ओपन सर्किट फाल्ट, शार्ट सर्किट फाल्ट और अर्थ फाल्ट का विवरण

परिचय:

Electrical power system बहुत सारी स्थितियां होती है जिनको हम abnormal condition कहते हैं। और इन्ही कंडीशन को हम इलेक्ट्रिकल फॉल्ट भी कहते हैं। इलेक्ट्रिकल फॉल्ट के अंतर्गत मुख्य रूप से तीन प्रकार के फाल्ट आते हैं। जिनमे ओपन सर्किट फॉल्ट, शॉर्ट सर्किट फॉल्ट, और अर्थेड फॉल्ट आता है। आज के इस पोस्ट के माध्यम से इन्ही सारे फॉल्ट और इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम की एबोन्रमैलिटी के बारे में डिस्कस करेंगे।

इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम के असामान्य स्थितियां ( Abnormal conditions of a electrical power system) :

क्योंकि हमें पता है कि इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में मुख्य रूप से दो कंडीशंस आते हैं पहले नॉरमल कंडीशन तथा दूसरा एब्नार्मल कंडीशन। नॉरमल कंडीशन में इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम सुचारू से संचालित रहती है लेकिन जब एब्नार्मल कंडीशन आता है तो उसे स्थिति में हमारा इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में गड़बड़ी आती है और इलेक्ट्रिकल पावर को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में असमर्थता साबित होती है। अतः आज के इस पोस्ट में हम इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम के एब्नार्मल कंडीशन के बारे में डिस्कस करेंगे।

शार्ट सर्किट फाल्ट

सामान्य स्थितियों से भिन्न में स्थितियां जो विद्युत शक्ति प्रणाली में इलेक्ट्रिकल बैरियर के उत्पन्न करती है और इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में पावर का ट्रांसफर ट्रांसमिशन सतत कायम रहने पर इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में बाधा उत्पन्न करती है वह एब्नार्मल कंडीशन कहलाती है। इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम में निम्न प्रकार की असामान्य स्थितियों हो सकती है।

  • ओवर वोल्टेज कंडीशन
  • Under voltage condition
  • ओवर करंट कंडीशन
  • अंडर करंट कंडीशन
  • ओवर पावर फैक्टर कंडीशन
  • अंडर पावर फैक्टर कंडीशन
  • ओवर फ्रीक्वेंसी कंडीशन
  • अंडर फ्रीक्वेंसी कंडीशन
  • टेंपरेचर राइट कंडीशन
  • ओवरलोड कंडीशन
  • Unbalance load condition
  • instability condition
  • पावर स्विंग कंडीशन
  • Reverse power flow condition
  • फ्री एंगल चेंज कंडीशन
  • ओवर स्पीड कंडीशन ऑफ़ प्राइम मूवर
  • ओवर स्पीड कंडीशन ऑफ़ जनरेशन
  • ओवरहीटिंग कंडीशन आफ ट्रांसफॉर्मर
  • कंडीशन ऑफ़ लॉस ऑफ़ फील्ड एक्सीटेशन
  • ओवरहीटिंग कंडीशन का जनरेटर

इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम का फाल्ट की स्थिति (faulty condition of an electrical power system) :

वे स्थितियाँ, जो वैद्युत शक्ति प्रणाली के मूल विद्युतरोधन माध्यम के क्षतिग्रस्त अथवा भंग होने के कारण, उत्पन्न प्रदोष (short circuit or earth fault) के बाद, वैद्युत प्रदाय परिपथ में प्राप्त होती है, प्रदोषी स्थितियाँ कहलाती हैं। इनके सतत् कायम रहने से वैद्युत शक्ति प्रणाली में घातक असामान्य स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, जो सम्पूर्ण वैद्युत शक्ति प्रणाली को नष्ट-भ्रष्ट कर सकती हैं। इसीलिये वैद्युत शक्ति प्रणाली को रक्षण युक्तियों द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाती है। प्रदोषी स्थितियाँ निम्नलिखित है-

