ट्रांसमिशन लाइन में पावर को लो रेजिस्टेंस प्रोवाइड करना है ताकि पावर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ट्रैवल करने में पावर लॉस काम हो। कंडक्टर विभिन्न प्रकार के मैटेरियल का बना होता है जैसे कॉपर, एल्यूमिनम , या मिश्रित धातु का।

कुछ महत्वपूर्ण फैक्टर होते हैं जो एक कंडक्टर के मेटल को सलेक्ट करने में मदद करते है जो बिंदुवार इस प्रकार है।

  • कंडक्टर का रेजिस्टेंस लो यानी की काम होनी चाइए
  • हाई मैकेनिकल स्ट्रेंथ होनी चाइए। ताकि लंबी दूरी के span में उच्च मैकेनिकल स्ट्रेस को खेल सके। क्योंकि ट्रांसमिशन लाइन में लंबी लंबी दूरी पर टावर को लगाया जाता है।
  • कंडक्टर की कॉस्ट लो यानी की काम होनी चाइए। ताकि हमारा पूरी ट्रांसमिशन की लागत कम हो।
  • और साथ में आसानी से एवलेबल होनी चाइए। मेटल की कंडक्टर के तौर पर हमे ऐसा मैटेरियल यूज नहीं करनी चाइए जो इस अर्थ पर ही बहुत कम मात्रा में उपलब्ध हो।
  • वजन में हल्का होनी चाइए। वजह में हल्का होने से ट्रांसमिशन लाइन में कंडक्टर कैरियिंग मैटेरियल का लागत कम आता है।
  • और एटमॉस्फेयर के बुरी स्थिति को भी खेल जाए ऐसा होना चाइए। मतलब की प्रदूषण के स्थानों पर इसकी मेटेरिल वायु से रिएक्ट नही करनी चाइए। अन्यथा इस मैटेरियल पर जंग लगाना शुरू हो जाएगा।

Conductor material use in transmission line:-

तो दोस्तों उपर्युक्त सभी कंडीशन को एनालाइज करते हुए हैं कुछ कंडक्टर मैटेरियल का यूज करते है। जो की निम्न है।

  • कॉपर
  • एल्यूमीनियम
  • स्टील (GIS)
  • Phosphor bronze (for long span)

Support (pole or tower):-

दोस्तों चुकी हम ट्रांसमिशन लाइन में कंडक्टर को ओवर हेड लाइन के विधि द्वारा ले जाते है अतः इसके लिए हमे सपोर्ट की जरूरत पड़ती है। अतः इसके लिए हम या तो इलेक्ट्रिकल पोल या इलेक्ट्रिकल टावर का इस्तेमाल करते हैं।

अगर स्पेशली ट्रांसमिशन लाइन में कहे तो इसमें टावर का इस्तेमाल करते है। यह टावर स्टील बने होते है। जिसकी ऊंचाई ट्रांसमिशन वोल्टेज के आधार पर कम ज्यादा रखी जाती है।

सपोर्ट के बारे में विस्तार से जानने के लिए आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते है।

इंसुलेटर (Insulator):-

दोस्तों यही आप अगर किसी ट्रांसमिशन टावर को देखा होगा तो आपने से नीचे दिखाए गए चित्र जैसी चीज देखी होगी। इसे ही इंसुलेटर कहते हैं।

https://www.remove.bg/
Insulator

यह इंसुलेटर कंडक्टर को टावर से टच होने से बचाता है। आपने देखा होगा की यह इंसुलेटर अलग अलग वोल्टेज के ट्रांसमिशन लाइन में अलग अलग प्रकार या संख्या में होते है। अगर आपको इंसुलेटर के बारे में विस्तार से जानना है तो आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

क्रॉस आर्म (cross arm):-

यह क्रॉस आर्म ट्रांसमिशन टावर में इंसुलेटर को सहारे कंडक्टर को कैरी करता है। यह क्रॉस आर्म टावर से निकला हुआ भाग होता है। जो टावर के हाथ जैसा प्रतीत होता है। इसी पर कंडक्टर को लगाया जाता है।

ट्रांसमिशन लाइन में यूज़ होने वाले मटेरियल
Cross arm of tower : wikimedia commas

क्रॉस आर्म की लंबाई ट्रांसमिशन वोल्टेज के आधार पर निर्भर करता है। अगर ट्रांसमिशन वोल्टेज ज्यादा है तो क्रॉस आर्म को लंबाई बढ़ती जाती है।

ट्रांसफार्मर (transformer):-

दोस्तों ट्रांसफार्मर, ट्रांसमिशन लाइन का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह सब स्टेशन या पावर स्टेशन पर लगा होता है। जहां से पावर के वोल्टेज को ट्रांसफार्मर के द्वारा स्टेप अप या स्टेप डाउन करके पावर को ट्रांसमिट किया जाता है। ट्रांसफार्मर के बारे में विस्तार से जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

लाइटिंग अरेस्टर (lighting arrester):-

Lighting arrester एक ऐसा डिवाइस है को आकाशीय बिजिल से पूरे ट्रांसमिशन सिस्टम में लगे उपकरणों की सुरक्षा के लिए लगाया जाता है। यह सबस्टेशन में ट्रांसमिशन लाइन के इंटर होते ही लगाया जाता है। ताकि हमारा पूरा सब स्टेशन सुरक्षित रहे। इसके साथ ही टावर पर अर्थिंग वायर भी लगता जाता है तो आकाशीय बीजिली से सुरक्षा देता है।

Protecting instruments:-

इसके साथ ही चुकी हम ट्रांसमिशन लाइन को और ज्यादा रिलेबल बनाने के लिए हम इसमें बहुत सारे सुरक्षा उपकरण का उपयोग करते है। ताकि हमारा ट्रांसमिशन लाइन अधिक समय तक लगातार काम करता रहे। इसमें सुरक्षा उपकरणों जैसे रिले, सर्किट ब्रेकर, आइसोलेटर, लाइटिंग arrester, आदि।

Accessories:-

इसके साथ ही ट्रांसमिशन लाइन में बहुत सारे एसेसरीज भी इस्तेमाल किए जाते है। और साथ में ट्रांसमिशन। लाइन की डेली बेसिस पर एक रिकॉर्ड फाइल में इसकी एक्टिविटी भी मेंटेन की जाती है । ताकि प्रत्येक दिन की पावर खर्च और पावर शेडिंग की जानकारी भविष्य में काम आ सके। और कोई दिक्कत आने पर उसके हिसाब से हम अपने पावर यूज को और विश्वशनीय बना सके।

Leave a comment