इंडस्ट्री के क्रेन में स्लिप रिंग मोटर का इस्तेमाल क्यों किया जाता है ?

परिचय :-

दोस्तों अगर आप नहीं जानते है तो हम आपको बता दे को लगभग सभी प्रकार के इंडस्ट्री में लगभग 85 – 90 % मोटर, इंडक्शन मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। इस इंडक्शन मोटर में भी अधिकतर स्क्वेरल केज इंडक्शन मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इंडस्ट्री में क्रेन में स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा क्यों किया जाता है इसी के बारे में आज के इस पोस्ट में डिस्कस करेंगे।

स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर और स्क्वरल केज इंडक्शन मोटर में अंतर :-

दोस्तों इंडक्शन मोटर में 2 प्रकार के मोटर होते है ये बात तो हम जानते हैं। जिसमे से स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर के बारे में संक्षेप में जान लेते है। तो स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर के रोटर के वाइंडिंग में स्लिप रिंग लगा होता है। जिसके द्वारा हम मोटर में सप्लाई देते है। इसीलिए इसे हम स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर कहते है।

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क्रेन में स्लिप रिंग मोटर

लेकिन अगर हम squirrel cage induction motor की बात करें तो इसके रोटर में बेसिकली फिक्स्ड या सॉलिड वाइंडिंग के रूप में उसके रोटर में कॉपर के बार या rod लगे होते है। जो एंड रिंग से शॉर्ट किए रहते हैं।

क्रेन में स्लिप रिंग मोटर

अतः इसमें इसकी वाइंडिंग फिक्स्ड होने के कारण इस प्रकार के मोटर को स्टार्टिंग टॉर्क भी फिक्स्ड होती है। इसके स्टार्टिंग टॉर्क कोई चेंजिंग नही कर सकते हैं।

लेकिन अगर हम स्लिप रिंग इंडक्शन मोटर की बात करें तो उसमे जो वाइंडिंग होती है वह स्लिप रिंग के द्वारा कनेक्टेड होती है। जिसके कारण हम उसमे एक्स्ट्रा रेसिसिटेंस जोड़ कर उसके वाइडिंग का रेजिस्टेंस बढ़ा सकते हैं। जिसके कारण हमारे मोटर का स्टार्टिंग टॉर्क बढ़ जाता है।

मतलब इन दोनो मोटर की विशेषता से हमने यह समझा को स्लिप रिंग मोटर में हम अपने अनुसार बाहरी रेजिस्टेंस जोड़ कर स्टार्टिंग टॉर्क को बढ़ा सकते हैं। जबकि स्क्वेरल केज इंडक्शन मोटर में नहीं।

क्रेन में स्लिप रिंग मोटर यूज होने के कारण :-

चुकी हम जानते है को क्रेन में लोड अलग अलग समय पर अलग अलग होता है। मतलब की क्रेन पर लोड हमेशा बदलता रहता है । एक समान नहीं रहता है।

अतः हम ऐसी स्थिति में ऐसे मोटर को प्रयोग नहीं कर सकते जिसमे एक समान स्टार्टिंग टॉर्क हो। अतः हम ऐसे मोटर का उपयोग करेंगे जो आवश्यकतानुसार उसका स्टार्टिंग टॉर्क बदला जा सके।

अतः मुख्य रूप से यही कारण है कि हम स्लिप रिंग मोटर का इस्तेमाल करते है। क्योंकि इस मोटर में हम आवश्यकतानुसार बाहरी रेजिस्टेंस लगाकर स्टार्टिंग टॉर्क बदल सकते है।

ट्रेन में हम स्लिप रिंग मोटर क्यों नही इस्तेमाल करते है?:-

अब सवाल यह आता है को यदि हम स्लिप रिंग मोटर का स्टार्टिंग टॉर्क आवश्यकतानुसार बदल सकते हैं। तो हम इसे ट्रेन में स्लिप रिंग मोटर का इस्तेमाल क्यों नहीं कर सकते हैं।

क्रेन में स्लिप रिंग मोटर

क्योंकि ट्रेन में भी स्टार्टिंग टॉर्क को ज्यादा जरूरत होती है। हम जानते है की ट्रेन में एसी सीरीज मोटर का इस्तेमाल करते हैं। ये को एसी सीरीज मोटर होता है।

यह वास्तव में डीसी सीरीज मोटर ही होता है। जिसे हम लोग मोडिफाइड करके एसी सप्लाई पर चलने के उपयुक्त बनाते है।
और अगर आप डीसी सीरीज मोटर के बारे में पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा कि डीसी सीरीज मोटर या एसी सीरीज मोटर का स्टार्टिंग टॉर्क बहुत ही ज्यादा उच्च होता है। और इस मोटर को हम कभी भी no load पर ऑपरेट नहीं करते है।

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क्योंकि no load के कंडीशन में डीसी सीरीज मोटर का स्पीड अनकंट्रोल्ड हो जाता है। अतः यह एक बेसिक रीजन यह हो सकता है कि ट्रेन में सामान्य क्रेन के अपेक्षा बहुत ज्यादा टॉर्क की जरूरत होती है। इसीलिए हम सीरीज मोटर  इस्तेमाल करते हैं।

और दूसरा रीजन यह हो सकता है कि हम लोग एसी सीरीज मोटर में VFD ka इस्तेमाल करते है। और स्लिप रिंग मोटर उतना स्टार्टिंग टॉर्क पैदा नही कर सकता जितना की एक सीरीज मोटर पैदा कर सकता है।

क्योंकि स्लिप रिंग में रेसिटेंस में बढ़ने पर मोटर का  टॉर्क बढ़ता है। मतलब की रोटर वाइंडिंग में करेंट का मान घटाने पर टॉर्क बढ़ रहा है। क्योंकि जब रेजिस्टेंस का मान बढ़ाएंगे तो करेंट का मान घटेगा।

लेकिन सीरीज मोटर के केस में आप देखेंगे तो इसमें मोटर के फील्ड वाइंडिंग में जितना करेंट का मान बढ़ेगा उतना ही स्टार्टिंग टॉर्क बढ़ेगा।

क्योंकि इसके फील्ड winding series में होती है। अतः जब ट्रेन रुकी रहती है। तो लोड ज्यादा होने के कारण बहुत ज्यादा लोड होने से मोटर के फिल्ड वाइंडिंग में करेंट का मान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। जिसे मोटर का स्टार्टिंग टॉर्क बहुत उच्च हो जाता है। और मोटर ट्रेन को खींच लेती है।

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