  1. खुलापथ प्रदोषी स्थिति (open circuit fault condition)
  2. लघुपथ प्रदोषी स्थिति (short circuit fault condition)
  3. भू-प्रदोषी स्थिति (earth fault condition)
  4. भू-क्षरण प्रदोषी स्थिति (earth leakage fault condition)

घटकों के अनुसार वैद्युत प्रदोषों का वर्गीकरण (Classification):

विभिन्न घटकों के अनुसार, त्रिकला वैद्युत शक्ति प्रणाली के वैद्युत प्रदोषों को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है-

विरूपण या प्रकृति के अनुसार (According to deformation or nature):

खुला परिपथ दोष (Open circuit faults) :

  1. एकल कला खुलापथ प्रदोष (single phase open circuit fault)
  2. द्विकला खुलापथ प्रदोष (two phase open circuit fault)
  3. त्रिकला खुलापथ प्रदोष (three phase open circuit fault)

लघु परिपथ प्रदोष (Short circuit faults):

  1. द्विकला लघुपथ प्रदोष (two phase short circuit fault)
  2. त्रिकला लघुपथ प्रदोष (three phase short circuit fault)

भू-योजन प्रदोष (Earth-fault or ground fault):

  1. एकल कला भू-योजन प्रदोष (single phase earth fault)
  2. द्विकला भू-योजन प्रदोष (two phase earth fault)
  3. त्रिकला भू-योजन प्रदोष (three phase earth fault)

मिश्रित या संयुक्त प्रदोष (Mixed or combined fault):

  1. द्विकला लघुपथित एवं शेषकला भू-योजन प्रदोष
  2. द्विकला लघुपथित एवं शेषकला खुलापथित प्रदोष
  3. द्विकला भू-योजित तथा शेषकला खुलापथित प्रदोष (two phase earthed and remaining phase open circuited fault)
  4. द्विकला खुलापथित तथा शेषकला भू-योजित प्रदोष (two phase open circuited and remaining phase earthed fault)

समयानुसार (According to timings or time limit):

  1. स्थायी प्रदोष (Permanent fault or stable fault)
  2. अस्थायी प्रदोष (Temporary fault or unstable fault)

धारा सममित के अनुसार (According to current symmetry):

  1. सममित प्रदोष (Symmetrical fault)
  2. असममित प्रदोष (Asymmetrical fault)

चर राशियों के अनुसार (According to variable quantities) :

अतिधारा प्रदोष (Over current fault):

  1. लघु परिपथ प्रदोष (short circuit fault)
  2. भू-योजन प्रदोष (earth fault)
  3. क्षरण प्रदोष (leakage fault)
  4. अति भार स्थिति (over load condition)
  5. कोरोना प्रभावी स्थिति (corona affected condition)

निम्न या न्यून वोल्टता प्रदोष (Low or under voltage fault):

  1. लघु परिपथ प्रदोष (short circuit fault)
  2. क्षेत्र असफल प्रदोष (alternator’s field failure fault)

वापसी शक्ति प्रवाह प्रदोष (Reverse power flow fault):

  1. क्षेत्र असफल प्रदोष (alternator’s field failure fault

उच्च वोल्टता प्रदोष (High voltage fault):

  1. तडित हिल्लोल स्थिति (lightning surge condition)
  2. लोड स्विच ऑफ स्थिति (load switch off condition)
  3. जनित्र उच्च गति स्थिति (generator high speed condition)

उच्च आवृत्ति स्थिति (High frequency condition):

  1. प्राथमिक चालक की उच्च चाल स्थिति (high speed condition of prime-mover)
  2. जनित्र की उच्च चाल स्थिति (high speed condition of generator)

दृष्टिगत स्थितियों के अनुसार (According to visible conditions):

1. आंतरिक या अन्तः वैद्युत प्रदोष (Internal or inter electrical fault)
2. बाहरी या बाह्य वैद्युत प्रदोष (External electrical fault)

परिचालन स्थितियों के अनुसार (According to operating conditions):

  1. भार का आकस्मिक हटाना (Sudden removal of load)
  2. अति भार स्थिति (Over load condition)
  3. असन्तुलन भार स्थिति (Unbalance load condition)
  4. कला विचलन स्थिति (Phase swing condition)
  5. स्विचन प्रचालन स्थिति (Switching operation condition)
  6. खुली कला स्थिति (Open phase condition)

खुलापथ प्रदोष (Open circuit fault):

किसी वैद्युत शक्ति प्रणाली का जब एक या एक से अधिक फेज किसी प्रकार खुल जाता है, अथवा टूटकर अथवा क्षति या भंग होकर उसके अंग पृथक् पृथक् हो जाते हैं; तब यह प्रदोष खुला परिपथ प्रदोष या ओपेन सर्किट फॉल्ट अथवा ब्रेक-अप फाल्ट कहलाता है। इस समय प्रस्तुत परिपथ में प्रतिरोध या प्रतिबाधा का मान अनन्त होने के कारण, धारा का मान शून्य हो जाता है। प्रत्यावर्ती धारा की त्रिकला वैद्युत शक्ति प्रणाली में यह प्रदोष निम्न तीन प्रकार का होता है-

  1. एकल कला खुलापथ प्रदोष (Single phase open circuit fault)
  2. द्विकला खुलापथ प्रदोष (Two phase open circuit fault)
  3. त्रिकला खुलापथ प्रदोष (Three phase open circuit fault)

खुलापथ प्रदोषों के कारण (Causes of open circuit fault):

किसी वैद्युत शक्ति प्रणाली में खुलापथ प्रदोष उत्पन्न होने के निम्न कारण सम्भव हैं-

  1. तापक्रम से किसी संयोजन के खुल जाने के कारण।
  2. अधिक तनाव से चालक (तार) के टूट जाने के कारण।
  3. यान्त्रिक आघात से चालक के “क्षय या कट” जाने के कारण।
  4. अति धारा पर उत्पन्न ताप से चालक के पिघलकर टूट जाने के कारण।
  5. आँधी या तूफान से शिरोपरि लाइन चालकों के टूट जाने के कारण।
  6. बरसात की ऋतु में पानी की बाढ़ से शिरोपरि लाइनों के सामने वाले आलम्ब प्रायः झुक जाते हैं; परिणामस्वरूप लाइन चालकों के टूट जाने के कारण।
  7. गर्मी की ऋतु में सेग रहित शिरोपरि लाइनें, अधिक तनाव के प्रभाव से ये चालक शीतकाल में सिकुड़ने से टूट जाने के कारण।
  8. चालकों में बल पड़ने की स्थिति में अधिक तनाव बल से लाइन चालकों के टूट जाने के कारण।
  9. प्रायः अधिक मुड़ाव (sharp turning) के साथ, उच्च यान्त्रिक दाब पर चालकों के टूट जाने के कारण।
  10. शिरोपरि लाइनों पर किसी विशाल वृक्ष से टूटकर या झुककर गिरने से लाइन चालकों के टूटने के कारण।
  11. यदा-कदा ग्लाइडर, हेलीकॉप्टर, वायुयान आदि के टकराने से शिरोपरि लाइन चालकों के टूटने के कारण।

लघुपथ प्रदोष (Short circuit fault):

किसी वैद्युत शक्ति प्रणाली के जब दो या दो से अधिक फेज, किसी प्रकार परस्पर लघु परिपथित हो जाते हैं, अर्थात् एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं, या मिल जाते हैं, तब प्रदोष लघु परिपथ प्रदोष या शोर्ट सर्किट फाल्ट कहलाता है। इस समय इस परिपथ में प्रतिरोध या

प्रतिबाधा का मान अति निम्न होने के कारण, वैद्युत धारा का मान अति उच्च होता है। प्रत्यावर्ती धारा की त्रिकला वैद्युत शक्ति प्रणाली में यह प्रदोष निम्न दो प्रकार का होता है-

  1. द्विकला लघुपथ प्रदोष (two phase short circuit fault)
  2. त्रिकला लघुपथ प्रदोष (three phase short circuit fault)

लघुपथ प्रदोषों के कारण (Causes of short circuit faults):

किसी वैद्युत शक्ति प्रणाली में लघुपथ प्रदोष उत्पन्न होने के निम्न कारण सम्भव हैं-

  1. अधिक सेग की उपस्थिति में तेज हवा (आँधी या तूफान) से झूलते हुये शिरोपरि लाइन चालकों के परस्पर लिपटकर जुड़ने के कारण।
  2. किसी वृक्ष अथवा उसकी टहनी के शिरोपरि लाइन चालक से जुड़ जाने के कारण ।
  3. याँत्रिक आघात से भूमिगत केबिल के विद्युतरोधन को कटकर क्षय हो जाने के कारण।
  4. भूमिगत केबिल के वैद्युतरोधन के पुराने पड़ने अर्थात् जीवनकाल समाप्त हो जाने के कारण।
  5. खुले केबिल चालकों को चूहा, छिपकली, साँप (snakes), आदि द्वारा जुड़ जाने के कारण।
  6. शिरोपरि लाइन चालकों के बीच किसी परिंदा या पक्षी (birds), बन्दर (monkey), पतंग की डोरी आदि, जुड़ जाने के कारण।

भू-प्रदोष (Earth fault or ground fault):

किसी वैद्युत शक्ति प्रणाली का जब एक या एक से अधिक फेज, किसी प्रकार पृथ्वी के साथ पूर्ण रूप से जुड़ जाता है, अर्थात् सम्पर्क स्थापित कर लेता है, तब यह प्रदोष, भू- प्रदोष या अर्थ-फाल्ट या ग्राउण्ड फाल्ट कहलाता है। इस समय, भू-प्रदोष, परिपथ में निम्न प्रतिरोध या प्रतिबाधा होने के कारण, वैद्युत धारा का मान अति उच्च होता है। प्र० घा० की त्रिकला वैद्युत शक्ति प्रणाली में यह प्रदोष निम्न तीन प्रकार का होता है-

  1. एकल कला भू-प्रदोष (single phase earth fault)
  2. द्विकला भू-प्रदोष (two phase earth fault)
  3. त्रिकला भू-प्रदोष (three phase earth fault)

भू-प्रदोषों के कारण (Causes of earth faults):

किसी वैद्युत शक्ति प्रणाली में भू-प्रदोष उत्पन्न होने के निम्न कारण सम्भव हैं-

  1. पॉर्सिलेन इंस्यूलेटर की विफलता से शिरोपरि लाइन चालक के आलम्ब से सम्पर्कित होने के कारण।
  2. किसी विशाल पेड़ की टहनी हवा के झोंके या सामान्य स्थिति से अधिक झुककर, शिरोपरि लाइन चालक से जुड़ने के कारण।
  3. आलम्ब (support) या क्रोस आर्म पर बैठे हुये परिन्दा (चील, गिद्ध, मोर, कौआ आदि) शिरोपरि लाइन चालक से जुड़ने के कारण
  4. भूमिगत केबिल के विद्युतरोधन के यांन्त्रिक आघात से क्षय (कट) जाने से चालक के पृथ्वी से सम्पर्कित हो जाने के कारण।
  5. भूमिगत केबिल के विद्युतरोधन के पुराने पड़ जाने पर अर्थात् जीवनकाल (life) समाप्त हो जाने पर, चालक के जमीन से जुड़ (छू) जाने के कारण।

संयुक्त प्रदोष (Combined fault):

वैद्युत शक्ति प्रणाली के उक्त प्रदोषों में से, जब कोई से दो या दो से अधिक प्रदोष वह प्रदोष संयुक्त प्रदोष या कम्बाइण्ड फाल्ट कहलाता है,

एक साथ घटित होते हैं; तब जैसे किन्हीं दो कला तारों का परस्पर जुड़ने के साथ-साथ शेष तृतीय कला तार का पृथ्वी से जुड़ना, द्विकला लघु परिपथ प्रदोष तथा शेष एकल कला भू-योजन प्रदोष कहलाता है और यह प्रदोष संयुक्त प्रदोष के अन्तर्गत आता है। इसी प्रकार दो कला तारों का परस्पर एक साथ पृथ्वी से जुड़ना तथा शेष तृतीय कला तार का टूटकर उसके अंगों का पृथक् पृथक् हो जाना, द्विकाल भू-योजन प्रदोष एवं शेष एकल कला खुला परिपथ प्रदोष कहलाता है और यह भी संयुक्त प्रदोष के अन्तर्गत आता है। सभी संयुक्त प्रदोष, असममित प्रदोष होते हैं।

संयुक्त प्रदोषों के कारण (Causes of combined faults):

किसी वैद्युत शक्ति प्रणाली से संयुक्त प्रदोष उत्पन्न होने के निम्न कारण सम्भव हैं-

  1. किसी विशाल वृक्ष की टहनी का शिरोपरि लाइन के किन्हीं दो या दो से अधिक चालकों से एक साथ सम्पर्कित होने के कारण।
  2. किसी ग्लाइडर या हेलिकॉप्टर अथवा वायुयान के शिरोपरि लाइन से टकरा जाने के कारण।
  3. आँधी, तूफान तथा बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में शिरोपरि लाइन चालकों के टूटने तथा परस्पर जुड़ने के कारण।

भू-क्षरण प्रदोष (Earth or ground, leakage fault):

किसी वैद्युत शक्ति प्रणाली का जब एक या एक से अधिक फेज किसी प्रकार पृथ्वी के साथ आंशिक रूप से जुड़ जाता है, अर्थात् सम्पर्क स्थापित कर लेता है; तब यह प्रदोष भू-क्षरण प्रदोष अथवा अर्थ-लौकेज फॉल्ट या ग्राउण्ड लीकेज फाल्ट कहलाता है। इस समय भू-क्षरण प्रदोष परिपथ में प्रतिरोध या प्रतिबाधा का मान घट जाने के कारण, वैद्युत धारा का मान बढ़ जात है। ए० सी० थ्री फेज पॉवर सिस्टम में यह प्रदोष निम्न तीन प्रकार का होता है-

  1. एकल कला भू-क्षरण प्रदोष (single phase earth leakage fault)
  2. द्विकला भू-क्षरण प्रदोष (two phase earth leakage fault)
  3. त्रिकला भू-क्षरण प्रदोष (three phase earth leakage fault)

भू-क्षरण प्रदोषों के कारण (Causes of earth leakage faults):

  1. शिरोपरि लाइन में प्रयुक्त पॉर्सिलेन इंस्यूलेटर के आँशिक रूप से क्षय (partially damage) होने के कारण
  2. भूमिगत केबिल में प्रयुक्त विद्युतरोधन (insulation) के आँशिक रूप से क्षय होने के कारण।
  3. भूमिगत केबिल में प्रयुक्त इंस्यूलेटर के आँशिक रूप से जीर्ण हो जाने के कारण, अर्थात् आँशिक रूप से जीवन काल (life) समाप्त हो जाने के कारण।

किरीट क्षरण प्रदोष (Corona leakage fault):

किसी वैद्युत शक्ति-प्रणाली की शिरोपरि लाइन के जब एक या एक से अधिक नंगे चालक की सतह से वैद्युत आवेश का क्षरण, प्रत्यक्ष वायुमण्डल से होने लगता है, तब यह प्रदोष किरीट क्षरण प्रदोष या कोरोना लीकेज फाल्ट कहलाता है। इस प्रदोष में प्रत्यक्ष वैद्युत शक्ति हानियाँ होती है, जिसके कारण शिरोपरि वैद्युत शक्ति प्रणाली की दक्षता घट जाती है। ए० सी० थ्री फेज ओवर हेड पॉवर सिस्टम में यह दोष निम्न प्रकार का होता है

  1. एकल कला किरीट क्षरण प्रदोष
  2. द्विकला किरीट क्षरण प्रदोष
  3. त्रिकला किरीट क्षरण प्रदोष

किरीट क्षरण प्रदोषों के कारण (Causes of corona leakage faults):

किसी शिरोपरि शक्ति लाइन के चालकों में किरीट क्षरण प्रदोष के उत्पन्न होने के निम्न कारण सम्भव है-

  1. लाइन वोल्टता (line voltage) के अधिक बढ़ जाने के कारण।
  2. लाइन चालकों के बीच की पारस्परिक दूरी घट जाने के कारण।
  3. लाइन चालकों के समयोपरांत पतले (thin) हो जाने के कारण।
  4. लाइन चालकों के बीच की, पारस्परिक दूरी (d) तथा चालक की त्रिज्या (7) के अनुपात (d/r) के घट जाने के कारण।
  5. चालकों की सतह के खुरदुरे (rough) हो जाने के कारण
  6. चालकों के बीच वायुमण्डलीय माध्यम में आर्द्रता (नमी, पानी, ओस, कुहरा आदि) के अधिक बढ़ जाने के कारण।

अतिधारा वैद्युत प्रदोष (Over current electrical fault):

वह वैद्युत प्रदोष, जो वैद्युत शक्ति प्रणाली के अतिधारा प्रवाह का कारण बनता है, अर्थात् जिसके कारण वैद्युत शक्ति प्रणाली में धारा का मान सामान्य धारा के मान से कई गुणा बढ़ जाता है, अतिधारा प्रदोष अथवा ओवर करेंट फॉल्ट कहलाता है। इसके मुख्य कारण अग्रिम शीर्षक के अन्तर्गत लिखित हैं

अतिधारा वैद्युत प्रदोषों के कारण (Causes of o.c.e. faults):

वैद्युत प्रणाली में अतिधारा प्रदोष के निम्न कारण सम्भव हैं-

  1. लघुपथन प्रभाव के कारण (due to short circuiting effect)
  2. भू-क्षरण प्रभाव के कारण (due to earth leakage effect)
  3. किरीट क्षरण प्रभाव के कारण (due to corona leakage effect)
  4. अतिभार प्रभाव के कारण (due to over load effect)
  5. निम्न शक्तिगुणक के कारण (due to low power factor)
  6. निम्न वोल्टता या विभव के कारण (due to low voltage)

निम्न वोल्टता वैद्युत प्रदोष (Under voltage electrical fault):

वह वैद्युत प्रदोष, जो वैद्युत शक्ति प्रणाली में निम्न वोल्टता का कारण बनता है, अर्थात् जिसके कारण वैद्युत शक्ति प्रणाली में वोल्टता का मान, सामान्य वोल्टता के मान से कई गुना घट जाता है, निम्न वोल्टता प्रदोष अथवा अण्डर वोल्टता फाल्ट कहलाता है। इसके मुख्य कारण, अग्रिम शीर्षक के अन्तर्गत लिखित हैं-
निम्न वोल्टता प्रदोषों के कारण (Causes of u. v. faults):

निम्न वोल्टता प्रदोष (under voltage fault) के निम्न कारण सम्भव हैं-

  1. लघुपथन प्रभाव के कारण (due to short circuiting effect)
  2. प्रत्यावर्तक या जनित्र उत्तेजन की असफलता के कारण

असममित प्रदोष (Asymmetrical fault):

वह वैद्युत प्रदोष, जो वैद्युत शक्ति प्रणाली की विभिन्न कलाओं में प्रवाहित धारा के मान को असमान बनाता है, अर्थात् जिसके कारण वैद्युत शक्ति प्रणाली की विभिन्न कलाओं में भिन्न-भिन्न मान की धारा प्रवाहित होने लगती है, असममित प्रदोष कहलाता है। इसके मुख्य कारण अग्रिम शीर्षक के अन्तर्गत लिखित हैं।

असममित प्रदोषों के कारण (Causes of asymmetrical faults):

वैद्युत शक्ति प्रणाली में असन्तुलन प्रदोष घटित होने के निम्न कारण सम्भव हैं-

  1. लघुपथन प्रभाव के कारण (due to short circuiting effect)
  2. भू-क्षरण प्रभाव के कारण (due to earth leakage effect)
  3. खुलापथन प्रभाव के कारण (due to open circuiting effect)

वापसी शक्ति प्रवाह प्रदोष (R.P.F. fault):

वह वैद्युत प्रदोष, जो अंतः योजित वैद्युत शक्ति प्रणाली (inter connected power system) में विपरीतय शक्ति प्रवाह (reverse power flow) का कारण बनता है, अर्थात् जिसके कारण वैद्युत शक्ति प्रवाह की दिशा बदलकर विपरीत (reverse) हो जाती है, विपरीतय या वापसी शक्ति प्रवाह प्रदोष अथवा रिवर्स पॉवर फ्लो फ़ॉल्ट कहलाता है। प्रस्तुत प्रदोष की उपस्थिति केवल वैद्युत शक्ति की अन्तर्योजित प्रणाली (inter connected system) अर्थात् दोनों सिरा प्रदायित पोषकों या वितरकों में ही सम्भव है।

उत्प्लावी या हिल्लोल प्रदोष (Surge fault):

वह वैद्युत प्रदोष, जो वैद्युत शक्ति प्रणाली में ‘उच्च आवृत्ति की उच्च वोल्टता तरंगें उत्पन्न करता है, उतप्लावी प्रदोष अथवा सर्ज फॉल्ट कहलाता है। इसे उच्च वोल्टता तरंग प्रदोष (high voltage wave fault) भी कहते हैं; जैसे-वैद्युत शक्ति प्रणाली की संरचना लाइनों पर बादलों की बिजली से उत्पन्न उच्च आवृत्ति पर उच्च वोल्टता की तरंगें (surges) आदि ।

लघुपथ धारा (Short circuit current)

जब किसी वैद्युत शक्ति प्रणाली में किसी बिन्दु पर वैद्युत परिपथ प्रदोष विकसित होता है, अर्थात् धारा को निम्न रोधी (less resistive) पथ प्राप्त होता है, तो उस वैद्युत शक्ति प्रणाली में वैद्युत धारा का मान, सामान्य वैद्युत धारा के मान से कई गुना अधिक बढ़ जाता है; क्योंकि प्रणाली की तुल्य प्रतिबाधा का मान घट जाता है और यह वैद्युत धारा अपने सामान्य पथ से विचलित होकर, अर्थात् अपने वास्तविक पथ से हटकर, प्रदोषी बिन्दु की ओर प्रवाहित होने लगती है। इस घटना या प्रक्रिया को लघुपथन (short circuiting) कहते हैं, तथा इस नवीन निर्मित धारा पथ को प्रदोषी परिपथ (faulty circuit) कहते हैं और इस प्रदोषी परिपथ में बहने वाली धारा को लघुपथन धारा या शोर्ट सर्किट करेंन्ट कहते हैं। इसका मान प्रदोषी परिपथ की सम्पूर्ण प्रतिबाधा (impedance) पर निर्भर करता है, जबकि प्रणाली की वोल्टता (v) क्षमता (kva) तथा शक्ति गुणांक (cos φ) स्थिर कायम की गई हो।

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